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Champawat News: दाम बढ़ाने से भी नहीं बढ़ी मडुवे की खेती

Mon, 16 Oct 2023 10:21 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Mon, 16 Oct 2023 10:21 AM IST
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Production of maduwa in uttarakhand
चंपावत। मोटे अनाज का राजा मडुवा पहाड़ को खास पहचान दे रहा है लेकिन बहुउपयोगी होने और भरपूर दाम मिलने के बावजूद इसकी खेती नहीं बढ़ सकी है, बल्कि इसमें कमी आ रही है। उत्तराखंड में चार साल में मडुवे की खेती के क्षेत्रफल में 17 प्रतिशत और उत्पादन में 12 प्रतिशत की कमी आ गई है।
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संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2023 को मोटे अनाज का वर्ष घोषित किया है। मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहल भी की जा रही है। गोष्ठी के जरिये किसानों को जागरूक करने से लेकर मडुवे की कीमतों में भी बढ़ोतरी की जा रही है।
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इस साल मडुवे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,842 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। ये राशि गेहूं की एमएसपी 2,125 रुपये से 1,717 रुपये ज्यादा है। इन सबके बावजूद उत्तराखंड में मडुवे की खेती घट रही है। पिछले चार साल से प्रदेश में खेती के क्षेत्रफल में 16,036 हेक्टेयर (17.50 प्रतिशत) और उत्पादन में 16,445 मीट्रिक टन (12.65 प्रतिशत) की कमी हुई है।
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रोटी से बिस्कुट तक हो रहा मडुवे का उपयोग
चंपावत। फाइबर और लौह तत्व की प्रचुरता की वजह से मडुवा बेहद गुणकारी है। रोटी के साथ ही इसका उपयोग कई अन्य रूपों में भी किया जा रहा है। मिठाई विक्रेता आनंद राना बताते हैं कि मडुवे के बिस्कुट, केक, नमकीन और मिठाई की भी मांग बढ़ी है।



मडुवे की खेती और उत्पादन दोनों में पिछले कुछ वर्षों से चंपावत जिले सहित पूरे प्रदेश में कमी आई है। इसके कारणों की पड़ताल की जा रही है। कीमतों में वृद्धि और सरकारी स्तर पर किए जा रहे प्रयासों का असर भविष्य में दिखेगा। - गोपाल सिंह भंडारी, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।

मडुवे की खेती कम होने के प्रमुख कारण

- मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी।
- जंगली जानवरों से फसल को नुकसान।
- पहाड़ के अधिकतर सरकारी विपणन केंद्रों तक फसल को पहुंचाने में खर्च और परेशानी।

उत्तराखंड में मडुवे का चार साल का उत्पादन
वर्ष- क्षेत्र (हेक्टेयर) - उत्पादन (मीट्रिक टन में)
2019: 91,584- 1,29,994
2020: 85,427- 1,25,897
2021: 85,882- 1,26,916
2022: 75,548- 1,13,549

चंपावत जिले में मडुवा का उत्पादन
वर्ष- क्षेत्र (हेक्टेयर)- उत्पादन (मीट्रिक टन)
2019: 4,370- 6,969
2020: 3,610- 6,972
2021: 3,401- 5,096
2022: 2,391- 4,303
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