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कहीं बागों पर न टूटे कोरोना का कहर
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बनबसा (चंपावत)। कोरोना महामारी के चलते आम की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बाहर से लेबर नहीं आ पाने से बागानों में तैयार हो रही आम की फसल पेड़ों में बरबाद होने की आशंका है। क्षेत्र में करीब तीन दर्जन छोटे-बड़े ठेकेदारों की करीब दस करोड़ से अधिक की रकम बागानों पर लगी है। लेबर नहीं मिलने से बागानों का रखरखाव करने में ठेकेदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वे सरकार और प्रशासन से आम की फसल तोड़ते तक बाहरी लेबरों की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। पिछले वर्ष भी बागान ठेकेदारों को नुकसान हुआ था।
बनबसा क्षेत्र में करीब तीन सौ एकड़ भूमि पर फैले बागानों में तीन दर्जन ठेकेदारों के अलावा करीब दो हजार मजदूरों की रोजी रोटी भी चलती है। यहां आम, अमरूद, कटहल, लीची की फसल होती है, लेकिन सबसे अधिक उत्पादन आम का होता है। बनबसा में दशहरी, बनारसी, चौसा, लंगड़ा, निहसा आदि प्रजाति का आम खासा प्रसिद्ध है। यहां से प्रतिवर्ष लोकल मंडियों के अलावा बंगाल, बिहार, जलगांव, महाराष्ट्र को आम की आपूर्ति की जाती है। यूपी सिंचाई विभाग के बनबसा स्थित शारदा हेडवर्क्स में करीब 70 एकड़ में आम के बाग हैं जिनमें 51 एकड़ में राम बाग फैला हुआ है। एनएचपीसी में करीब बीस एकड़ में आम के बाग हैं। इसके अलावा फागपुर, भजनपुर, चंदनी, देशीफार्म, पेंटर फार्म, स्ट्रांगफार्म, बमनपुरी, चंदफार्म, चूनाभट्टा,पचपकरिया, गढ़ीगोठ आदि गांव में भी करीब डेढ़ सौ एकड़ भूमि पर बागान हैं। ठेकेदार जावेद खान, बताते हैं कि कोरोना संकट के चलते बाहर से लेबर न आ पाने से उन्हें नुकसान होने की आशंका है। शकील अहमद मंसूरी, कासिम व सज्जाद असगर के मुताबिक जल्द ही लीची की फसल तैयार होने से उन्हें लेबर की जरूरत है। करीब एक पखवाड़े बाद आम की फसल तोड़ने के लिए भी लेबर चाहिए। ठेकेदार बताते हैं कि फलों को तोड़ने वाली लेबर कुशल होती है आम लेबर फल सही तरीके से नहीं तोड़ पाती है। बिना बाहरी लेबर के फल तोड़ना नामुमकिन है।
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बनबसा क्षेत्र में करीब तीन सौ एकड़ भूमि पर फैले बागानों में तीन दर्जन ठेकेदारों के अलावा करीब दो हजार मजदूरों की रोजी रोटी भी चलती है। यहां आम, अमरूद, कटहल, लीची की फसल होती है, लेकिन सबसे अधिक उत्पादन आम का होता है। बनबसा में दशहरी, बनारसी, चौसा, लंगड़ा, निहसा आदि प्रजाति का आम खासा प्रसिद्ध है। यहां से प्रतिवर्ष लोकल मंडियों के अलावा बंगाल, बिहार, जलगांव, महाराष्ट्र को आम की आपूर्ति की जाती है। यूपी सिंचाई विभाग के बनबसा स्थित शारदा हेडवर्क्स में करीब 70 एकड़ में आम के बाग हैं जिनमें 51 एकड़ में राम बाग फैला हुआ है। एनएचपीसी में करीब बीस एकड़ में आम के बाग हैं। इसके अलावा फागपुर, भजनपुर, चंदनी, देशीफार्म, पेंटर फार्म, स्ट्रांगफार्म, बमनपुरी, चंदफार्म, चूनाभट्टा,पचपकरिया, गढ़ीगोठ आदि गांव में भी करीब डेढ़ सौ एकड़ भूमि पर बागान हैं। ठेकेदार जावेद खान, बताते हैं कि कोरोना संकट के चलते बाहर से लेबर न आ पाने से उन्हें नुकसान होने की आशंका है। शकील अहमद मंसूरी, कासिम व सज्जाद असगर के मुताबिक जल्द ही लीची की फसल तैयार होने से उन्हें लेबर की जरूरत है। करीब एक पखवाड़े बाद आम की फसल तोड़ने के लिए भी लेबर चाहिए। ठेकेदार बताते हैं कि फलों को तोड़ने वाली लेबर कुशल होती है आम लेबर फल सही तरीके से नहीं तोड़ पाती है। बिना बाहरी लेबर के फल तोड़ना नामुमकिन है।
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