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Champawat News: मेडिकल स्टोरों पर औचक निरीक्षण, कफ सिरप के पांच नमूने लिए
Mon, 06 Oct 2025 11:34 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 06 Oct 2025 11:34 PM IST
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चंपावत। औषधि नियंत्रण विभाग और विधिक सेवा प्राधिकरण ने संयुक्त रूप से सुरक्षित दवा सुरक्षित जीवन अभियान के तहत मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कफ सिरप के पांच सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे। लैब से रिपोर्ट मिलने के बाद ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के नियमानुसार आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सोमवार को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भवदीप रावते के मार्गदर्शन में अभियान चलाया गया। निरीक्षण के दौरान फर्म स्वामियों को औषधियों के उचित भंडारण, एक्सपायर्ड दवाओं को अलग रखने और उनके सही निस्तारण के संबंध में कड़े निर्देश दिए गए। सचिव ने सभी मेडिकल प्रतिष्ठानों को प्रतिबंधित औषधियों की बिक्री न करने और बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप का विक्रय न करने के निर्देश दिए।
औषधि निरीक्षक चंपावत हर्षिता ने कहा कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के खांसी या जुकाम की कोई भी दवा न दी जाए। दो वर्ष से कम आयु के बच्चों में इन दवाओं का सामान्य उपयोग बिल्कुल भी अनुशंसित नहीं है।
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दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी की दवा न दें : डीएम
चंपावत। दो साल से कम आयु के बच्चों को खांसी की दवाएं देना प्रतिबंधित कर दिया गया है। डीएम मनीष कुमार ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की ओर से जारी बाल चिकित्सा देखभाल में दवाओं के तर्कसंगत उपयोग संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुपालन के लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में बच्चों की खांसी स्वयं ही बिना दवा के ठीक हो जाती है।
डीएम ने बताया कि दो साल से कम आयु के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवाएं न दी जाएं। पांच साल तक के बच्चों में भी इनके प्रयोग से यथासंभव परहेज किया जाए। यदि दवा देना अनिवार्य हो तो सावधानीपूर्वक सटीक मूल्यांकन, उचित खुराक, न्यूनतम अवधि और एकाधिक दवाओं के संयोजन से बचने के साथ नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। उन्होंने लोगों से चिकित्सक की सलाह के बिना बच्चों को कोई भी कफ सिरप नहीं देने की अपील की है। संवाद
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सोमवार को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भवदीप रावते के मार्गदर्शन में अभियान चलाया गया। निरीक्षण के दौरान फर्म स्वामियों को औषधियों के उचित भंडारण, एक्सपायर्ड दवाओं को अलग रखने और उनके सही निस्तारण के संबंध में कड़े निर्देश दिए गए। सचिव ने सभी मेडिकल प्रतिष्ठानों को प्रतिबंधित औषधियों की बिक्री न करने और बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप का विक्रय न करने के निर्देश दिए।
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औषधि निरीक्षक चंपावत हर्षिता ने कहा कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के खांसी या जुकाम की कोई भी दवा न दी जाए। दो वर्ष से कम आयु के बच्चों में इन दवाओं का सामान्य उपयोग बिल्कुल भी अनुशंसित नहीं है।
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दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी की दवा न दें : डीएम
चंपावत। दो साल से कम आयु के बच्चों को खांसी की दवाएं देना प्रतिबंधित कर दिया गया है। डीएम मनीष कुमार ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की ओर से जारी बाल चिकित्सा देखभाल में दवाओं के तर्कसंगत उपयोग संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुपालन के लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में बच्चों की खांसी स्वयं ही बिना दवा के ठीक हो जाती है।
डीएम ने बताया कि दो साल से कम आयु के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवाएं न दी जाएं। पांच साल तक के बच्चों में भी इनके प्रयोग से यथासंभव परहेज किया जाए। यदि दवा देना अनिवार्य हो तो सावधानीपूर्वक सटीक मूल्यांकन, उचित खुराक, न्यूनतम अवधि और एकाधिक दवाओं के संयोजन से बचने के साथ नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। उन्होंने लोगों से चिकित्सक की सलाह के बिना बच्चों को कोई भी कफ सिरप नहीं देने की अपील की है। संवाद