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धौन में चट्टान खिसकी, दिनभर बंद रहा निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग
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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग में धौन के पास आए मलबे को हट
- फोटो : CHAMPAWAT
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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग पर धौन के पास बुधवार को भारी-भरकम चट्टान आ गई। मलबे और चट्टान के चलते आवाजाही सुबह 10.36 बजे से दिनभर बंद रही। भारी मलबा आने से करीब 60 मीटर सड़क ध्वस्त हो गई है। जिस जगह मलबा आया है वह जगह भी काफी संकरी है।
डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय के आदेश पर भारी मलबा आने की जानकारी मिलने के बाद टनकपुर की तरफ जा रहे वाहनों को कोतवाली और टनकपुर से पहाड़ को आ रहे वाहनों को ककरालीगेट के पास से वापस कर दिया गया। वहीं रोडवेज ने मैदान को जाने वाली बस सेवाओं को देवीधुरा होते हुए मैदानी क्षेत्रों को भेजा।
मार्ग को खोलने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, शिवालय कंपनी और आपदा विभाग की टीम मौके पर डटी रही लेकिन पहाड़ी से लगातार पत्थरों के गिरने से काम छह बार बाधित हुआ। एनएच खंड के अधिशासी अभियंता एलडी मथैला ने बताया कि मलबे की भारी मात्रा को देखते हुए सड़क को बुधवार को खोल पाना संभव नहीं है। अगर पहाड़ी से पत्थरों का गिरना बंद हुआ तो आवाजाही बृहस्पतिवार सुबह तक सुचारु हो सकेगी।
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जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय ने बताया कि चंपावत से 12 किमी दूर धौन के पास बुधवार 10.36 बजे आई चट्टान और भारी मलबे ने सड़क को बंद कर दिया। लगातार पत्थर गिरने से काम शुरू होने में लगातार अड़चन आती रही। भारी मात्रा में मलबा आने पर एनएच के ईई एलडी मथैला, एई एनसी पांडेय और जेई बीसी जोशी, शिवालय कंपनी के संजय राणा, आरएस यादव, पीडी जोशी, त्वरित राहत टीम (क्यूआरटी) के शंकर वर्मा, छत्रर सिंह बोहरा, वीरेंद्र सिंह आदि तुरंत मौके पर पहुंचे।
एनएच खंड के ईई ने बताया कि दोपहर दो बजे बाद पत्थर गिरना रुकने पर टनकपुर और चंपावत की तरफ दो पोकलैंड, दो लोडर और दो जेसीबी के साथ दो टीमें मलबा हटाने के काम में जुट गईं। मलबा आने पर पुलिस ने चंपावत और टनकपुर की तरफ से आवाजाही कर रहे वाहनों को आगे बढ़ने से रोक दिया। मलबा आने के चलते मार्ग बंद होने से आवाजाही दिनभर ठप रही।
दोनों तरफ वाहनों की लंबी लाइन लग गई। काफी देर इंतजार करने के बाद दोनों तरफ फंसे वाहन अपनी-अपनी तरफ से वापस हो गए। फंसे वाहनों में नेपाल सीमा पर स्थित एसएसबी के बार्डर आउटपोस्ट की ड्यूटी के लिए जा रहे पांच वाहन भी थे। इन वाहनों में 42 जवान थे।
वापस नहीं जा सके चौमेल बहुउद्देश्यीय शिविर में आए कर्मी
चंपावत। बाराकोट विकासखंड के चौमेल में बहुउद्देश्यीय शिविर लगाया गया था। इसमें टनकपुर-बनबसा क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक अधिकारी-कर्मी पहुंचे थे। मार्ग बंद होने से ये कर्मी वापस टनकपुर-बनबसा नहीं पहुंच सके।
बनलेख के छात्रों को एहतियातन स्कूल न जाने की सलाह
