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बारिश व ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ी
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
Updated Thu, 12 Apr 2018 10:46 PM IST
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मछियाड़ गांव में भारी बारिश से भीगकर बर्बाद हुए गेहूं को सुखाते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। जिले के मैदानी क्षेत्र के अलावा मुख्य रूप से लधिया घाटी क्षेत्र की खेती प्रभावित हुई है। इन इलाकों की आम, लीची व गेहूं की फसल पर मार पड़ी है। नुकसान की भरपाई की मांग करते हुए लधिया घाटी संगठन ने डीएम को ज्ञापन भेजा है।
लधियाघाटी के रीठा साहिब, मछियाड़ आदि गांवों में गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। इन इलाकों में गेहूं की खड़ी व कटी फसल को भारी नुकसान हुआ है। अपनी मेहनत पर पानी फिरते देख मायूस किसानों ने मुआवजे की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया कि पांच दिनों से बारिश व ओलावृष्टि के बाद खेतों में पानी के जमाव के कारण किसानों की गेहूं व अन्य मौसमी फसलें नष्ट हो गई हैं। इससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि किसान इसी खेती के जरिये वर्ष भर का गुजारा करते हैं।
फसल बर्बाद होने से उनके सामने गंभीर समस्या पैदा हो गई है। उन्होंने जल्द क्षेत्र के किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। पाटी की एसडीएम निर्मला बिष्ट का कहना है कि ओलावृष्टि और वर्षा से हुए नुकसान का राजस्व उप निरीक्षकों से सर्वे कराया जा रहा है। रिपोर्ट के बाद मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी।
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प्रभावित काश्तकार
पान सिंह भंडारी, राजेंद्र सिंह, चंदन सिंह, मिलाप सिंह, गोपाल सिंह, स्वरूप सिंह, कुंदन सिंह, त्रिलोक सिंह, केदार सिंह, दीपक जोशी, सोहन सिंह, हयात सिंह, गंगा सिंह, नारायण सिंह, होशियार सिंह, महेश चंद्र, नवीन चंद्र, हेम चंद्र, केशर सिंह, भगवान सिंह, रमेश सिंह, उत्तम सिंह, जगत सिंह।
कोट
बारिश व ओलावृष्टि से खेती को कितना नुकसान हुआ है, यह नहीं बताया जा सकता है। नुकसान के सर्वे के आदेश दिए गए हैं। इस सर्वे की रिपोर्ट को प्रशासन व कृषि निदेशालय भेजा जाएगा।
एस कुमार, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।
अधिकांश काश्तकारों का नहीं है बीमा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लागू होने के बावजूद ज्यादातर किसान इस बीमा योजना से नहीं जुड़े हैं। रबी फसल में जिले में सिर्फ 388 काश्तकारों ने ही बीमा कराया है। सात हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में रबी की खेती के बावजूद मात्र 64.47 हेक्टेयर क्षेत्रफल का ही बीमा हुआ है। इस वजह से ज्यादातर किसानों को मौसम से हुए नुकसान की भरपाई मिलना मुश्किल होगा।
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लधियाघाटी के रीठा साहिब, मछियाड़ आदि गांवों में गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। इन इलाकों में गेहूं की खड़ी व कटी फसल को भारी नुकसान हुआ है। अपनी मेहनत पर पानी फिरते देख मायूस किसानों ने मुआवजे की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया कि पांच दिनों से बारिश व ओलावृष्टि के बाद खेतों में पानी के जमाव के कारण किसानों की गेहूं व अन्य मौसमी फसलें नष्ट हो गई हैं। इससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि किसान इसी खेती के जरिये वर्ष भर का गुजारा करते हैं।
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फसल बर्बाद होने से उनके सामने गंभीर समस्या पैदा हो गई है। उन्होंने जल्द क्षेत्र के किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। पाटी की एसडीएम निर्मला बिष्ट का कहना है कि ओलावृष्टि और वर्षा से हुए नुकसान का राजस्व उप निरीक्षकों से सर्वे कराया जा रहा है। रिपोर्ट के बाद मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी।
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प्रभावित काश्तकार
पान सिंह भंडारी, राजेंद्र सिंह, चंदन सिंह, मिलाप सिंह, गोपाल सिंह, स्वरूप सिंह, कुंदन सिंह, त्रिलोक सिंह, केदार सिंह, दीपक जोशी, सोहन सिंह, हयात सिंह, गंगा सिंह, नारायण सिंह, होशियार सिंह, महेश चंद्र, नवीन चंद्र, हेम चंद्र, केशर सिंह, भगवान सिंह, रमेश सिंह, उत्तम सिंह, जगत सिंह।
कोट
बारिश व ओलावृष्टि से खेती को कितना नुकसान हुआ है, यह नहीं बताया जा सकता है। नुकसान के सर्वे के आदेश दिए गए हैं। इस सर्वे की रिपोर्ट को प्रशासन व कृषि निदेशालय भेजा जाएगा।
एस कुमार, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।
अधिकांश काश्तकारों का नहीं है बीमा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लागू होने के बावजूद ज्यादातर किसान इस बीमा योजना से नहीं जुड़े हैं। रबी फसल में जिले में सिर्फ 388 काश्तकारों ने ही बीमा कराया है। सात हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में रबी की खेती के बावजूद मात्र 64.47 हेक्टेयर क्षेत्रफल का ही बीमा हुआ है। इस वजह से ज्यादातर किसानों को मौसम से हुए नुकसान की भरपाई मिलना मुश्किल होगा।