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गांवों की जगमगाहट पर भारी पड़ा कोरोना
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पाटी ब्लॉक के घनी आबादी वाले गांव में लगा सौर पथ प्रकाश।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। प्रदेश के अन्य जिलों की तरह चंपावत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का अंधेरा दूर करने के लिए शुरू सौर पथ प्रकाश (सोलर स्ट्रीट लाइट) योजना पर कोरोना भारी पड़ा है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों को इस साल मार्च तक सौर ऊर्जा से जगमग होना था, लेकिन इस अवधि में बमुश्किल एक-तिहाई लाइट ही लग सकी। कोरोना काल में लाइट की आपूर्ति करने वाली कंपनी में उत्पादन ठप होना देरी की वजह है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाने की मंजूरी दी थी। इन लाइटों को लगाने के बाद पांच साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी लगाने वाली कंपनी की रहेगी।
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इन लाइटों के लगने से बिजली के बिल को चुकाए बगैर गांवों के लोगों को अंधेरे से निजात मिलेगी। इसके तहत जिले के चारों ब्लॉकों के ग्रामीण क्षेत्रों में 739 सोलर स्ट्रीट लाइटें लगनीं थीं। मार्च तक काम भी पूरा होना था, लेकिन एक-तिहाई काम ही हो सका है।
इन गांवों में लग चुकी है सौर पथ प्रकाश
कमलेड़ी, नघान, खैसकांडे, रायकोट चौड़ी, मडलक, गंगनौला, दुधौरी, खूनाबोरा, सिलोड़ीगूंठ, कानाकोट पउ, सकदेना, निलोटी, सिरकोट, कजीना, खेतीखान, दियूरी, टूनकांडे।
पथ प्रकाश पर हर साल खर्च हो रहे 45 लाख रुपये
चंपावत। गांवों में सौर पथ प्रकाश लगाने से न केवल गांव जगमगाएंगे, बल्कि परंपरागत ऊर्जा के साथ ही बिजली बिल का भारी-भरकम खर्च भी बच सकेगा। जिले के चार नगरीय क्षेत्रों में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर रात के वक्त उजाला करने में मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
ईओ अभिनव कुमार ने बताया कि जिले के चारों (चंपावत, लोहाघाट, टनकपुर और बनबसा) नगरीय क्षेत्रों में सड़कों और अन्य स्थानों पर 2300 सौर स्ट्रीट लाइटें लगी हैं। इसके बिल को चुकाने में नगर निकायों को सालभर में 45 लाख रुपये से अधिक खर्च करना पड़ता है।
चंपावत जिले में सौर पथ प्रकाश लगाने का काम पाटी ब्लॉक के गांवों से शुरू हुआ था। 739 में से 250 सौर स्ट्रीट लाइटें लग चुकी हैं। देरी की वजह आपूर्ति करने वाली कंपनी में उत्पादन ठप था। अब कंपनी फिर से उत्पादन शुरू कर चुका है और बकाया 489 स्ट्रीट लाइटें अगले तीन माह में लग जाएगी। - मनोज बजेठा, परियोजना अधिकारी, उरेडा, चंपावत।
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जिले के ग्रामीण क्षेत्रों को इस साल मार्च तक सौर ऊर्जा से जगमग होना था, लेकिन इस अवधि में बमुश्किल एक-तिहाई लाइट ही लग सकी। कोरोना काल में लाइट की आपूर्ति करने वाली कंपनी में उत्पादन ठप होना देरी की वजह है।
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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाने की मंजूरी दी थी। इन लाइटों को लगाने के बाद पांच साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी लगाने वाली कंपनी की रहेगी।
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इन लाइटों के लगने से बिजली के बिल को चुकाए बगैर गांवों के लोगों को अंधेरे से निजात मिलेगी। इसके तहत जिले के चारों ब्लॉकों के ग्रामीण क्षेत्रों में 739 सोलर स्ट्रीट लाइटें लगनीं थीं। मार्च तक काम भी पूरा होना था, लेकिन एक-तिहाई काम ही हो सका है।
इन गांवों में लग चुकी है सौर पथ प्रकाश
कमलेड़ी, नघान, खैसकांडे, रायकोट चौड़ी, मडलक, गंगनौला, दुधौरी, खूनाबोरा, सिलोड़ीगूंठ, कानाकोट पउ, सकदेना, निलोटी, सिरकोट, कजीना, खेतीखान, दियूरी, टूनकांडे।
पथ प्रकाश पर हर साल खर्च हो रहे 45 लाख रुपये
चंपावत। गांवों में सौर पथ प्रकाश लगाने से न केवल गांव जगमगाएंगे, बल्कि परंपरागत ऊर्जा के साथ ही बिजली बिल का भारी-भरकम खर्च भी बच सकेगा। जिले के चार नगरीय क्षेत्रों में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर रात के वक्त उजाला करने में मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
ईओ अभिनव कुमार ने बताया कि जिले के चारों (चंपावत, लोहाघाट, टनकपुर और बनबसा) नगरीय क्षेत्रों में सड़कों और अन्य स्थानों पर 2300 सौर स्ट्रीट लाइटें लगी हैं। इसके बिल को चुकाने में नगर निकायों को सालभर में 45 लाख रुपये से अधिक खर्च करना पड़ता है।
चंपावत जिले में सौर पथ प्रकाश लगाने का काम पाटी ब्लॉक के गांवों से शुरू हुआ था। 739 में से 250 सौर स्ट्रीट लाइटें लग चुकी हैं। देरी की वजह आपूर्ति करने वाली कंपनी में उत्पादन ठप था। अब कंपनी फिर से उत्पादन शुरू कर चुका है और बकाया 489 स्ट्रीट लाइटें अगले तीन माह में लग जाएगी। - मनोज बजेठा, परियोजना अधिकारी, उरेडा, चंपावत।