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बीमार अस्पताल करेंगे कोरोना की तीसरी लहर का इलाज!

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 25 Jun 2021 11:49 PM IST
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Sick hospitals will treat the third wave of corona
चंपावत। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयारी पूरी होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन चंपावत जिले में तो इसकी जमीनी हकीकत नजर नहीं आती। तीसरी लहर से बचाव के प्रबंध तो छोड़िए, यहां जिले के दो प्रवेशद्वार (ऊधमसिंह नगर और नैनीताल) वाले अस्पतालों के बंदोबस्त कतई ठीक नहीं है। इन महत्वपूर्ण अस्पतालों में वर्षों से एक्सरे नहीं हुए हैं। ये नौबत एक्सरे मशीन होने के बाद है। यहां एक्सरे मशीन है, लेकिन एक्सरे करने वाले नहीं। टनकपुर में अल्ट्रासाउंड परीक्षण की भी स्थायी व्यवस्था नहीं है। इन सबसे लोगों को इस अस्पताल का खास लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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जिले के चार अस्पतालों में से दो में ही एक्सरे परीक्षण हो रहे हैं। जिला अस्पताल के अलावा लोहाघाट में ही ये सुविधा है। जिले के मैदानी क्षेत्र के टनकपुर उप जिला अस्पताल (एसडीएच) और पाटी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्सरे की सुविधा नहीं है। एक्सरे की जरूरत कोरोना समेत टीबी, निमोनिया, हड्डी संबंधी रोग के इलाज में सबसे ज्यादा होती है। टनकपुर में तो न केवल मरीजों का जबर्दस्त दबाव है, बल्कि पहाड़ से रेफरल मामलों के मद्देनजर भी यह महत्वपूर्ण अस्पताल है, लेकिन इसके बावजूद यहां जरूरी सुविधाएं तक नहीं हैं। टनकपुर के एक्सरे कक्ष में जनवरी 2019 से ताला लगा है। तकनीशियन न होने से ये नौबत आई है। पाटी में 2016 से एक्सरे नहीं हो रहे हैं। इस कारण सबसे ज्यादा मार बीपीएल और आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के मरीजों पर पड़ रही है। ऐसे में लोगों को निजी क्लीनिकों की मदद लेनी पड़ रही है। ढाई साल में ही निजी अस्पतालों से एक्सरे कराने के लिए मजबूर होने से इन दोनों अस्पतालों के मरीजों की जेब से 23 लाख रुपये निकल चुके हैं। इधर विधायक कैलाश गहतोड़ी का कहना है कि एक्सरे मशीन के संचालन के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
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अल्ट्रासाउंड परीक्षण के लिए भी लोहाघाट पर निर्भर है टनकपुर
चंपावत। टनकपुर के अस्पताल में एक्सरे समेत अल्ट्रासाउंड की भी स्थायी व्यवस्था नहीं है। जून 2015 से पिछले साल दिसंबर तक अल्ट्रासाउंड के कमरे में भी ताला था। लोहाघाट के रेडियोलॉजिस्ट को सप्ताह में दो दिन टनकपुर संबद्ध करने से कामचलाऊ व्यवस्था हुई। सीएमएस डॉ. एचएस ह्यांकी का कहना है कि एक्सरे तकनीशियन न होने से एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं। वैसे टनकपुर अस्पताल में 14 डॉक्टरों के सृजित पदों में से विशेषज्ञों के अधिकतर पद (गायनाकोलॉजिस्ट, फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, ईएनटी सर्जन, चर्म रोग विशेषज्ञ) भी नहीं भरे जा सके हैं, जबकि पाटी में सिर्फ दो डॉक्टर हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी आभाष सिंह का कहना है कि एक्सरे तकनीशियन न होने से एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं। इसके लिए उच्चाधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से आग्रह किया गया है। (संवाद)
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पूर्व विधायक ने की तकनीशियन का मानदेय देने की पेशकश
चंपावत। लंबे समय से एक्सरे न होने से नाराज चंपावत के पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल ने अपने स्तर से एक्सरे तकनीशियन के लिए मानदेय की राशि देने की पेशकश की है। उन्होंने सीएमओ से बात भी की। कहा कि स्वास्थ्य विभाग बाह्यस्रोत, संविदा या किसी अन्य माध्यम से एक्सरे तकनीशियन की तैनाती करे, मानदेय का भुगतान वे करेंगे। अलबत्ता स्वास्थ्य विभाग इस प्रस्ताव पर भी अमल नहीं कर सका है। (संवाद)

कोट
टनकपुर और पाटी के अस्पताल में एक्सरे की सुविधा लंबे समय से नहीं मिल पा रही है। एक्सरे शुरू करवाने के साथ ही अस्पताल के लिए तकनीशियन के लिए महानिदेशालय से आग्रह किया गया है। उम्मीद है कि एक माह के भीतर एक्सरे तकनीशियन की व्यवस्था हो जाएगी। दोनों अस्पतालों के साथ खाली पदों को भरने का आग्रह किया गया है।
- डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ, चंपावत।
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