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शिफ्ट होगा चंपावत का तहसील कार्यालय
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चंपावत की बंद हो चुकी रोजिन फैक्ट्री परिसर में लटका तहसील कार्यालय भवन। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। उत्तराखंड की सबसे पुरानी तहसीलों में से एक चंपावत तहसील के कार्यालय को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा। यह नौबत जगह की कमी या भवन में खामी की वजह से नहीं बल्कि तहसील कार्यालय के नए भवन के काम में आई अड़चन से है। तहसील के नए भवन का मामला विवाद के बाद आर्बिटेशन में है। डेढ़ सौ साल से तहसील कार्यालय जिस राजबुंगा (किला) परिसर में है, उसे पर्यटन की दृष्टि से धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने नौ दिन पहले राजबुंगा को धरोहर के रूप में संजोने का एलान किया था।
1872 ईसवी में सृजित चंपावत की तहसील के कार्यालय के अलावा एसडीएम, उप कोषागार, भूमि पंजीयन कार्यालय का भवन राजबुंगा परिसर में है। राजबुंगा को संवारने के साथ मूल रूप में संजोने के लिए 2015 में पर्यटन विभाग ने पहल की थी। राजबुंगा में काम शुरू करने से पहले इस परिसर में स्थित तहसील और अन्य कार्यालयों को दूसरी जगह शिफ्ट करना था। नए कार्यालय भवन के लिए केएमवीएन की बंद हो चुकी रोजिन फैक्ट्री परिसर में 28 नाली जमीन पर छह साल पहले निर्माण शुरू हुआ लेकिन नमी वाली जमीन में निर्माणाधीन भवन के झुके बीम के अलावा घटिया गुणवत्ता से काम रोक दिया गया।
वर्ष 2018 से न केवल काम बंद है, बल्कि अब तक निर्माण में खर्च हुए 1.51 करोड़ रुपयों के भी बर्बाद होने का खतरा है। सीबीआरआई रुड़की की जांच रिपोर्ट के बाद काम कराने वाली कंपनी की निविदा को निष्कासित कर दिया गया है। अब यह मामला पंचनिर्णय (आर्बिटेशन) में है।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत दौरे में 13 जुलाई को राजबुंगा किले को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का एलान किया था। जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़ का कहना है कि सीएम की इस घोषणा के बाद राजबुंगा को संवारने के लिए तहसील कार्यालय को अन्यत्र शिफ्ट करना होगा। इसके चलते अब जिला प्रशासन इसे निष्प्रयोज्य सरकारी भवन में ले जाने की संभावना पर विचार कर रहा है।
एशियन विकास बैंक का पूर्व का प्रस्ताव वापस होने के बाद अब इसे विकसित करने के लिए राज्य सरकार धन देगी। डीपीआर तैयार कराने के बाद मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राजबुंगा को धरोहर का रूप देने का काम शुरू करने के लिए तहसील कार्यालय को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा। तहसील कार्यालय के स्थायी भवन की व्यवस्था होने तक निष्प्रयोज्य सरकारी भवन को देखा जाएगा। -नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।
2014 में एबीडी की मदद से संजोया जाना था राजबुंगा
चंपावत। पर्यटन विभाग ने एशिया विकास बैंक की मदद से 2014 में 15 करोड़ रुपये से राजबुंगा को संजोने का निर्णय लिया था। राजबुंगा को पुराने रूप रंग में लाकर उसकी ऐतिहासिकता को बनाने के अलावा संग्राहलय, हिमालयन आट्र्स गैलरी, सूचना केंद्र, अध्ययन कक्ष आदि का निर्माण होना था। सौंदर्यीकरण के अलावा बहुमंजिली पार्किंग और ऑडिटोरियम का निर्माण होना था। लेकिन राजबुंगा पर स्थित कार्यालयों के नई जगह शिफ्ट होने की व्यवस्था नहीं होने से यह काम शुरू ही नहीं हो सका। 2020 में एडीबी खंड इस परियोजना से अलग हो गया।
