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कोरोना काल में भी बचत में उछाल
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Saving Day in Champawat
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चंपावत। कोरोना महामारी ने बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार और जीवन छीना। आय भी कम कर दी, इसके बावजूद बचत में उछाल आया। इस छोटे जिले ने बचत में बड़ी उछाल मारी है। जिले में डाकघर की बचत चार साल में ढाई गुना हो गई। बीस सूत्री कार्यक्रम में लघु बचत विभाग को ए श्रेणी मिली है।
आम व्यक्ति से लेकर प्रदेश तक के विकास में बचत की अहम भूमिका है। जिला बचत अधिकारी का अतिरिक्त जिम्मा संभाल रहे डीएसटीओ एनबी बचखेेती ने बताया कि ब्याज दरों में गिरावट के बावजूद यहां लोगों में बचत की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
उत्तराखंड के सबसे छोटे जिलों में से एक चंपावत ने राष्ट्रीय बचत में दमदार प्रदर्शन किया है। तीन लाख की आबादी वाला यह जिला दीर्घकालीन बचत में खासा आगे हैं।
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पिछले वित्तीय वर्ष में जिले ने 61.20 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष 111.37 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल किया जबकि 2016-17 में ये जमा राशि सिर्फ 43.74 करोड़ रुपये थी। बचत का ये आंकड़ा जिले की कमजोर माली हालत और विभागीय टोटे के बावजूद हासिल होना उपलब्धि भरा है।
बैंकों की जमा पूंजी में भी हो रहा इजाफा
चंपावत। जिले में डाकघरों के अलावा बैंकों की जमा पूंजी में भी इजाफा हुआ है। लीड बैंक प्रबंधक प्रवीण गर्ब्याल ने बताया कि इस साल जून तक जिले में 17 बैंकों की 61 शाखाओं में कुल 2580.84 करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें से 1351 करोड़ रुपये दीर्घकालिक बचत है। मार्च 2020 से जून 2021 के सवा साल में बैंकों की कुल जमा में 242.83 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
चंपावत जिले में बचत की प्रगति का विवरण
वर्ष लक्ष्य उपलब्धि (करोड़ रुपये में)
2016 21.30 43.74
2018 56.15 85.20
2019 61.20 108.23
2020 61.20 111.37
2021 (सितंबर तक) 61.20- 50.05
राज्य की विकास योजनाओं के लिए राष्ट्रीय बचत महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार बचत जमा राशि का शत-प्रतिशत राज्यों को कर्ज के रूप में देती है। कुल दीर्घकालिक जमा का 100 प्रतिशत केंद्र सरकार राज्यों को विकास कार्यों के लिए देती है।
- एनबी बचखेती, जिला बचत अधिकारी, चंपावत।
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आम व्यक्ति से लेकर प्रदेश तक के विकास में बचत की अहम भूमिका है। जिला बचत अधिकारी का अतिरिक्त जिम्मा संभाल रहे डीएसटीओ एनबी बचखेेती ने बताया कि ब्याज दरों में गिरावट के बावजूद यहां लोगों में बचत की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
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उत्तराखंड के सबसे छोटे जिलों में से एक चंपावत ने राष्ट्रीय बचत में दमदार प्रदर्शन किया है। तीन लाख की आबादी वाला यह जिला दीर्घकालीन बचत में खासा आगे हैं।
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पिछले वित्तीय वर्ष में जिले ने 61.20 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष 111.37 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल किया जबकि 2016-17 में ये जमा राशि सिर्फ 43.74 करोड़ रुपये थी। बचत का ये आंकड़ा जिले की कमजोर माली हालत और विभागीय टोटे के बावजूद हासिल होना उपलब्धि भरा है।
बैंकों की जमा पूंजी में भी हो रहा इजाफा
चंपावत। जिले में डाकघरों के अलावा बैंकों की जमा पूंजी में भी इजाफा हुआ है। लीड बैंक प्रबंधक प्रवीण गर्ब्याल ने बताया कि इस साल जून तक जिले में 17 बैंकों की 61 शाखाओं में कुल 2580.84 करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें से 1351 करोड़ रुपये दीर्घकालिक बचत है। मार्च 2020 से जून 2021 के सवा साल में बैंकों की कुल जमा में 242.83 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
चंपावत जिले में बचत की प्रगति का विवरण
वर्ष लक्ष्य उपलब्धि (करोड़ रुपये में)
2016 21.30 43.74
2018 56.15 85.20
2019 61.20 108.23
2020 61.20 111.37
2021 (सितंबर तक) 61.20- 50.05
राज्य की विकास योजनाओं के लिए राष्ट्रीय बचत महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार बचत जमा राशि का शत-प्रतिशत राज्यों को कर्ज के रूप में देती है। कुल दीर्घकालिक जमा का 100 प्रतिशत केंद्र सरकार राज्यों को विकास कार्यों के लिए देती है।
- एनबी बचखेती, जिला बचत अधिकारी, चंपावत।