{"_id":"5a4673d24f1c1bcd6d8b6d08","slug":"picture-of-champagari-will-change-bypass-by-road-construction","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाइपास सड़क निर्माण से बदलेगी चंपानगरी की तस्वीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाइपास सड़क निर्माण से बदलेगी चंपानगरी की तस्वीर
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
Updated Fri, 29 Dec 2017 10:26 PM IST
विज्ञापन
चंपावत में बाइपास निर्माण से टूटने से बच जाएंगे सैकड़ों आवासीय मकान।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला मुख्यालय से होकर गुजरने वाले टनकपुर-पिथौरागढ़ बारहमासी सड़क (ऑलवैदर रोड) निर्माण के तहत बनाए जा रहे बाइपास सड़क से अतीत में चंद शासकों की राजधानी रही चंपानगरी की तस्वीर ही बदल जाएगी। बाइपास के निर्माण से जहां सैकड़ों की तादात में आवासीय भवनों के टूटने का खतरा कम हो गया है, वहीं नए इलाकों में नगरीय सुविधाओं के विस्तार को भी तेजी से गति मिल सकेगी। यही नहीं बारहमासी सड़क में बाइपास का निर्माण प्रस्तावित बहुउद्देशीय पंचेश्वर बांध परियोजना के निर्माण में भी बेहद मददगार साबित होगा।
चंपावत के अलावा लोहाघाट नगर में भी प्रस्तावित बाइपास निर्माण से नगर की छवि में परिवर्तन आएगा। बाइपास निर्माण के लिए 24 मीटर भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। जिसमें 12 मीटर चौड़ी पक्की सड़क के बनने से चंपावत और लोहाघाट नगर में यातायात का दबाव कम हो जाएगा। वर्तमान में दोनों ही नगरों में संकरी सड़क के चलते अक्सर जाम लगने की स्थिति पैदा हो रही है। जिस कारण ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटक स्थलों की भरमार होने के बावजूद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बेहद मामूली है।
बाइपास के निर्माण के बाद चंपावत के ऐतिहासिक और पर्यटक स्थलों तक पर्यटकों की आसान पहुंच हो जाएगी। डीएम डॉ.अहमद इकबाल के अनुसार बाइपास का निर्माण आने वाले चार पांच दशकों की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।
विज्ञापन
नाप और वन भूमि का चिह्नीकरण पूरा
चंपावत। राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता एलडी मथेला के अनुसार चंपावत में 11 किमी बाइपास सड़क निर्माण के लिए 15.84 हेक्टेयर नाप भूमि और 10.56 हेक्टेयर बेनाप भूमि को चिह्नित किया गया है। जबकि लोहाघाट के 10 किमी लंबे बाइपास बनाने के लिए 10.56 हेक्टेयर वन भूमि के अलावा 10 हेक्टेयर नाप भूमि चिह्नित की गई है।
लोहाघाट को झेलना होगा बाइपास का लाभ और नुकसान
लोहाघाट (चंपावत)। राष्ट्रीय राजमार्ग में लोहाघाट में देवराड़ी बैंड से पाटन स्थित पैट्रोल पंप के पास तक प्रस्तावित बाइपास के बनने से लोगों को इसका लाभ और नुकसान दोनों होगा। सड़क बनने से जहां लोहाघाट स्टेशन बाजार में पिथौरागढ़ से टनकपुर आदि स्थानों को जाने वाले वाहनों का दबाव कम होगा, वहीं शांत स्वच्छ इलाके में वाहनों की आवाजाही होने से पर्यावरण पर भी इसका व्यापक असर पड़ेगा। वाहनों की आवाजाही से लोगों को प्रदूषण की मार झेलनी पड़ेगी। जिन स्थानों से होकर बाइपास सड़क गुजरेगी उस जमीन की कीमत काफी बढ़ने के साथ हाइवे के पास लोगों के बसने का भी क्रम शुरू हो जाएगा। बाइपास बनने के बाद लोहाघाट के पैट्रोल पंप से लेकर मरोड़ाखान तक राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अतिक्रमण की जद में आने वाले करीब डेढ सौ से अधिक भवन स्वामियों को काफी राहत मिलेगी।
