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निर्माणाधीन एसडीएम बंगले के ध्वस्तीकरण की संस्तुति
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
Updated Wed, 07 Mar 2018 10:57 PM IST
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चंपावत लीसा फैक्ट्री परिसर में निर्माणाधीन एसडीएम आवास।
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। जिला मुख्यालय में पुरानी रोजिन फैक्ट्री परिसर के समीप निर्माणाधीन एसडीएम बंगले को घटिया गुणवत्ता के चलते ध्वस्त किया जाएगा। बुधवार को निर्माणाधीन स्थल का निरीक्षण करने पहुंची एसडीएम सदर सीमा विश्वकर्मा के नेतृत्व में जांच टीम निरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया। एसडीएम सदर की ओर से डीएम को निर्माणाधीन एसडीएम बंगले के ध्वस्तीकरण की संस्तुति की गई है।
बता दें कि बीते वर्ष जुलाई माह में निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य की गुणवत्ता घटिया होने तथा निर्माण स्थल के समीप जमीन धंसने के कारण कार्यदायी संस्था को तत्काल अगले निर्देशों तक निर्माण कार्य रोकने के आदेश दिए गए थे। एसडीएम का कहना था कि निर्माणाधीन स्थल में जमीन धंसने के कारण अन्य मकानों को भी गंभीर खतरा हो सकता है। इस संबंध में एसडीएम की ओर से डीएम और शासन को उच्च स्तरीय जांच की रिपोर्ट भेजी गई थी। जांच में निर्माणाधीन स्थल की मिट्टी में पानी की मात्रा ज्यादा मिली थी और एसडीएम आवास के पिलर गुणवत्ताहीन थे। जुलाई माह से निर्माण कार्य रुका हुआ था। बुधवार को जांच टीम के दुबारा निरीक्षण में एसडीएम बंगले के ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया। अलबत्ता तहसील भवन और अन्य आवासीय भवनों का निर्माण जल्द शुरू होगा।
प्रोजेक्ट इंप्लीमेंट यूनिट भीमताल को कराना है निर्माण
चंपावत। कार्यदायी संस्था प्रोजेक्ट इंप्लीमेंट यूनिट भीमताल की ओर से ऐतिहासिक राजबुंगा किले में संचालित हो रही तहसील कार्यालय और आवासीय भवनों का निर्माण कार्य रोजिन फैक्ट्री परिसर में किया जाना है। करीब 10.30 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित कार्यालय और आवासीय परिसर में टाईप टू और टाइप फोर के आवासों का निर्माण किया जाना है। कार्यदायी संस्था के सहायक अभियंता विनय कुमार के अनुसार तहसील कार्यालय और आवासीय भवनों के निर्माण के लिए संबंधित भूमि चयन, ज्यूलोजिकल सर्वे तथा आईआईटी रुड़की से मृदा परीक्षण कराने की सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया गया था।
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जांच टीम में शामिल रहे ये अधिकारी
चंपावत। बुधवार को निर्माणाधीन स्थल की निरीक्षण के लिए पहुुंची जांच टीम में एडीएम हेमंत कुमार वर्मा, एसडीएम सीमा विश्वकर्मा के अलावा ग्रामीण निर्माण विभाग के अभियंता प्रमोद वर्मा, भू वैज्ञानिक लेखराज, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज कुमार पांडेय, तहसीलदार गोविंद प्रसाद आदि अधिकारी शामिल रहे।
बता दें कि बीते वर्ष जुलाई माह में निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य की गुणवत्ता घटिया होने तथा निर्माण स्थल के समीप जमीन धंसने के कारण कार्यदायी संस्था को तत्काल अगले निर्देशों तक निर्माण कार्य रोकने के आदेश दिए गए थे। एसडीएम का कहना था कि निर्माणाधीन स्थल में जमीन धंसने के कारण अन्य मकानों को भी गंभीर खतरा हो सकता है। इस संबंध में एसडीएम की ओर से डीएम और शासन को उच्च स्तरीय जांच की रिपोर्ट भेजी गई थी। जांच में निर्माणाधीन स्थल की मिट्टी में पानी की मात्रा ज्यादा मिली थी और एसडीएम आवास के पिलर गुणवत्ताहीन थे। जुलाई माह से निर्माण कार्य रुका हुआ था। बुधवार को जांच टीम के दुबारा निरीक्षण में एसडीएम बंगले के ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया। अलबत्ता तहसील भवन और अन्य आवासीय भवनों का निर्माण जल्द शुरू होगा।
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प्रोजेक्ट इंप्लीमेंट यूनिट भीमताल को कराना है निर्माण
चंपावत। कार्यदायी संस्था प्रोजेक्ट इंप्लीमेंट यूनिट भीमताल की ओर से ऐतिहासिक राजबुंगा किले में संचालित हो रही तहसील कार्यालय और आवासीय भवनों का निर्माण कार्य रोजिन फैक्ट्री परिसर में किया जाना है। करीब 10.30 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित कार्यालय और आवासीय परिसर में टाईप टू और टाइप फोर के आवासों का निर्माण किया जाना है। कार्यदायी संस्था के सहायक अभियंता विनय कुमार के अनुसार तहसील कार्यालय और आवासीय भवनों के निर्माण के लिए संबंधित भूमि चयन, ज्यूलोजिकल सर्वे तथा आईआईटी रुड़की से मृदा परीक्षण कराने की सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया गया था।
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जांच टीम में शामिल रहे ये अधिकारी
चंपावत। बुधवार को निर्माणाधीन स्थल की निरीक्षण के लिए पहुुंची जांच टीम में एडीएम हेमंत कुमार वर्मा, एसडीएम सीमा विश्वकर्मा के अलावा ग्रामीण निर्माण विभाग के अभियंता प्रमोद वर्मा, भू वैज्ञानिक लेखराज, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज कुमार पांडेय, तहसीलदार गोविंद प्रसाद आदि अधिकारी शामिल रहे।