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खेल महाकुंभ के आयोजन को खेल मैदान नहीं
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मैदान नहीं होने से नेपाल सीमा से लगे चूका गांव में खेत में खेलते गांव के नौजवान।
- फोटो : CHAMPAWAT
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जिले में 27 नवंबर से 20 दिसंबर तक होने वाले खेल महाकुंभ का मकसद खेल प्रतिभाओं को निखारना है लेकिन न्याय पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता के आयोजन में ही सरकारी महकमे के हाथ-पांव फूले हुए हैं। इसकी वजह खेल मैदान और प्रशिक्षक का न होना है। कई न्याय पंचायतों की खेल स्पर्धा दूसरी पंचायतों में होना तय है।
जिले की 24 न्याय पंचायतों में खेल प्रतियोगिताएं होंगी। न्याय पंचायत स्तर पर खो-खो, कबड्डी, एथलेटिक्स व फुटबॉल खेल को शामिल किया गया है लेकिन इन न्याय पंचायतों की 313 ग्राम पंचायतों में से एक में भी खेल की बारीकियों को सिखाने वाले प्रशिक्षक नहीं हैं। 52 प्रतिशत गांवों में छोटे मैदान तक नहीं हैं। ऐसे में अधिकतर ग्रामीण बच्चे बगैर अभ्यास के सीधे प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं।
स्कूलों में भी खेल मैदान के हाल ठीक नहीं है। 80 प्रतिशत माध्यमिक स्कूलों में खेल शिक्षक नहीं हैं। खेल सामग्री भी कम ही स्कूलों में है। सीईओ आरसी पुरोहित का कहना है कि कक्षा नौ से इंटर तक के छात्र-छात्राओं से क्रीड़ा शुल्क लिया जाता है जिससे इन विद्यालयों में खेल सामग्री खरीदी जाती है।
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खेल महाकुंभ की स्पर्धाओं को न्याय पंचायत स्तर पर कराने के प्रयास किए जाएंगे। जहां मैदान नहीं होंगे वहां स्कूलों के मैदान में खेल कराए जाएंगे। बड़ा मैदान नहीं होने की सूरत में सिर्फ फुटबॉल को दूसरी न्याय पंचायत के मैदान में कराया जा सकेगा।
वीएस रावत, जिला युवा कल्याण अधिकारी, चंपावत।
खेत में खेलने को मजबूर गांव के युवा
चंपावत। जिले के ज्यादातर गांवों में खेल मैदान नहीं हैं। ऐसे में अभ्यास के बगैर उम्दा प्रदर्शन करना टेड़ी खीर है। 313 ग्राम पंचायतों में से 164 में मामूली खेल मैदान तक नहीं है। ज्यादातर जगहों पर बच्चे गांवों में मैदान के बजाय खेतों में खेलने को मजबूर हैं। प्रांतीय युवा कल्याण विभाग 25 वर्ष तक की ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए न्याय पंचायत स्तर पर खेलकूद गतिविधियों का आयोजन करता है लेकिन गांवों में खेल मैदानों के हाल खस्ता हैं।
जिला युवा कल्याण अधिकारी वीएस रावत ने बताया कि जिले की 149 पंचायत में युवा क्रीड़ा एवं खेलकूद योजना के तहत खेल मैदान बनाए गए। इनमें भी वॉलीबाल व कबड्डी के अलावा दूसरा खेल मुमकिन नहीं है। वहीं राजीव गांधी खेल अभियान के तहत ब्लॉक मुख्यालयों में प्रस्तावित खेल कांप्लैक्स भी जमीन नहीं मिलने से नहीं बन सके।
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जिले की 24 न्याय पंचायतों में खेल प्रतियोगिताएं होंगी। न्याय पंचायत स्तर पर खो-खो, कबड्डी, एथलेटिक्स व फुटबॉल खेल को शामिल किया गया है लेकिन इन न्याय पंचायतों की 313 ग्राम पंचायतों में से एक में भी खेल की बारीकियों को सिखाने वाले प्रशिक्षक नहीं हैं। 52 प्रतिशत गांवों में छोटे मैदान तक नहीं हैं। ऐसे में अधिकतर ग्रामीण बच्चे बगैर अभ्यास के सीधे प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं।
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स्कूलों में भी खेल मैदान के हाल ठीक नहीं है। 80 प्रतिशत माध्यमिक स्कूलों में खेल शिक्षक नहीं हैं। खेल सामग्री भी कम ही स्कूलों में है। सीईओ आरसी पुरोहित का कहना है कि कक्षा नौ से इंटर तक के छात्र-छात्राओं से क्रीड़ा शुल्क लिया जाता है जिससे इन विद्यालयों में खेल सामग्री खरीदी जाती है।
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खेल महाकुंभ की स्पर्धाओं को न्याय पंचायत स्तर पर कराने के प्रयास किए जाएंगे। जहां मैदान नहीं होंगे वहां स्कूलों के मैदान में खेल कराए जाएंगे। बड़ा मैदान नहीं होने की सूरत में सिर्फ फुटबॉल को दूसरी न्याय पंचायत के मैदान में कराया जा सकेगा।
वीएस रावत, जिला युवा कल्याण अधिकारी, चंपावत।
खेत में खेलने को मजबूर गांव के युवा
चंपावत। जिले के ज्यादातर गांवों में खेल मैदान नहीं हैं। ऐसे में अभ्यास के बगैर उम्दा प्रदर्शन करना टेड़ी खीर है। 313 ग्राम पंचायतों में से 164 में मामूली खेल मैदान तक नहीं है। ज्यादातर जगहों पर बच्चे गांवों में मैदान के बजाय खेतों में खेलने को मजबूर हैं। प्रांतीय युवा कल्याण विभाग 25 वर्ष तक की ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए न्याय पंचायत स्तर पर खेलकूद गतिविधियों का आयोजन करता है लेकिन गांवों में खेल मैदानों के हाल खस्ता हैं।
जिला युवा कल्याण अधिकारी वीएस रावत ने बताया कि जिले की 149 पंचायत में युवा क्रीड़ा एवं खेलकूद योजना के तहत खेल मैदान बनाए गए। इनमें भी वॉलीबाल व कबड्डी के अलावा दूसरा खेल मुमकिन नहीं है। वहीं राजीव गांधी खेल अभियान के तहत ब्लॉक मुख्यालयों में प्रस्तावित खेल कांप्लैक्स भी जमीन नहीं मिलने से नहीं बन सके।