कई गांवों में बाइपास सड़क का विरोध भी शुरू
लोहाघाट (चंपावत)। देवराड़ी बैंड से पाटन के समीप स्थित पैट्रोल पंप तक प्रस्तावित करीब 10 किमी सड़क बनाने का कलीगांव, रायनगर चौड़ी और राईकोट कुंवर के ग्रामीणों ने विरोध दर्ज किया है। ग्रामीणों का कहना है कि बाइपास के निर्माण से उनकी पुस्तैनी उपजाऊ जमीन, पंचायती वन, पेड़ पौधे कट जा रहे हैं, जिससे उन्हें काफी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में उन्हें बाइपास सड़क का कोई लाभ नहीं है।
विज्ञापन
चंपावत के अलावा लोहाघाट नगर में भी प्रस्तावित बाइपास निर्माण से नगर की छवि में परिवर्तन आएगा। बाइपास निर्माण के लिए 24 मीटर भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। जिसमें 12 मीटर चौड़ी पक्की सड़क के बनने से चंपावत और लोहाघाट नगर में यातायात का दबाव कम हो जाएगा। वर्तमान में दोनों ही नगरों में संकरी सड़क के चलते अक्सर जाम लगने की स्थिति पैदा हो रही है। जिस कारण ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटक स्थलों की भरमार होने के बावजूद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बेहद मामूली है।
विज्ञापन
बाइपास के निर्माण के बाद चंपावत के ऐतिहासिक और पर्यटक स्थलों तक पर्यटकों की आसान पहुंच हो जाएगी। डीएम डॉ.अहमद इकबाल के अनुसार बाइपास का निर्माण आने वाले चार पांच दशकों की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।
विज्ञापन
नाप और वन भूमि का चिह्नीकरण पूरा
चंपावत। राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता एलडी मथेला के अनुसार चंपावत में 11 किमी बाइपास सड़क निर्माण के लिए 15.84 हेक्टेयर नाप भूमि और 10.56 हेक्टेयर बेनाप भूमि को चिह्नित किया गया है। जबकि लोहाघाट के 10 किमी लंबे बाइपास बनाने के लिए 10.56 हेक्टेयर वन भूमि के अलावा 10 हेक्टेयर नाप भूमि चिह्नित की गई है।
लोहाघाट को झेलना होगा बाइपास का लाभ और नुकसान
लोहाघाट (चंपावत)। राष्ट्रीय राजमार्ग में लोहाघाट में देवराड़ी बैंड से पाटन स्थित पैट्रोल पंप के पास तक प्रस्तावित बाइपास के बनने से लोगों को इसका लाभ और नुकसान दोनों होगा। सड़क बनने से जहां लोहाघाट स्टेशन बाजार में पिथौरागढ़ से टनकपुर आदि स्थानों को जाने वाले वाहनों का दबाव कम होगा, वहीं शांत स्वच्छ इलाके में वाहनों की आवाजाही होने से पर्यावरण पर भी इसका व्यापक असर पड़ेगा। वाहनों की आवाजाही से लोगों को प्रदूषण की मार झेलनी पड़ेगी। जिन स्थानों से होकर बाइपास सड़क गुजरेगी उस जमीन की कीमत काफी बढ़ने के साथ हाइवे के पास लोगों के बसने का भी क्रम शुरू हो जाएगा। बाइपास बनने के बाद लोहाघाट के पैट्रोल पंप से लेकर मरोड़ाखान तक राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अतिक्रमण की जद में आने वाले करीब डेढ सौ से अधिक भवन स्वामियों को काफी राहत मिलेगी।
कई गांवों में बाइपास सड़क का विरोध भी शुरू
लोहाघाट (चंपावत)। देवराड़ी बैंड से पाटन के समीप स्थित पैट्रोल पंप तक प्रस्तावित करीब 10 किमी सड़क बनाने का कलीगांव, रायनगर चौड़ी और राईकोट कुंवर के ग्रामीणों ने विरोध दर्ज किया है। ग्रामीणों का कहना है कि बाइपास के निर्माण से उनकी पुस्तैनी उपजाऊ जमीन, पंचायती वन, पेड़ पौधे कट जा रहे हैं, जिससे उन्हें काफी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में उन्हें बाइपास सड़क का कोई लाभ नहीं है।