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घट रहा खेती का रकबा, बढ़ रही किसानों की मुसीबत
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
Updated Tue, 22 Dec 2015 10:15 PM IST
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इस देश में किसानी से प्रधानमंत्री तक की कुर्सी का सफर चौधरी चरण सिंह सहित कई सियासतदानों ने तय किया है। दूसरे पीएम लालबहादुर शास्त्री ने जय जवान, जय किसान का नारा देकर किसानों को सीमा की रक्षा करने वाले के बराबर ला दिया। पर इन सबके बावजूद कृषि प्रधान देश में खेती-किसानी न तो रोजगार दे पा रही है और नहीं खेतों से किसानों का पेट ही भर पा रहा है। चंपावत जिले में कमोबेश आधे किसान न केवल गरीब हैं, बल्कि मजदूरों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
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हर जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खुला। आधुनिक खेती से लेकर वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग, कृषि मेलों के जरिए किसानों की समस्याओं के हल करने से लेकर सिंचाई का एरिया बढ़ाने के दावे, लेकिन इन दावों के उलट किसानों के चेहरों में मुस्कान नहीं बढ़ी। खेती के लिए मुफीद करीब 30 फीसदी इलाकों में तो खेत बंजर होने के कगार पर है। मुख्य कृषि अधिकारी सीएल चंद्रवाल के मुताबिक जिले में करीब 28567 हेक्टेयर खेती योग्य जमीन है, जो राज्य बनने से पूर्व तक 32 हजार हेक्टेयर थी।
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बस 13 प्रतिशत एरिया है सिंचित
राज्य बनने के बाद से अब तक करीब 28 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद सिंचित जमीन में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। नवीन करायत, राजेश ओली, पूरन सिंह, पंडित मोहन राम सहित कई किसानों का कहना है कि सूखी जमीन किसानों के लिए सिरदर्द बन रही है। जिले में बमुश्किल 2910 हेक्टेयर जमीन में ही सिंचाई सुविधा है। इसके अलावा बंदर, सुअर सहित अन्य जंगली जानवरों ने किसानों की नाक में दम किया है।
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340 लोगों को नहीं मिला किसान पेंशन का एक भी रुपया
उत्तराखंड सरकार ने अगस्त 2014 से दो हेक्टेयर से कम जमीन वाले किसानों के लिए पेंशन योजना तो शुरू की, जिसके तहत 800 रुपये मासिक पेंशन दी जा रही है। इस श्रेणी के जिले में कुल 1172 पेंशनर हैं, लेकिन इस वक्त इनमें से मात्र 832 को ही पेंशन की रकम दी जा रही है। शेष लोगों के मामले स्वीकृत होने के बावजूद लटके हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी पीसी जोशी का कहना है कि जिले में 340 नए किसान पेंशनरों को पेंशन की राशि अभी नहीं मिल पा रही है। बजट की कमी की वजह से पेंशन नहीं दी जा पा रही है। इनके लिए शासन से 74.4 लाख रुपये की मांग की है।
जोत कृषक परिवार क्षेत्रफल
दो हेक्टेयर से कम 36399 18638
चार हेक्टेयर से कम 2385 5942
दस हेक्टेयर से कम 503 2547
दस हेक्टेयर से ज्यादा 60 1440