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सियासी समझ में पीछे नहीं पिछड़ा वनरावत गांव खिरद्वारी
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खिरद्वारी का बूथ। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : TANAKPUR
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चंपावत। नेपाल सीमा के पास का खिरद्वारी गांव चंपावत जिले का अकेला आदिम जनजाति वन रावत बहुल गांव है। महज 159 की आबादी वाले वनरावतों के इस गांव की पहचान विकास की कमी और पिछड़ेपन से है। अब भी यहां न बिजली का उजियारा है और न ज्ञान का। आठवीं से आगे की पढ़ाई के लिए पांच किमी दूर जाना पड़ता है तो रात के अंधेरे को कम करने के लिए सौर ऊर्जा छिटपुट सहारा है। स्वास्थ्य सुविधा के लिए भी लोगों को यहां से 14 किमी दूर चल्थी जाना पड़ रहा है। पिछड़ेपन के बावजूद यहां के 90 प्रतिशत लोग न केवल कोरोना के टीके लगवा चुके हैं, बल्कि उनकी सियासी समझ भी ठीकठाक है। ग्रामीणों को मंगलवार को होने वाले चंपावत सीट के उपचुनाव में मैदान में उतरे चार में से तीन प्रत्याशियों की जानकारी है। वे एक निर्दलीय हिमांशु गड़कोटी के बारे में कुछ नहीं जानते।
ग्रामीण इस बात से भी गदगद हैं कि उनके क्षेत्र से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद मैदान में हैं। उनका चुनाव निशान और दल की भी उन्हें जानकारी है। यहां के बुजुर्ग और युवाओं को मुख्यमंत्री का नाम भी पता है। वे यह भी जानते हैं कि धामी को किन हालात में चंपावत से चुनाव लड़ना पड़ा। सीएम के इस क्षेत्र की नुमाइंदगी करने पर उन्हें क्षेत्र के अच्छे दिन आने की भी उम्मीद है। बुजुर्ग रमेश सिंह बताते हैं कि विधायक राम सिंह कैड़ा सहित 15 से अधिक लोगों के प्रचार में आने से गांव के लोगों को कई जानकारी मिली है। कांग्रेस की निर्मला गहतोड़ी समेत सपा समर्थित मनोज कुमार भट्ट से भी वे वाकिफ हैं।
आमतौर पर सन्नाटे में रहने वाले खिरद्वारी गांव में पिछले दो सप्ताह से काफी हलचल रही है। चल्थी से 14 किमी पैदल दूरी पर स्थित खिरद्वारी गांव के लिए सबसे बड़ी चुनौती सड़क से फासला है। ग्रामीण कहते हैं कि सड़क से दूरी ने उन्हें पढ़ाई-लिखाई से लेकर विकास के रास्ते से भी दूर कर दिया है। एएनएम केंद्र भी इस गांव में नहीं है। ग्रामीण जीत सिंह कहते हैं कि खिरद्वारी के लोग सस्ते गल्ले की दुकान से राशन लाने के लिए 14 किमी का पैदल फासला तय करते हैं तो गेहूं पिसाने के लिए भी उनको तीन किमी दूर जाना पड़ता है।
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एकमात्र उपलब्धि बरातघर का नहीं हुआ उपयोग
चंपावत। खिरद्वारी में 2010 में एक बरातघर बनाया गया था लेकिन इस बरातघर का 12 साल से कभी उपयोग नहीं हुआ है। ग्रामीण कहते हैं कि बरातघर में न पानी है, न बर्तन और न ही अन्य सुविधाएं। ऐसे में इसका उपयोग नहीं हो सका। हालांकि इस साल गांव में सोलर सिंचाई योजना जरूर बनी है।
बिजलीविहीन है खिरद्वारी का मतदान केंद्र
चंपावत। खिरद्वारी के मतदान केंद्र में खिरद्वारी के अलावा लोडियालसेरा, फुरकियाझाला, उपराकोट गांव के लोग भी मतदान करते हैं। इस अकेले बूथ को एक सेक्टर बनाया गया है। इसके लिए अलग सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किया गया है। सड़क से 17 किमी पैदल दूरी वाले इस सेक्टर में पोलिंग दल भी मतदान से दो दिन पहले 29 मई को रवाना हुआ। राजकीय प्राथमिक स्कूल में बने मतदेय स्थल में बिजली तक नहीं है। सेक्टर मजिस्ट्रेट राजकुमार ने बताया कि मतदान के लिए स्थानीय स्तर पर सौर ऊर्जा की व्यवस्था की गई है। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चंपावत से 39 किमी दूर चल्थी तक सड़क मार्ग के बाद यहां से 14 किमी पैदल दूरी तय कर खिरद्वारी पहुंचना होता है। इस बूथ में 390 मतदाता हैं। इनमें 218 पुरुष और 172 महिला शामिल हैं। इसी साल 14 फरवरी को हुए आम चुनाव के मतदान में यहां 213 वोट पड़े थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चुनाव लड़ने से उन्हें किस्मत बदलने की आस है। उनके आने से ग्रामीणों की रोजमर्रा की परेशानी जरूर दूर होगी। - लक्ष्मी देवी, पूर्व अध्यक्ष, महिला मंगल दल।
