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आठ साल से गो सेवा कर रहा पुलिस का तैराक
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 30 Apr 2017 11:08 PM IST
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टनकपुर के गौ सेवा सदन में गायों की सेवा करता पुलिस कर्मी और अन्य युवा।
- फोटो : amar ujala
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जिले का एक पुलिस कर्मी पूरी शिद्दत के साथ गो सेवा में जुटा है। उत्तराखंड पुलिस का जल कर्मी रवींद्र पहलवान बीते आठ साल से गो सेवा सदन के जरिये गाय और अन्य जानवरों की सेवा कर रहा है। रवींद्र अपने स्तर से पशुओं के दवाई, चारा, इलाज आदि में अब तक करीब तीन लाख रुपये खर्च कर चुके हैं।
तहसील प्रशासन ने भी उनके इस काम पर उनकी पीठ थपथपाते हुए पुरानी तहसील में गोशाला के लिए जगह मुहैय्या कराई है। टनकपुर में तैनात यह जल पुलिस कर्मी आठ वर्षों में मां पूर्णागिरि धाम आने वाले तीर्थयात्रियों सहित कुल 203 लोगों को शारदा नदी में डूबने से बचा चुका है। लोगों की जिंदगी बचाने के साथ ही वे 107 घायल, बीमार पशुओं की देखभाल और इलाज कर उन्हें ठीक कर चुके हैं।
उनके इस काम में यहां के नौजवान प्रियंक खर्कवाल, दीवान सिंह, सचिन, विशाल, सीताराम, मनोज आदि भी उनका सहयोग करते हैं। इस वक्त गो सेवा सदन में 8 जख्मी गाय और 3 बछिया की सेवा की जा रही है। रवींद्र पहलवान बताते हैं कि उनके किसान पिता की प्रेरणा से उन्हें पशुओं के प्रति सेवा का भाव जगा।
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पुलिस में जल कर्मी बनने के बाद मछलियों को नियमित रूप से आटे के गोले खिलाने वाले इस कर्मी ने बूढ़ी गायों को भटकता देख उनके लिए कुछ करने की ठानी। 2008 में 10 हजार रुपये से उन्होंने गो सेवा शुरू कर दी। अब लोग बीमार, चोटिल गायों को उनके पास इलाज के लिए गो सेवा सदन में लेकर आते हैं।
उनकी सेवा के चलते 2015 में तत्कालीन उप जिलाधिकारी नरेश चंद्र दुर्गापाल ने गोशाला के लिए पुरानी तहसील में जगह उपलब्ध कराई। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पीएस भंडारी का कहना है कि गो सहित अन्य पशुओं की उनकी यह सेवा दूसरों के लिए प्रेरणादायी है।
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तहसील प्रशासन ने भी उनके इस काम पर उनकी पीठ थपथपाते हुए पुरानी तहसील में गोशाला के लिए जगह मुहैय्या कराई है। टनकपुर में तैनात यह जल पुलिस कर्मी आठ वर्षों में मां पूर्णागिरि धाम आने वाले तीर्थयात्रियों सहित कुल 203 लोगों को शारदा नदी में डूबने से बचा चुका है। लोगों की जिंदगी बचाने के साथ ही वे 107 घायल, बीमार पशुओं की देखभाल और इलाज कर उन्हें ठीक कर चुके हैं।
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उनके इस काम में यहां के नौजवान प्रियंक खर्कवाल, दीवान सिंह, सचिन, विशाल, सीताराम, मनोज आदि भी उनका सहयोग करते हैं। इस वक्त गो सेवा सदन में 8 जख्मी गाय और 3 बछिया की सेवा की जा रही है। रवींद्र पहलवान बताते हैं कि उनके किसान पिता की प्रेरणा से उन्हें पशुओं के प्रति सेवा का भाव जगा।
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पुलिस में जल कर्मी बनने के बाद मछलियों को नियमित रूप से आटे के गोले खिलाने वाले इस कर्मी ने बूढ़ी गायों को भटकता देख उनके लिए कुछ करने की ठानी। 2008 में 10 हजार रुपये से उन्होंने गो सेवा शुरू कर दी। अब लोग बीमार, चोटिल गायों को उनके पास इलाज के लिए गो सेवा सदन में लेकर आते हैं।
उनकी सेवा के चलते 2015 में तत्कालीन उप जिलाधिकारी नरेश चंद्र दुर्गापाल ने गोशाला के लिए पुरानी तहसील में जगह उपलब्ध कराई। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पीएस भंडारी का कहना है कि गो सहित अन्य पशुओं की उनकी यह सेवा दूसरों के लिए प्रेरणादायी है।