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Champawat News: सूख रहा रोपा गया हर तीसरा पौधा
Mon, 17 Jul 2023 01:06 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 17 Jul 2023 01:06 AM IST
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चंपावत। जिले में सोमवार को हरेले पर 30,000 से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। पौधे लगाने का सिलसिला 15 अगस्त तक जारी रहेगा। पहले के अनुभव बताते हैं कि पौधों को लगाना जितना आसान है, बचाना उतना ही चुनौतीपूर्ण। पिछले तीन वर्षों में लगाए गए पौधों में से औसतन तीन में से एक पौधा सूख रहा है।
चंपावत वन प्रभाग में आरक्षित, पंचायती और सिविल मिलाकर 90,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 से 201-22 तक 1640.59 हेक्टेयर वन भूमि में एक करोड़ इकतीस लाख रुपये खर्च कर चौदह लाख सत्ताईस हजार पौधे लगाए गए लेकिन इसमें से 4,80,000 पौधे सूख गए। देखरेख की कमी और दूसरी वजह से 33.67 प्रतिशत पौधे सूखे।
पिछले तीन वर्षों में लगे पौधों के आंकड़े
वर्ष रोपित पौधे सूखे पौधे
2019-20 : 770420 - 308168
2020-21 : 411002 - 123301
2021-22 : 246012 - 49202
जानवरों से पौधों की सुरक्षा के लिए झाड़ियों और कांटों से घेरबाड़ कर बचाव का विभाग प्रयास करता है लेकिन मौसम, आपदा, जानवर आदि कारणों से पौधों का नुकसान हो रहा है। सामान्य रूप से 90 प्रतिशत पौधे बचने चाहिए। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए पुराने अनुभवों से सीख लेकर सुरक्षा का प्रभावी तंत्र विकसित किया जाएगा। - आरसी कांडपाल, डीएफओ, चंपावत।
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चंपावत वन प्रभाग में आरक्षित, पंचायती और सिविल मिलाकर 90,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 से 201-22 तक 1640.59 हेक्टेयर वन भूमि में एक करोड़ इकतीस लाख रुपये खर्च कर चौदह लाख सत्ताईस हजार पौधे लगाए गए लेकिन इसमें से 4,80,000 पौधे सूख गए। देखरेख की कमी और दूसरी वजह से 33.67 प्रतिशत पौधे सूखे।
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पिछले तीन वर्षों में लगे पौधों के आंकड़े
वर्ष रोपित पौधे सूखे पौधे
2019-20 : 770420 - 308168
2020-21 : 411002 - 123301
2021-22 : 246012 - 49202
जानवरों से पौधों की सुरक्षा के लिए झाड़ियों और कांटों से घेरबाड़ कर बचाव का विभाग प्रयास करता है लेकिन मौसम, आपदा, जानवर आदि कारणों से पौधों का नुकसान हो रहा है। सामान्य रूप से 90 प्रतिशत पौधे बचने चाहिए। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए पुराने अनुभवों से सीख लेकर सुरक्षा का प्रभावी तंत्र विकसित किया जाएगा। - आरसी कांडपाल, डीएफओ, चंपावत।
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