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Champawat News: ठेकेदार के फर्जी दस्तावेजों के आरोपों की फिर होगी सुनवाई
Fri, 17 Nov 2023 10:53 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Fri, 17 Nov 2023 10:53 PM IST
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चंपावत। नेपाल सीमा से लगे टीजे (टनकपुर-जौलजीबी) सड़क के दूसरे पैकेज चूका से रूपालीगाड़ की निविदा के लिए ठेकेदार पर लगे फर्जी दस्तावेज के आरोप की फिर सुनवाई होगी। जिला जज कहकशा खान ने ये आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के बाद अब फिर से इस मामले की पत्रावली सीजेएम की अदालत को वापस भेज दी गई है। सुनवाई 30 नवंबर को होगी। पूर्व में इस मामले में सीजेएम (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) ने आरोपी ठेकेदार को राहत देते हुए बरी कर दिया था।
टीजे रोड में पैकेज नंबर दो चूका से रूपालीगाड़ तक का 24.400 किमी का 123 करोड़ रुपये में निविदा हुई थी। ये निविदा ठेकेदार दलीप सिंह अधिकारी के नाम खुली थी। ठेकेदार पर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र सहित कई आरोप लगे। शासन स्तर की जांच में निविदा को 2017 में निरस्त भी कर दिया गया था। टनकपुर थाने में ठेकेदार अधिकारी के खिलाफ 2018 में मुकदमा दर्ज हुआ था। सुनवाई के बाद तत्कालीन सीजेएम धर्मेंद्र कुमार सिंह ने 13 फरवरी 2020 को आरोपी ठेकेदार पर लगी आईपीसी की धारा 467, 468 और 471 को निरस्त कर दिया। बाद में 19 फरवरी को आईपीसी की धारा 420 के तहत भी पुलिस रिपोर्ट के साथ संलग्न दस्तावेजों को नाकाफी मानते हुए निरस्त कर दिया गया था।
उत्तराखंड सरकार की ओर से फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। जिस पर जिला जज कहकशा खान ने सीजेएम के फरवरी 2020 के आदेश को रद्द करते हुए फिर सीजेएम की अदालत को सुनवाई करने के आदेश जारी किए। सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने पैरवी की।
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टीजे रोड में पैकेज नंबर दो चूका से रूपालीगाड़ तक का 24.400 किमी का 123 करोड़ रुपये में निविदा हुई थी। ये निविदा ठेकेदार दलीप सिंह अधिकारी के नाम खुली थी। ठेकेदार पर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र सहित कई आरोप लगे। शासन स्तर की जांच में निविदा को 2017 में निरस्त भी कर दिया गया था। टनकपुर थाने में ठेकेदार अधिकारी के खिलाफ 2018 में मुकदमा दर्ज हुआ था। सुनवाई के बाद तत्कालीन सीजेएम धर्मेंद्र कुमार सिंह ने 13 फरवरी 2020 को आरोपी ठेकेदार पर लगी आईपीसी की धारा 467, 468 और 471 को निरस्त कर दिया। बाद में 19 फरवरी को आईपीसी की धारा 420 के तहत भी पुलिस रिपोर्ट के साथ संलग्न दस्तावेजों को नाकाफी मानते हुए निरस्त कर दिया गया था।
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उत्तराखंड सरकार की ओर से फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। जिस पर जिला जज कहकशा खान ने सीजेएम के फरवरी 2020 के आदेश को रद्द करते हुए फिर सीजेएम की अदालत को सुनवाई करने के आदेश जारी किए। सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने पैरवी की।
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