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30 दिन से टांण अस्पताल में ताला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sat, 30 Jan 2016 10:53 PM IST
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दूरस्थ टांण क्षेत्र के लोगों के लिए वर्षों पहले खुले राजकीय एलोपैथिक अस्पताल (एसएडी) में 30 दिन से ताला लटका है। यह अस्पताल मरीजों के जख्मों पर मरहम लगाने से ज्यादा उनके घावों को हरा करने वाला बन गया है। अस्पताल में ताला लटकने से मरीजों को यहां से करीब 48 किलोमीटर (24 किमी आना और 24 किमी जाना) की अतिरिक्त दूरी तय चौड़ामेहता (श्रीरीठा साहिब) के अस्पताल जाना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि टांण का अस्पताल जनवरी में एक दिन भी नहीं खुला। इस कारण यहां के लोगों को श्रीरीठा जाना पड़ रहा है। वैसे भी इस अस्पताल में संविदा डॉक्टर की तैनाती होने के बावजूद तालाबंदी ही रही है। ग्रामीणों का कहना है कि 15 नाली क्षेत्र में फैला यह अस्पताल इलाज के बजाय मरीजों के लिए सिरदर्द बन गया है। गतिविधियां कम होने की वजह से यहां अस्पताल परिसर में घास और झाड़ियां उग गई है। लकड़ी का गेट टूटा है। अस्पताल तक पहुंचने का रास्ता भी ठीक हाल में नहीं है।
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वहीं, पूर्व प्रधान खीमानंद गड़कोटी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चिकित्साधिकारी से मुलाकात कर इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि टांण अस्पताल टांण के अलावा साल, डांडा, ककनई आदि गांवों के लोगों का केंद्र है, लेकिन अस्पताल की खस्ताहाल सेवा से ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल रहा है। उधर क्षेत्र के पैरा लीगल वालंटियर (पीएलवी) हयात राम का कहना है कि टांण अस्पताल की दुर्दशा पर रिपोर्ट न्यायालय को भेजेंगे। उनका कहना है कि जनवरी भर अस्पताल के बंद होने से मरीजों को कतई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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टांण अस्पताल में संविदा का डॉक्टर तैनात है, लेकिन वह बगैर अनुमति के गैर हाजिर है। अनुपस्थित डॉक्टर के वेतन आहरित नहीं करने के आदेश दिए गए हैं। अस्पताल को संचालित करने के लिए फिलहाल एक वार्डब्वाय राजेंद्र गिरि को भेजने के आदेश किए गए हैं। - डा.विनोद टोलिया, सीएमओ।
श्रीरीठा अस्पताल भी आयुर्वेदिक अस्पताल के जिम्मे
टांण अस्पताल में ताले लटके हैं, तो श्रीरीठा साहिब के अस्पताल में भी लंबे समय से एलोपैथिक डॉक्टर नहीं है और इस वक्त यहां की जिम्मेदारी फार्मेसिस्ट दीपक गिरि गोस्वामी संभाले हैं। साथ ही दूसरे अस्पताल के आयुर्वेदिक डॉक्टर केएल भट्ट मरीजों का इलाज कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर नहीं होने से यहां परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने स्थायी डॉक्टर की तैनाती की मांग की है। इस अस्पताल पर रमक, मंगलेख, बारसी, गोलडांडा, बिनवालगांव, चौड़ापित्ता, कुल्यालगांव, मछियाड़, तलाड़ी के अलावा नैनीताल जिले के कई सीमावर्ती गांव के लोगों की निर्भरता है।