चंपावत। धौन जीआईसी में पढ़ने वाले बनलेख के 31 छात्र-छात्राओं को वापस घर आने में चार किमी लंबा पैदल मार्ग तय करना पड़ा। ये बच्चे नौनचूल्हा मंदिर की चढ़ाई पार कर पहुंचे। इस दौरान दो बच्चों को पांव फिसलने से हल्की चोट भी आई। इधर सीईओ आरसी पुरोहित ने सुरक्षा के मद्देनजर सड़क नहीं खुलने तक बनलेख में रहने वाले छात्रों को बृहस्पतिवार को धौन जीआईसी नहीं जाने की सलाह दी है।
कई नेपाली पैदल आने को हुए मजबूर
चंपावत। राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने से कई नेपाली नागरिकों को पैदल दूरी लांघकर आर-पार होना पड़ा। लोहाघाट से नेपाल के महेंद्रनगर जाने वाले लाल सिंह, पुष्पा और सुनीता कठिनाई के साथ मार्ग को पार कर आगे बढ़े। इसी तरह कंचनपुर नेपाल से धारचूला जाने वाले केशव धामी और अर्जुन सिंह ने भी पहाड़ी पार कर आगे का सफर तय किया।
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग का हाल:
सुबह 5.52 बजे से 7.05 बजे तक धौन में मार्ग बंद।
सुबह 9.29 बजे से 10.26 बजे तक दूसरी बार मार्ग बंद हुआ।
सुबह 10.36 बजे से तीसरी बार मार्ग बंद हुआ।
नहीं हो सका रोडवेज की आठ बसों का संचालन, ढाई लाख का नुकसान
लोहाघाट (चंपावत)। धौन में मलबा आने से रोडवेज सेवा प्रभावित हुई। रोड बंद होने से दिल्ली, बरेली, हल्द्वानी, गुड़गांव के लिए बसों का संचालन नहीं होने से यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं इससे रोडवेज को करीब ढाई लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी भुवन चंद्र आर्या ने बताया कि बुधवार को धौन के पास मलबा आने से बरेली, हल्द्वानी, गुड़गांव और दिल्ली की दो बसों का संचालन ठप रहा। जबकि देहरादून की एक और दिल्ली की दो बसों को टनकपुर में रोककर वहीं से संचालन किया गया। इसके अलावा लोहाघाट से देवीधुरा होते हुए दिल्ली की एक और देहरादून की दो बसें भेजी गईं। मार्ग बंद होने से पहले सुबह टनकपुर के रास्ते दिल्ली और नैनीताल के लिए एक-एक बस भेजी गई। जबकि बरेली और हल्द्वानी के लिए बाद में वाया टनकपुर भेजी गई बसों को प्रशासन द्वारा चंपावत में रोक दिया गया।
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डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय के आदेश पर भारी मलबा आने की जानकारी मिलने के बाद टनकपुर की तरफ जा रहे वाहनों को कोतवाली और टनकपुर से पहाड़ को आ रहे वाहनों को ककरालीगेट के पास से वापस कर दिया गया। वहीं रोडवेज ने मैदान को जाने वाली बस सेवाओं को देवीधुरा होते हुए मैदानी क्षेत्रों को भेजा।
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मार्ग को खोलने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, शिवालय कंपनी और आपदा विभाग की टीम मौके पर डटी रही लेकिन पहाड़ी से लगातार पत्थरों के गिरने से काम छह बार बाधित हुआ। एनएच खंड के अधिशासी अभियंता एलडी मथैला ने बताया कि मलबे की भारी मात्रा को देखते हुए सड़क को बुधवार को खोल पाना संभव नहीं है। अगर पहाड़ी से पत्थरों का गिरना बंद हुआ तो आवाजाही बृहस्पतिवार सुबह तक सुचारु हो सकेगी।
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जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय ने बताया कि चंपावत से 12 किमी दूर धौन के पास बुधवार 10.36 बजे आई चट्टान और भारी मलबे ने सड़क को बंद कर दिया। लगातार पत्थर गिरने से काम शुरू होने में लगातार अड़चन आती रही। भारी मात्रा में मलबा आने पर एनएच के ईई एलडी मथैला, एई एनसी पांडेय और जेई बीसी जोशी, शिवालय कंपनी के संजय राणा, आरएस यादव, पीडी जोशी, त्वरित राहत टीम (क्यूआरटी) के शंकर वर्मा, छत्रर सिंह बोहरा, वीरेंद्र सिंह आदि तुरंत मौके पर पहुंचे।