खिरद्वारी गांव के विकास पर किसी का ध्यान नहीं गया लेकिन उपचुनाव ने हालात बदल दिए हैं। इस सीमांत क्षेत्र में भी सड़क और दूसरी सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद है। - टीका सिंह, खिरद्वारी।
बीएडीपी योजना से जुड़े होने के बावजूद इस गांव में विकास गायब है। सड़क, स्वास्थ्य सुविधा, बिजली की कमी से सबसे ज्यादा दिक्कत है। हाईस्कूल न होने से कोई भी वनरावत आठवीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रहा है। बीमार हो या गर्भवती महिलाएं इलाज के लिए 14 किमी पैदल चलकर चल्थी के अस्पताल में जाना पड़ता है। - सचिन कुमार, ग्राम प्रधान।
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ग्रामीण इस बात से भी गदगद हैं कि उनके क्षेत्र से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद मैदान में हैं। उनका चुनाव निशान और दल की भी उन्हें जानकारी है। यहां के बुजुर्ग और युवाओं को मुख्यमंत्री का नाम भी पता है। वे यह भी जानते हैं कि धामी को किन हालात में चंपावत से चुनाव लड़ना पड़ा। सीएम के इस क्षेत्र की नुमाइंदगी करने पर उन्हें क्षेत्र के अच्छे दिन आने की भी उम्मीद है। बुजुर्ग रमेश सिंह बताते हैं कि विधायक राम सिंह कैड़ा सहित 15 से अधिक लोगों के प्रचार में आने से गांव के लोगों को कई जानकारी मिली है। कांग्रेस की निर्मला गहतोड़ी समेत सपा समर्थित मनोज कुमार भट्ट से भी वे वाकिफ हैं।
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आमतौर पर सन्नाटे में रहने वाले खिरद्वारी गांव में पिछले दो सप्ताह से काफी हलचल रही है। चल्थी से 14 किमी पैदल दूरी पर स्थित खिरद्वारी गांव के लिए सबसे बड़ी चुनौती सड़क से फासला है। ग्रामीण कहते हैं कि सड़क से दूरी ने उन्हें पढ़ाई-लिखाई से लेकर विकास के रास्ते से भी दूर कर दिया है। एएनएम केंद्र भी इस गांव में नहीं है। ग्रामीण जीत सिंह कहते हैं कि खिरद्वारी के लोग सस्ते गल्ले की दुकान से राशन लाने के लिए 14 किमी का पैदल फासला तय करते हैं तो गेहूं पिसाने के लिए भी उनको तीन किमी दूर जाना पड़ता है।
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एकमात्र उपलब्धि बरातघर का नहीं हुआ उपयोग
चंपावत। खिरद्वारी में 2010 में एक बरातघर बनाया गया था लेकिन इस बरातघर का 12 साल से कभी उपयोग नहीं हुआ है। ग्रामीण कहते हैं कि बरातघर में न पानी है, न बर्तन और न ही अन्य सुविधाएं। ऐसे में इसका उपयोग नहीं हो सका। हालांकि इस साल गांव में सोलर सिंचाई योजना जरूर बनी है।
बिजलीविहीन है खिरद्वारी का मतदान केंद्र
चंपावत। खिरद्वारी के मतदान केंद्र में खिरद्वारी के अलावा लोडियालसेरा, फुरकियाझाला, उपराकोट गांव के लोग भी मतदान करते हैं। इस अकेले बूथ को एक सेक्टर बनाया गया है। इसके लिए अलग सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किया गया है। सड़क से 17 किमी पैदल दूरी वाले इस सेक्टर में पोलिंग दल भी मतदान से दो दिन पहले 29 मई को रवाना हुआ। राजकीय प्राथमिक स्कूल में बने मतदेय स्थल में बिजली तक नहीं है। सेक्टर मजिस्ट्रेट राजकुमार ने बताया कि मतदान के लिए स्थानीय स्तर पर सौर ऊर्जा की व्यवस्था की गई है। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चंपावत से 39 किमी दूर चल्थी तक सड़क मार्ग के बाद यहां से 14 किमी पैदल दूरी तय कर खिरद्वारी पहुंचना होता है। इस बूथ में 390 मतदाता हैं। इनमें 218 पुरुष और 172 महिला शामिल हैं। इसी साल 14 फरवरी को हुए आम चुनाव के मतदान में यहां 213 वोट पड़े थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चुनाव लड़ने से उन्हें किस्मत बदलने की आस है। उनके आने से ग्रामीणों की रोजमर्रा की परेशानी जरूर दूर होगी। - लक्ष्मी देवी, पूर्व अध्यक्ष, महिला मंगल दल।
खिरद्वारी गांव के विकास पर किसी का ध्यान नहीं गया लेकिन उपचुनाव ने हालात बदल दिए हैं। इस सीमांत क्षेत्र में भी सड़क और दूसरी सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद है। - टीका सिंह, खिरद्वारी।
बीएडीपी योजना से जुड़े होने के बावजूद इस गांव में विकास गायब है। सड़क, स्वास्थ्य सुविधा, बिजली की कमी से सबसे ज्यादा दिक्कत है। हाईस्कूल न होने से कोई भी वनरावत आठवीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रहा है। बीमार हो या गर्भवती महिलाएं इलाज के लिए 14 किमी पैदल चलकर चल्थी के अस्पताल में जाना पड़ता है। - सचिन कुमार, ग्राम प्रधान।