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तो ऐसे निपटेंगे जंगल की आग से...
अमर उजाला ब्यूराे लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Sun, 11 Mar 2018 11:06 PM IST
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चंपावत में आयोजित बैठक में चर्चा करते वन श्रमिक।
- फोटो : अमर उजाला
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इस समय फायर सीजन चल रहा है और जंगल की आग बुझाने में वन श्रमिकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। लेकिन इन वन श्रमिकों को बीते छह महीने से वेतन के रूप में एक भी रुपया नहीं मिला है। रविवार को गोरलचौड़ मैदान में संगठन के अध्यक्ष भुवन चंद्र चौबे की अध्यक्षता में हुई वन श्रमिक संघ की बैठक में सितंबर 2017 से वेतन नहीं दिए जाने पर गहरी नाराजगी जताई गई। कहा गया कि कई बार आग्रह करने के बावजूद विभागीय अधिकारी उनकी सुध नहीं ले रहे हैं। वेतन का भुगतान न होने के बावजूद उनसे लगातार काम लिया जा रहा है।
संगठन ने नियमित रूप से हर माह वेतन देने की मांग की। इसके अलावा दो दशक से अधिक की सेवा के बावजूद उन्हें महज सात हजार रुपये वेतन दिए जाने को अन्याय बताया। शासन से समान कार्य के लिए समान वेतन देने के साथ ही सातवें वेतनमान का लाभ देने की मांग की गई।
वन श्रमिकों ने कहा कि फायर सीजन में उनसे 24 घंटे काम तो लिया जाता है, मगर सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं दिया जा रहा है। भोलादत्त, सुरेश राय, दिनेश चंद्र, भरत सिंह, घनश्याम जोशी, तुला राम, प्रेम सिंह आदि ने जंगल की हिफाजत में अहम भूमिका निभाने वाले वन श्रमिकों के साथ इंसाफ करने की मांग की है। इधर वन अधिकारियों का कहना है कि बजट नहीं मिलने से वेतन का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
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संगठन ने नियमित रूप से हर माह वेतन देने की मांग की। इसके अलावा दो दशक से अधिक की सेवा के बावजूद उन्हें महज सात हजार रुपये वेतन दिए जाने को अन्याय बताया। शासन से समान कार्य के लिए समान वेतन देने के साथ ही सातवें वेतनमान का लाभ देने की मांग की गई।
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वन श्रमिकों ने कहा कि फायर सीजन में उनसे 24 घंटे काम तो लिया जाता है, मगर सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं दिया जा रहा है। भोलादत्त, सुरेश राय, दिनेश चंद्र, भरत सिंह, घनश्याम जोशी, तुला राम, प्रेम सिंह आदि ने जंगल की हिफाजत में अहम भूमिका निभाने वाले वन श्रमिकों के साथ इंसाफ करने की मांग की है। इधर वन अधिकारियों का कहना है कि बजट नहीं मिलने से वेतन का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
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