एनएच खंड के ईई ने बताया कि दोपहर दो बजे बाद पत्थर गिरना रुकने पर टनकपुर और चंपावत की तरफ दो पोकलैंड, दो लोडर और दो जेसीबी के साथ दो टीमें मलबा हटाने के काम में जुट गईं। मलबा आने पर पुलिस ने चंपावत और टनकपुर की तरफ से आवाजाही कर रहे वाहनों को आगे बढ़ने से रोक दिया। मलबा आने के चलते मार्ग बंद होने से आवाजाही दिनभर ठप रही।
दोनों तरफ वाहनों की लंबी लाइन लग गई। काफी देर इंतजार करने के बाद दोनों तरफ फंसे वाहन अपनी-अपनी तरफ से वापस हो गए। फंसे वाहनों में नेपाल सीमा पर स्थित एसएसबी के बार्डर आउटपोस्ट की ड्यूटी के लिए जा रहे पांच वाहन भी थे। इन वाहनों में 42 जवान थे।
वापस नहीं जा सके चौमेल बहुउद्देश्यीय शिविर में आए कर्मी
चंपावत। बाराकोट विकासखंड के चौमेल में बहुउद्देश्यीय शिविर लगाया गया था। इसमें टनकपुर-बनबसा क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक अधिकारी-कर्मी पहुंचे थे। मार्ग बंद होने से ये कर्मी वापस टनकपुर-बनबसा नहीं पहुंच सके।
बनलेख के छात्रों को एहतियातन स्कूल न जाने की सलाह
चंपावत। धौन जीआईसी में पढ़ने वाले बनलेख के 31 छात्र-छात्राओं को वापस घर आने में चार किमी लंबा पैदल मार्ग तय करना पड़ा। ये बच्चे नौनचूल्हा मंदिर की चढ़ाई पार कर पहुंचे। इस दौरान दो बच्चों को पांव फिसलने से हल्की चोट भी आई। इधर सीईओ आरसी पुरोहित ने सुरक्षा के मद्देनजर सड़क नहीं खुलने तक बनलेख में रहने वाले छात्रों को बृहस्पतिवार को धौन जीआईसी नहीं जाने की सलाह दी है।
कई नेपाली पैदल आने को हुए मजबूर
चंपावत। राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने से कई नेपाली नागरिकों को पैदल दूरी लांघकर आर-पार होना पड़ा। लोहाघाट से नेपाल के महेंद्रनगर जाने वाले लाल सिंह, पुष्पा और सुनीता कठिनाई के साथ मार्ग को पार कर आगे बढ़े। इसी तरह कंचनपुर नेपाल से धारचूला जाने वाले केशव धामी और अर्जुन सिंह ने भी पहाड़ी पार कर आगे का सफर तय किया।
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग का हाल:
सुबह 5.52 बजे से 7.05 बजे तक धौन में मार्ग बंद।
सुबह 9.29 बजे से 10.26 बजे तक दूसरी बार मार्ग बंद हुआ।
सुबह 10.36 बजे से तीसरी बार मार्ग बंद हुआ।
नहीं हो सका रोडवेज की आठ बसों का संचालन, ढाई लाख का नुकसान
लोहाघाट (चंपावत)। धौन में मलबा आने से रोडवेज सेवा प्रभावित हुई। रोड बंद होने से दिल्ली, बरेली, हल्द्वानी, गुड़गांव के लिए बसों का संचालन नहीं होने से यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं इससे रोडवेज को करीब ढाई लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी भुवन चंद्र आर्या ने बताया कि बुधवार को धौन के पास मलबा आने से बरेली, हल्द्वानी, गुड़गांव और दिल्ली की दो बसों का संचालन ठप रहा। जबकि देहरादून की एक और दिल्ली की दो बसों को टनकपुर में रोककर वहीं से संचालन किया गया। इसके अलावा लोहाघाट से देवीधुरा होते हुए दिल्ली की एक और देहरादून की दो बसें भेजी गईं। मार्ग बंद होने से पहले सुबह टनकपुर के रास्ते दिल्ली और नैनीताल के लिए एक-एक बस भेजी गई। जबकि बरेली और हल्द्वानी के लिए बाद में वाया टनकपुर भेजी गई बसों को प्रशासन द्वारा चंपावत में रोक दिया गया।