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खोजत रहेहु तोहे सुन सुत घाती आज विपति जड़ाउ छाती
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Wed, 12 Oct 2016 10:11 PM IST
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लोहाघाट की रामलीला
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत के मल्लीहाट, फुलारागांव, बेलखेत, अमोड़ी, सैंदर्क, मिरतोला, चमदेवल, भिंगराड़ा, देवीधुरा आदि स्थानों में बड़ी संख्या में दर्शक रामलीला मंचन देखने के लिए पहुंच रहे हैं।
लोहाघाट में लक्ष्मण का मेघनाद का वध करना, सुलोचना का विलाप, राम का रावण वध करने की लीला दिखाई गई। रावण का करीब 25 फीट ऊंचा पुतला बनाया गया था। रामलीला के दौरान जिपं सदस्य सुषमा फर्त्याल की ओर से पांच बुजुर्गों को सम्मानित किया गया।
कर्णकरायत की रामलीला में अहिरावण विभीषण के वेश में राम सेना में प्रवेश करने से लीला की शुरुआत की गई। अहिरावण के राम-लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक ले जाने, अहिरावण का बलि की तैयारी करने पर हनुमान का पहुंचना, अहिरावण वध के बाद रावण का युद्ध के लिए तैयार होता है। रावण लक्ष्मण से कहता है ‘खोजत रहेहु तोहे सुन सुत घाती आज विपति जड़ाउ छाती, आज करहु खल काल हवाले, परेउ रावण से पाले’।
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रावण द्वारा मायावी युद्ध करना, रावण का पश्चाताप करते हुए हालत बुरी है देखो, ये पाप करने वालो,। रावण का वध, सीता की अग्नि परीक्षा, विभीषण का राजतिलक, अवधपुरी में हनुमान द्वारा राम के घर वापसी का संदेश लेकर आने की लीला दिखाई गई। संचालन कमेटी के सचिव संजय मुरारी ने किया।
इधर, फोर्ती में रामलीला कमेटी के अध्यक्ष उमेश पुनेठा की अध्यक्षता और त्रिलोचन पुनेठा, दीपक पुनेठा के संचालन में हुई रामलीला में विश्वामित्र ने राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को मांगना, गुरु वशिष्ठ द्वारा दशरथ को राम-लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ भेजने के लिए कहना, ताड़का वध करना, राम लक्ष्मण का विश्वामित्र के साथ जनकपुर में जाना, उनका पुष्प वाटिका में सीता को देखनेे तक की लीला दिखाई गई।
टनकपुर। ज्ञानखेड़ा की रामलीला ने अंगद को रावण के लिए संदेश देकर लंका भेजने, अंगद के समझाने पर भी रावण का सीता को लौटाने को तैयार नहीं होने एवं अंगद-रावण संवाद की लीला का शानदार मंचन किया गया। उचौलीगोठ में बतौर मुख्य अतिथि नरेंद्र लड़वाल ने दूसरे दिन की रामलीला का शुभारंभ किया। दूसरे दिन ताड़का वध तक की लीला का मंचन किया गया। गैडाखाली की रामलीला में राजा दशरथ की मृत्यु तक की लीला का मंचन हुआ।
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लोहाघाट में लक्ष्मण का मेघनाद का वध करना, सुलोचना का विलाप, राम का रावण वध करने की लीला दिखाई गई। रावण का करीब 25 फीट ऊंचा पुतला बनाया गया था। रामलीला के दौरान जिपं सदस्य सुषमा फर्त्याल की ओर से पांच बुजुर्गों को सम्मानित किया गया।
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कर्णकरायत की रामलीला में अहिरावण विभीषण के वेश में राम सेना में प्रवेश करने से लीला की शुरुआत की गई। अहिरावण के राम-लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक ले जाने, अहिरावण का बलि की तैयारी करने पर हनुमान का पहुंचना, अहिरावण वध के बाद रावण का युद्ध के लिए तैयार होता है। रावण लक्ष्मण से कहता है ‘खोजत रहेहु तोहे सुन सुत घाती आज विपति जड़ाउ छाती, आज करहु खल काल हवाले, परेउ रावण से पाले’।
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रावण द्वारा मायावी युद्ध करना, रावण का पश्चाताप करते हुए हालत बुरी है देखो, ये पाप करने वालो,। रावण का वध, सीता की अग्नि परीक्षा, विभीषण का राजतिलक, अवधपुरी में हनुमान द्वारा राम के घर वापसी का संदेश लेकर आने की लीला दिखाई गई। संचालन कमेटी के सचिव संजय मुरारी ने किया।
इधर, फोर्ती में रामलीला कमेटी के अध्यक्ष उमेश पुनेठा की अध्यक्षता और त्रिलोचन पुनेठा, दीपक पुनेठा के संचालन में हुई रामलीला में विश्वामित्र ने राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को मांगना, गुरु वशिष्ठ द्वारा दशरथ को राम-लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ भेजने के लिए कहना, ताड़का वध करना, राम लक्ष्मण का विश्वामित्र के साथ जनकपुर में जाना, उनका पुष्प वाटिका में सीता को देखनेे तक की लीला दिखाई गई।
टनकपुर। ज्ञानखेड़ा की रामलीला ने अंगद को रावण के लिए संदेश देकर लंका भेजने, अंगद के समझाने पर भी रावण का सीता को लौटाने को तैयार नहीं होने एवं अंगद-रावण संवाद की लीला का शानदार मंचन किया गया। उचौलीगोठ में बतौर मुख्य अतिथि नरेंद्र लड़वाल ने दूसरे दिन की रामलीला का शुभारंभ किया। दूसरे दिन ताड़का वध तक की लीला का मंचन किया गया। गैडाखाली की रामलीला में राजा दशरथ की मृत्यु तक की लीला का मंचन हुआ।