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दो दिन में शुरू होगा रक्त कोष भवन की खामियों को दूर करने का काम
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
Updated Sun, 10 Jun 2018 10:52 PM IST
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चंपावत जिला अस्पताल परिसर में स्थित रक्त संग्रहण केंद्र।
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। जिले का पहला रक्त कोष (ब्लड बैंक) बमुश्किल डेढ़ माह के भीतर शुरू हो जाएगा। 28 मार्च को केंद्र से जांच को आए दल द्वारा बताई गई तीन खामियों को दूर करने की दिशा में जिला अस्पताल ने कदम आगे बढ़ाया है। अगले दो दिनों में इन कार्यों को शुरू कर दिया जाएगा।
चंपावत में 2012 मेें करीब 22 लाख रुपये की लागत से बने ब्लड बैंक भवन के बावजूद रक्त कोष शुरू नहीं हो पाया है। जबकि इसके संचालन के लिए न केवल विशेषज्ञ डॉक्टर (पैथोलॉजिस्ट) है, बल्कि सभी जरूरी उपकरण भी मौजूद हैं। दवा निरीक्षक सुनीति चौधरी के नेतृत्व में केंद्र से आई टीम ने ढाई माह पूर्व रक्त कोष की व्यवस्थाओं का मुआयना किया था। टीम ने उपकरणों सहित यहां की व्यवस्था को आमतौर पर ठीक पाया था। मगर रक्त कोष संचालन के लाइसेंस से पूर्व तीन मामूली खामियों को दूर करने के निर्देश दिए थे।
ये हैं तीन खामियां
केंद्रीय टीम ने रक्त कोष भवन के बाहरी हिस्से में शौचालय का निर्माण, एल्मुनियम के दरवाजे लगाने के साथ जनरेटर में जाली लगाने के निर्देश दिए गए थे। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी ने बताया कि इस निर्माण में करीब ढाई लाख रुपये खर्च आएगा। दो दिन के भीतर काम शुरू कर 15 जुलाई तक पूरा करा लिया जाएगा। काम के पूरा होने की जानकारी केंद्र सरकार की टीम को भेजने के बाद लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा।
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चंपावत में 2012 मेें करीब 22 लाख रुपये की लागत से बने ब्लड बैंक भवन के बावजूद रक्त कोष शुरू नहीं हो पाया है। जबकि इसके संचालन के लिए न केवल विशेषज्ञ डॉक्टर (पैथोलॉजिस्ट) है, बल्कि सभी जरूरी उपकरण भी मौजूद हैं। दवा निरीक्षक सुनीति चौधरी के नेतृत्व में केंद्र से आई टीम ने ढाई माह पूर्व रक्त कोष की व्यवस्थाओं का मुआयना किया था। टीम ने उपकरणों सहित यहां की व्यवस्था को आमतौर पर ठीक पाया था। मगर रक्त कोष संचालन के लाइसेंस से पूर्व तीन मामूली खामियों को दूर करने के निर्देश दिए थे।
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ये हैं तीन खामियां
केंद्रीय टीम ने रक्त कोष भवन के बाहरी हिस्से में शौचालय का निर्माण, एल्मुनियम के दरवाजे लगाने के साथ जनरेटर में जाली लगाने के निर्देश दिए गए थे। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी ने बताया कि इस निर्माण में करीब ढाई लाख रुपये खर्च आएगा। दो दिन के भीतर काम शुरू कर 15 जुलाई तक पूरा करा लिया जाएगा। काम के पूरा होने की जानकारी केंद्र सरकार की टीम को भेजने के बाद लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा।
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