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झटका: अदरक के किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
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सूखीढांग क्षेत्र में खराब अदरक को दिखाता काश्तकार।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। अदरक की खेती करने वाले सूखीढांग क्षेत्र के काश्तकारों को इस बार बड़ा झटका लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में नमी और किसी रोग की वजह से उनकी अदरक की 45 प्रतिशत से अधिक फसल बर्बाद हुई है।
जिले में करीब 475 हेक्टेयर क्षेत्र में अदरक की खेती होती है। पिछले साल तक 3848 मीट्रिक टन की पैदावार हुई। पहली बार सहकारिता विभाग ने सूखीढांग, सिमल्टा, देवीधुरा, पाटी, दुबड़, चौड़ामेहता, गैडाख्याली, सूखीढांग क्षेेेत्र में कुल 1500 नाली में अदरक की खेती कराई। सूखीढांग क्षेत्र में करीब 45 फीसदी अदरक की फसल बर्बाद हो गई है। काश्तकारों का कहना है कि खुदाई के बाद न केवल अदरक छोटे आकार का है, बल्कि काफी मात्रा में सड़ा हुआ भी है। इससे उनकी सारी मेहनत बर्बाद हो गई। छोटे दाने के अदरक को कीमत भी बमुश्किल 30 रुपये प्रति किलो ही मिल पा रही है। किसानों ने नुकसान की जानकारी सहकारिता विभाग को दे दी है। इधर सहायक निबंधक सुरेंद्र पाल का कहना है कि सूखीढांग को छोड़ अन्य स्थानों पर अच्छी पैदावार हुई है। डीएचओ सतीश शर्मा का कहना है कि किसानों ने अदरक की फसल में रोग लगने की जानकारी उन्हें नहीं दी।
-कोरोना काल में अदरक की फसल उनकी आय का बड़ा जरिया होती, लेकिन ज्यादातर फसल के सड़ने से बड़ा नुकसान हुआ है।
स्वरूप राम, सूखीढांग।
-अदरक की खेती से उनके परिवार की छह माह की गुजरबसर हो जाती थी। लेकिन फसल बर्बाद होने से अब परेशानी बढ़ गई है।
प्रेेम सिंह, गंगसीर।
-ग्रामीणों ने अदरक की फसल में खूब मेहनत की। लेकिन कब रोग लगा और कैसे फसल बर्बाद हुई, इसका पता नहीं चला।
जगदीश प्रसाद,
प्रधान स्याला।
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जिले में करीब 475 हेक्टेयर क्षेत्र में अदरक की खेती होती है। पिछले साल तक 3848 मीट्रिक टन की पैदावार हुई। पहली बार सहकारिता विभाग ने सूखीढांग, सिमल्टा, देवीधुरा, पाटी, दुबड़, चौड़ामेहता, गैडाख्याली, सूखीढांग क्षेेेत्र में कुल 1500 नाली में अदरक की खेती कराई। सूखीढांग क्षेत्र में करीब 45 फीसदी अदरक की फसल बर्बाद हो गई है। काश्तकारों का कहना है कि खुदाई के बाद न केवल अदरक छोटे आकार का है, बल्कि काफी मात्रा में सड़ा हुआ भी है। इससे उनकी सारी मेहनत बर्बाद हो गई। छोटे दाने के अदरक को कीमत भी बमुश्किल 30 रुपये प्रति किलो ही मिल पा रही है। किसानों ने नुकसान की जानकारी सहकारिता विभाग को दे दी है। इधर सहायक निबंधक सुरेंद्र पाल का कहना है कि सूखीढांग को छोड़ अन्य स्थानों पर अच्छी पैदावार हुई है। डीएचओ सतीश शर्मा का कहना है कि किसानों ने अदरक की फसल में रोग लगने की जानकारी उन्हें नहीं दी।
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-कोरोना काल में अदरक की फसल उनकी आय का बड़ा जरिया होती, लेकिन ज्यादातर फसल के सड़ने से बड़ा नुकसान हुआ है।
स्वरूप राम, सूखीढांग।
-अदरक की खेती से उनके परिवार की छह माह की गुजरबसर हो जाती थी। लेकिन फसल बर्बाद होने से अब परेशानी बढ़ गई है।
प्रेेम सिंह, गंगसीर।
-ग्रामीणों ने अदरक की फसल में खूब मेहनत की। लेकिन कब रोग लगा और कैसे फसल बर्बाद हुई, इसका पता नहीं चला।
जगदीश प्रसाद,
प्रधान स्याला।