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चुनावी साल में तेज हुई रफ्तार: पूरा हुआ चंपावत-धामीसौन-खेतीखान सड़क का सर्वे
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चंपावत-धामीसौन-खेतीखान सड़क का सर्वे करते सर्वेयर। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में काली कुमाऊं के शेर पंडित हर्षदेव ओली के क्षेत्र खेतीखान को एक नई सड़क की सौगात मिलेगी। इस सड़क से जिला मुख्यालय से खेतीखान का फासला करीब आधा रह जाएगा।
चंपावत-ढकना-मल्ला धामीसौन-खेतीखान (सीडीके) मोटर मार्ग बनने से अगले कुछ वर्षों में 31 किमी की दूरी 17 किमी रह जाएगी। इस नई सड़क का सर्वे पूरा कर लिया गया है।
चुनावी साल में राज्य योजना से मंजूर इस सड़क के लिए शासन ने दो महीने पहले 1.59 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। यह सड़क लोगों की दूरी को कम करने के साथ एतिहासिक एकहथिया नौला, चंडालकोट के किले तक पर्यटकों की पहुंच आसान करेगी।
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चंपावत से खेतीखान के लिए दो सड़कें हैं, पहली ललुवापानी होकर और दूसरी लोहाघाट होते हुए। ललुवापानी होकर 31 किमी, तो लोहाघाट होकर 29 किमी की दूरी है।
अब चंपावत-ढकना-मौरलेख-मल्ला धामी सौन-खेतीखान मोटर (सीडीके) सड़क बनने से बेलटाक, धामीसौन, खलकंडिया आदि गांव सड़क से जुड़ेंगे। तब चंपावत-खेतीखान के बीच की दूरी भी मात्र 17 किमी रह जाएगी।
सड़क का सर्वे पूरा कर लिया गया है। समरेखन पूरा होने के बाद वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव भेजा जाएगा। वन विभाग की अनापत्ति मिलने के बाद डीपीआर भेजी जाएगी।
- राजीव कुमार, जेई, लोनिवि, चंपावत।
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चंपावत-ढकना-मल्ला धामीसौन-खेतीखान (सीडीके) मोटर मार्ग बनने से अगले कुछ वर्षों में 31 किमी की दूरी 17 किमी रह जाएगी। इस नई सड़क का सर्वे पूरा कर लिया गया है।
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चुनावी साल में राज्य योजना से मंजूर इस सड़क के लिए शासन ने दो महीने पहले 1.59 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। यह सड़क लोगों की दूरी को कम करने के साथ एतिहासिक एकहथिया नौला, चंडालकोट के किले तक पर्यटकों की पहुंच आसान करेगी।
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चंपावत से खेतीखान के लिए दो सड़कें हैं, पहली ललुवापानी होकर और दूसरी लोहाघाट होते हुए। ललुवापानी होकर 31 किमी, तो लोहाघाट होकर 29 किमी की दूरी है।
अब चंपावत-ढकना-मौरलेख-मल्ला धामी सौन-खेतीखान मोटर (सीडीके) सड़क बनने से बेलटाक, धामीसौन, खलकंडिया आदि गांव सड़क से जुड़ेंगे। तब चंपावत-खेतीखान के बीच की दूरी भी मात्र 17 किमी रह जाएगी।
सड़क का सर्वे पूरा कर लिया गया है। समरेखन पूरा होने के बाद वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव भेजा जाएगा। वन विभाग की अनापत्ति मिलने के बाद डीपीआर भेजी जाएगी।
- राजीव कुमार, जेई, लोनिवि, चंपावत।