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एक्सक्लूसिव:गांवों में गैस गोदाम फिर भी सिलेंडर को लग रही नगर की दौड़
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श्यामलाताल के इस गैस गोदाम की छत ही गायब है।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे तामली के ग्रामीणों को रसोई गैस सिलिंडर भराने में हर महीने 400 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। यह हकीकत सिर्फ तामली कि ही नहीं बल्कि मंच, श्यामलाताल, रौसाल, पाटी के कई गांवों की है। इन गांवों में भी रसोई गैस सिलिंडर भराने के लिए भाड़े में ही 200 से 700 रुपये तक खर्च हो जाते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यह नौबत इन इलाकों में यह नौबत गैस गोदाम होने के बावजूद है।
जिले में 57 हजार उपभोक्ताओं में से करीब 17 हजार उपभोक्ता ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में जंगल कटान रोकने और ईंधन सुविधा गांव के नजदीक मुहैय्या कराने के मकसद से श्यामलाताल, तामली, पाटी और रौसाल में गोदाम का निर्माण किया गया था। दो दशक पहले निर्मित इन भवनों के निर्माण में लाखों रुपये खर्च हुए। लेकिन इन गोदामों का उपयोग कभी नहीं हो सका। अब ज्यादातर भवन इस लायक भी नहीं कि इनका इस्तेमाल हो सके।
अब इनकी मरम्मत में ही निर्माण से अधिक लागत खर्च हो जाएगी। इन गोदामों में लंबी घास उग आई है, छत टूट गई है। हस्तांतरित नहीं किए जाने और रखरखाव के अभाव में ये गोदाम खंडहर में तब्दील हो गए हैं। गैस वितरण केंद्र के प्रभारी प्रदीप कार्की का कहना है कि सड़क से लगे दूरदराज के गांवों में हर माह एक दिन रिफिल की जाती है।
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गैस वितरण केंद्र से
रीठा साहिब: 63 किमी
तामली: 52 किमी
घाट: 45 किमी
पंचेश्वर: 39 किमी
तामली व अन्य गांवों के लोगों को चंपावत गैस एजेंसी से सिलिंडर लेना पड़ता है, जिसमें 150 रुपये भाड़ा, 200 से 250 रुपये यात्री किराया के खर्च करने पड़ते हैं।
महीने में एक दिन गाड़ी आती है, लेकिन अन्य दिनों में रसोई गैस सिलिंडर के लिए समय और 500 रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। परेशानी होती है, सो अलग।
गोदाम का उपयोग नहीं होने से सिलिंडर रिफिल करने पर ग्रामीणों को अधिक रकम खर्च करनी पड़ती है। गोदामों को ठीक करके उपयोग लायक बनाया जाना चाहिए।
गैस गोदामों के संचालन के लिए इंडियन ऑयल कंपनी के मानक पूरे नहीं होने से इनका उपयोग नहीं हो सका। गोदामों का परीक्षण कर जरूरी कार्यवाही की जाएगी।
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जिले में 57 हजार उपभोक्ताओं में से करीब 17 हजार उपभोक्ता ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में जंगल कटान रोकने और ईंधन सुविधा गांव के नजदीक मुहैय्या कराने के मकसद से श्यामलाताल, तामली, पाटी और रौसाल में गोदाम का निर्माण किया गया था। दो दशक पहले निर्मित इन भवनों के निर्माण में लाखों रुपये खर्च हुए। लेकिन इन गोदामों का उपयोग कभी नहीं हो सका। अब ज्यादातर भवन इस लायक भी नहीं कि इनका इस्तेमाल हो सके।
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अब इनकी मरम्मत में ही निर्माण से अधिक लागत खर्च हो जाएगी। इन गोदामों में लंबी घास उग आई है, छत टूट गई है। हस्तांतरित नहीं किए जाने और रखरखाव के अभाव में ये गोदाम खंडहर में तब्दील हो गए हैं। गैस वितरण केंद्र के प्रभारी प्रदीप कार्की का कहना है कि सड़क से लगे दूरदराज के गांवों में हर माह एक दिन रिफिल की जाती है।
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गैस वितरण केंद्र से
रीठा साहिब: 63 किमी
तामली: 52 किमी
घाट: 45 किमी
पंचेश्वर: 39 किमी
तामली व अन्य गांवों के लोगों को चंपावत गैस एजेंसी से सिलिंडर लेना पड़ता है, जिसमें 150 रुपये भाड़ा, 200 से 250 रुपये यात्री किराया के खर्च करने पड़ते हैं।
महीने में एक दिन गाड़ी आती है, लेकिन अन्य दिनों में रसोई गैस सिलिंडर के लिए समय और 500 रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। परेशानी होती है, सो अलग।
गोदाम का उपयोग नहीं होने से सिलिंडर रिफिल करने पर ग्रामीणों को अधिक रकम खर्च करनी पड़ती है। गोदामों को ठीक करके उपयोग लायक बनाया जाना चाहिए।
गैस गोदामों के संचालन के लिए इंडियन ऑयल कंपनी के मानक पूरे नहीं होने से इनका उपयोग नहीं हो सका। गोदामों का परीक्षण कर जरूरी कार्यवाही की जाएगी।

पाटी का जीर्णशीर्ण गैस गोदाम।- फोटो : CHAMPAWAT