चंपावत 863 वर्ष तक रही राजधानी
चंपावत। चंपावत 863 साल तक सोमचंद द्वारा स्थापित चंद राजवंश की राजधानी रही। 13वीं सदी में यह राजबुंगा बनाया गया। 1872 ईसवी से चंपावत में तहसील का सृजन होने से इसी राजबुंगा में तहसील का कार्यालय है।
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1872 ईसवी में सृजित चंपावत की तहसील के कार्यालय के अलावा एसडीएम, उप कोषागार, भूमि पंजीयन कार्यालय का भवन राजबुंगा परिसर में है। राजबुंगा को संवारने के साथ मूल रूप में संजोने के लिए 2015 में पर्यटन विभाग ने पहल की थी। राजबुंगा में काम शुरू करने से पहले इस परिसर में स्थित तहसील और अन्य कार्यालयों को दूसरी जगह शिफ्ट करना था। नए कार्यालय भवन के लिए केएमवीएन की बंद हो चुकी रोजिन फैक्ट्री परिसर में 28 नाली जमीन पर छह साल पहले निर्माण शुरू हुआ लेकिन नमी वाली जमीन में निर्माणाधीन भवन के झुके बीम के अलावा घटिया गुणवत्ता से काम रोक दिया गया।
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वर्ष 2018 से न केवल काम बंद है, बल्कि अब तक निर्माण में खर्च हुए 1.51 करोड़ रुपयों के भी बर्बाद होने का खतरा है। सीबीआरआई रुड़की की जांच रिपोर्ट के बाद काम कराने वाली कंपनी की निविदा को निष्कासित कर दिया गया है। अब यह मामला पंचनिर्णय (आर्बिटेशन) में है।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत दौरे में 13 जुलाई को राजबुंगा किले को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का एलान किया था। जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़ का कहना है कि सीएम की इस घोषणा के बाद राजबुंगा को संवारने के लिए तहसील कार्यालय को अन्यत्र शिफ्ट करना होगा। इसके चलते अब जिला प्रशासन इसे निष्प्रयोज्य सरकारी भवन में ले जाने की संभावना पर विचार कर रहा है।
एशियन विकास बैंक का पूर्व का प्रस्ताव वापस होने के बाद अब इसे विकसित करने के लिए राज्य सरकार धन देगी। डीपीआर तैयार कराने के बाद मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राजबुंगा को धरोहर का रूप देने का काम शुरू करने के लिए तहसील कार्यालय को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा। तहसील कार्यालय के स्थायी भवन की व्यवस्था होने तक निष्प्रयोज्य सरकारी भवन को देखा जाएगा। -नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।
2014 में एबीडी की मदद से संजोया जाना था राजबुंगा
चंपावत। पर्यटन विभाग ने एशिया विकास बैंक की मदद से 2014 में 15 करोड़ रुपये से राजबुंगा को संजोने का निर्णय लिया था। राजबुंगा को पुराने रूप रंग में लाकर उसकी ऐतिहासिकता को बनाने के अलावा संग्राहलय, हिमालयन आट्र्स गैलरी, सूचना केंद्र, अध्ययन कक्ष आदि का निर्माण होना था। सौंदर्यीकरण के अलावा बहुमंजिली पार्किंग और ऑडिटोरियम का निर्माण होना था। लेकिन राजबुंगा पर स्थित कार्यालयों के नई जगह शिफ्ट होने की व्यवस्था नहीं होने से यह काम शुरू ही नहीं हो सका। 2020 में एडीबी खंड इस परियोजना से अलग हो गया।
चंपावत 863 वर्ष तक रही राजधानी
चंपावत। चंपावत 863 साल तक सोमचंद द्वारा स्थापित चंद राजवंश की राजधानी रही। 13वीं सदी में यह राजबुंगा बनाया गया। 1872 ईसवी से चंपावत में तहसील का सृजन होने से इसी राजबुंगा में तहसील का कार्यालय है।