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नौ साल बाद खुलेंगे श्यामलाताल पर्यटक आवास गृह के ताले
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श्यामलाताल का पर्यटक आवास गृह। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। पर्यटन प्रदेश उत्तराखंड में पर्यटक आवास गृहों (टीआरएच) के बुरे हाल जग जाहिर हैं। चंपावत जिले के श्यामलाताल के टीआरएच भी इसी का एक नमूना हैं लेकिन अब यहां के हालात बदलने वाले हैं। नौ साल से बंद पर्यटक आवास गृह के ताले अगले कुछ महीनों में खुल जाएंगे।
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर टनकपुर रेल हेड से महज 28 किलोमीटर दूर श्यामलाताल बेहतरीन पर्यटन स्थल है। डेढ़ हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित श्यामलाताल में मौसम इस कदर खुशगवार है कि यहां मई-जून की भीषण गर्मी के महीनों में भी नवंबर-दिसंबर जैसी खुशनुमा शीतलता मिलती है। खास आबोहवा और पर्यटकों के लिए अनुकूल हालात की वजह से यहां कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) का 40 शैय्याओं (बेड) का दो दशक पहले पर्यटक आवास गृह बनाया गया। विवाद की वजह से इस टीआरएच का करीब नौ साल तक संचालन नहीं हो सका। खस्ता हालत के चलते 10 साल पूर्व इस टीआरएच को पीपीपी मोड पर दिया गया। निगम और संचालक के बीच विवाद के चलते इसे शुरू नहीं किया जा सका। इसके चलते निगम को सरकारी आय का नुकसान हुआ और सैलानियों को भी सुविधा से वंचित होना पड़ा। जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़ ने बताया कि विवाद की वजह से 2013 में टीआरएच नहीं खुल सका। वैसे इससे पूर्व एक दशक में श्यामलाताल टीआरएच में 100 विदेशियों सहित कुल 2709 पर्यटकों की ही आमद हो सकी।
अब यह टीआरएच फिर संचालित होगा। इसकी तैयारियां शुरू हो रही है। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि टीआरएच संचालन को लेकर विवाद खत्म हो चुका है। अब इसे संचालित करने के लिए पर्यटक आवास गृह के कमरों की मरम्मत और जरूरी साज-सज्जा कराई जाएगी। इस काम के पूरा होने के बाद इसका फिर से संचालन शुरू होगा। संवाद
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श्यामलाताल झील संरक्षण की हो रही कवायद
चंपावत। श्यामलाताल की पहचान यहां के ताल से है। इसी ताल की वजह से ये सैलानियों की खास पसंद रहा है। एक वर्ग किलोमीटर में फैली यह झील लोगों को खूब लुभाती है। ताल के सौंदर्यीकरण और सैलानियों को लुभाने के लिए पैडल वोट सहित कई काम हुए। अब इस श्यामलाताल झील के संरक्षण की पहल भी की जा रही है। इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पर्यटन और सिंचाई विभाग कवायद कर रहे हैं। 10.60 करोड़ रुपये से इसका विकास किया जाएगा।
ये था विवाद :
चंपावत। श्यामलाताल का पर्यटक आवास गृह 2012 में पीपीपी (सार्वजनिक निजी सहभागिता) मोड में दिया गया। एक साल बाद यानी 2013 में ही पर्यटक आवास गृह के संचालन में अड़चन आ गई। आवास गृह के रखरखाव और निगम को होने वाले होने वाले भुगतान को लेकर विवाद हो गया। नौबत यहां तक आ गई कि आवास गृह में 2013 से ताले लटक गए। आखिरकार नौ साल बाद केएमवीएन टीआरएच का स्वामित्व ले सका और अब जल्द ही इसका संचालन होगा।
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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर टनकपुर रेल हेड से महज 28 किलोमीटर दूर श्यामलाताल बेहतरीन पर्यटन स्थल है। डेढ़ हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित श्यामलाताल में मौसम इस कदर खुशगवार है कि यहां मई-जून की भीषण गर्मी के महीनों में भी नवंबर-दिसंबर जैसी खुशनुमा शीतलता मिलती है। खास आबोहवा और पर्यटकों के लिए अनुकूल हालात की वजह से यहां कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) का 40 शैय्याओं (बेड) का दो दशक पहले पर्यटक आवास गृह बनाया गया। विवाद की वजह से इस टीआरएच का करीब नौ साल तक संचालन नहीं हो सका। खस्ता हालत के चलते 10 साल पूर्व इस टीआरएच को पीपीपी मोड पर दिया गया। निगम और संचालक के बीच विवाद के चलते इसे शुरू नहीं किया जा सका। इसके चलते निगम को सरकारी आय का नुकसान हुआ और सैलानियों को भी सुविधा से वंचित होना पड़ा। जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़ ने बताया कि विवाद की वजह से 2013 में टीआरएच नहीं खुल सका। वैसे इससे पूर्व एक दशक में श्यामलाताल टीआरएच में 100 विदेशियों सहित कुल 2709 पर्यटकों की ही आमद हो सकी।
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अब यह टीआरएच फिर संचालित होगा। इसकी तैयारियां शुरू हो रही है। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि टीआरएच संचालन को लेकर विवाद खत्म हो चुका है। अब इसे संचालित करने के लिए पर्यटक आवास गृह के कमरों की मरम्मत और जरूरी साज-सज्जा कराई जाएगी। इस काम के पूरा होने के बाद इसका फिर से संचालन शुरू होगा। संवाद
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श्यामलाताल झील संरक्षण की हो रही कवायद
चंपावत। श्यामलाताल की पहचान यहां के ताल से है। इसी ताल की वजह से ये सैलानियों की खास पसंद रहा है। एक वर्ग किलोमीटर में फैली यह झील लोगों को खूब लुभाती है। ताल के सौंदर्यीकरण और सैलानियों को लुभाने के लिए पैडल वोट सहित कई काम हुए। अब इस श्यामलाताल झील के संरक्षण की पहल भी की जा रही है। इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पर्यटन और सिंचाई विभाग कवायद कर रहे हैं। 10.60 करोड़ रुपये से इसका विकास किया जाएगा।
ये था विवाद :
चंपावत। श्यामलाताल का पर्यटक आवास गृह 2012 में पीपीपी (सार्वजनिक निजी सहभागिता) मोड में दिया गया। एक साल बाद यानी 2013 में ही पर्यटक आवास गृह के संचालन में अड़चन आ गई। आवास गृह के रखरखाव और निगम को होने वाले होने वाले भुगतान को लेकर विवाद हो गया। नौबत यहां तक आ गई कि आवास गृह में 2013 से ताले लटक गए। आखिरकार नौ साल बाद केएमवीएन टीआरएच का स्वामित्व ले सका और अब जल्द ही इसका संचालन होगा।