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स्कूल में चल रहा है पंचायत घर का काम

Sun, 21 May 2017 10:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत Updated Sun, 21 May 2017 10:52 PM IST
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School work in Panchayat House
इस स्कूल में चल रहा है पंचायतघर - फोटो : अमर उजाला
 ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश कार्य ग्राम पंचायतों के जिम्मे हैं। राशनकार्ड बनाने से लेकर, इंदिरा आवास पात्रता, मनरेगा, परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, मध्यान्ह भोजन योजना, स्कूल भवनों के निर्माण कार्य तक के कार्य ग्राम पंचायतें संचालित करती हैं। मगर काम करने के लिए ग्राम पंचायतों के पास कायदे के कार्यालय (पंचायत घर) तक नहीं है। कलक्ट्रेट के पास की ढकना बडोला ग्राम पंचायत को तो अपने तमाम काम राजकीय प्राथमिक विद्यालय में करने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिले में 23 ग्राम पंचायतों के पास अभी भी अपनी छत नहीं है।
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पंचायती राज के जरिए स्वराज के सपने की राह में अड़चनें कम नहीं है। चंपावत जिले की ढेरों ग्राम पंचायतों के हाल पटरी से उतरे हैं। ग्राम पंचायतें बेघरों को घर देती हैं, लेकिन जिले में 313 ग्राम पंचायतों में से 23 के पास अपने घर  (पंचायत घर) तक नहीं है। ऐसे में इन पंचायतों को काम करने के लिए दूसरे ठिकाने का आसरा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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कलक्ट्रेट से लगी ढकना बडोला ग्राम पंचायत के पास भी अपना पंचायत घर नहीं है। ग्राम प्रधान विनोद चौधरी का कहना है कि पंचायत घर नहीं होने से काम निपटाने के लिए पास के स्कूल का उपयोग करना मजबूरी बना हुआ है। इससे स्कूल में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो इसको देखते हुए ग्राम पंचायत के काम स्कूल बंद होेने के बाद निपटाए जाते हैं।  पंचायत कार्यालय के लिए भवन नहीं होने से कामकाज निपटाने में दिक्कतें हो रही हैं।
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 जिले के मैदानी हिस्से टनकपुर में तीन ग्राम पंचायतों का काम एक ही पंचायत घर से हो रहा है। यहां मोहनपुर व टनकपुर ग्राम पंचायतों का काम भी ज्ञानखेड़ा ग्राम पंचायत के पंचायत घर से निपटाया जा रहा है। मोहनपुर के प्रधान विनोद वर्मा का कहना है कि ग्राम पंचायत में पंचायत घर नहीं होने से दिक्कतें हो रही है। शहर से लगी पंचायत होने से लोग बेहतर सुविधाओं की उम्मीद करते हैं। मगर कार्यालय नहीं होने से पंचायत और लोगों को परेशानी हो रही है। पंचायत घर की कई बार मांग करने के बाद भी फिलहाल कोई नतीजा नहीं निकल सका है।

चंपावत जिले के 23 भवनविहीन पंचायत घर
ओखलंज, सुदर्का, राइकोट महर, चौड़ामेहता, टाकबल्वाड़ी, कनवाड़, थापलागूंठ, मौनकांडा, कठनौली, ढकना बडोला, पुनेठी, बिचई, भजनपुर, मंच, मोहनपुर, शक्तिपुरबुंगा, गैडाख्याली, कांडा (डोला), सायली, नायल, टनकपुर, हरम व सिमलटा।

ब्राडबैंड तो दूर, पंचायत घरों में फोन सुविधा भी नहीं
भारत सरकार ने देश की हर ग्राम पंचायत को 2019 तक ब्राडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। लेकिन इस वक्त जिले की 313 पंचायतों में से किसी में भी ब्राडबैंड तो दूर, लैंडलाइन फोन तक नहीं है। लोहाघाट विकासखंड की 67 ग्राम पंचायतों को ब्राडबैंड से जोड़ने के लिए केबल बिछाने का काम पूरा हो चुका है। लेकिन इसके आगे का काम अभी अधूरा है। वहीं बिजली की व्यवस्था भी किसी पंचायत में नहीं है। जबकि छह पंचायतों में पेयजल कनेक्शन तक नहीं हैं।


कोट..............
पंचायत घर नहीं होने से ग्राम पंचायतों के कामकाज पर असर पड़ रहा है। पंचायत घरों के लिए नि:शुल्क जमीन चाहिए। जमीन उपलब्ध कराने वाली भवनहीन पंचायतों में पंचायत घर बनाने के प्रस्ताव भेजे गए हैं। मंजूरी मिलने के बाद इन भवनों को बनाने की कार्रवाई की जाएगी। जहां जमीन नहीं मिल सकी है, वहां जमीन की तलाश करने के लिए कहा गया है।
सुरेश बेनी जिला पंचायती राज अधिकारी चंपावत।
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