{"_id":"62e813a40b3dfc658a6d753e","slug":"people-roar-in-the-hospital-answer-sandhya-s-death-champawat-news-hld4710579128","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पताल में गरजे लोग, संध्या की मौत का जवाब दो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पताल में गरजे लोग, संध्या की मौत का जवाब दो
विज्ञापन
प्रसूता संध्या के इलाज में लापरवाही से मौत का आरोप लगा चंपावत जिला अस्पताल में प्रदर्शन करते ग्र?
- फोटो : CHAMPAWAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत। शिशु जन्म के 11 दिन बाद प्रसूता की मौत से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने सोमवार को 20 किलोमीटर दूर से यहां पहुंच कर जुलूस निकाला। अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रसूता की मौत की जांच कराने की मांग की। प्रदर्शन के चलते कुछ देर अफरातफरी भी मची रही। ग्रामीणों ने अस्पताल पर लापरवाही के अलावा ऑपरेशन के नाम पर रुपये ऐंठने के भी आरोप लगाए। तीन घंटे से अधिक समय तक विरोध प्रदर्शन के बाद ग्रामीण कलक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के अलावा डीएम व सीएमओ को ज्ञापन भेज इंसाफ की गुहार लगाई।
बाजरीकोट और लोहाघाट के रायकोट गांव से चंपावत आए ग्रामीणों ने प्रसूता संध्या के इलाज में हीलाहवाली का आरोप लगाया। विरोध में ग्रामीणों ने सोमवार को चंपावत में स्टेशन रोड से जिला अस्पताल तक जुलूस निकाल जोरदार प्रदर्शन किया। अस्पताल पर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और परिजनों को पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी ने किसी तरह वार्ता के लिए मनाया। परिजनों का आरोप था कि इलाज में लापरवाही मौत की वजह रही। साथ ही उन्होंने अस्पताल स्टाफ पर दस हजार रुपये ऐंठने का भी आरोप लगाया।
सीआरपीएफ में छत्तीसगढ़ में तैनात प्रसूता के पति दीपक कुमार का आरोप है कि ऑपरेशन में लापरवाही से संध्या के शरीर में संक्रमण फैला और उसकी मौत हुई। डॉ. ऐरी ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की जांच कराकर इसमें दोषी पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बाद में प्रदर्शनकारियों ने कलक्ट्रेट पहुंच डीएम के जरिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। संवाद
विज्ञापन
विरोध प्रदर्शन में बाजरीकोट के गांव से दिव्यांग अनिल कुमार के अलावा छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष गोविंद प्रसाद, फूलवती देवी, नरेश कुमार, बबीता देवी, नरेश कुमार, सरोज कुंवर, सूरज कुमार, सुमित कुमार, अमित कुमार, अनिल कुमार, हरीश कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।
ये है मामला:
चंपावत। 19 जुलाई को ऑपरेशन से जिला अस्पताल में शिशु को जन्म देने वाली संध्या की 11 दिन बाद 29 जुलाई को बरेली के भोजीपुरा के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई थी। जिला अस्पताल से 28 जुलाई को रेफर किए जाने के बाद परिजन प्रसूता को चंपावत के निजी अस्पताल के बाद हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी और एक निजी अस्पताल के बाद बरेली के भोजीपुरा के निजी अस्पताल ले गए। फिर भी प्रसूता को बचाया नहीं जा सका।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी चार दिन में देगी रिपोर्ट
चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसूता की मौत पर शोक जताते हुए इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि प्रसूता की मौत के मामले में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। ये कमेटी इलाज में चूक या लापरवाही की जांच करेगी। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही गई है। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि एसीएमओ डॉ. श्वेता खर्कवाल, टनकपुर की सर्जन डॉ. प्रभा जोशी और जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी जांच कमेटी के सदस्य बनाए गए हैं। जांच चार दिन में पूरी करनी होगी।
ऑपरेशन के लिए पहले निजी अस्पताल गए थे परिजन
चंपावत। संध्या का ऑपरेशन चंपावत के एक निजी अस्पताल में होना था लेकिन बाद में ऑपरेशन जिला अस्पताल में हुआ। संध्या के परिजनों का कहना है कि वे 19 जुलाई को संध्या को लेकर एक निजी अस्पताल के बाहर पहुंचे ही थे तभी अस्पताल के पास कुछ लोगों ने पूछताछ कर इलाज के लिए जिला अस्पताल जाने को कहा। परिजनों के मुताबिक निजी अस्पताल में ऑपरेशन में 35 हजार रुपये का खर्च आ रहा था जबकि सरकारी अस्पताल में 15 हजार रुपये में ऑपरेशन होने की बात कही गई। प्रसूता संध्या के चाचा हरीश कुमार का कहना है कि इसके बाद संध्या को निजी अस्पताल के बजाय सरकारी अस्पताल ले गए।
विज्ञापन
बाजरीकोट और लोहाघाट के रायकोट गांव से चंपावत आए ग्रामीणों ने प्रसूता संध्या के इलाज में हीलाहवाली का आरोप लगाया। विरोध में ग्रामीणों ने सोमवार को चंपावत में स्टेशन रोड से जिला अस्पताल तक जुलूस निकाल जोरदार प्रदर्शन किया। अस्पताल पर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और परिजनों को पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी ने किसी तरह वार्ता के लिए मनाया। परिजनों का आरोप था कि इलाज में लापरवाही मौत की वजह रही। साथ ही उन्होंने अस्पताल स्टाफ पर दस हजार रुपये ऐंठने का भी आरोप लगाया।
विज्ञापन
सीआरपीएफ में छत्तीसगढ़ में तैनात प्रसूता के पति दीपक कुमार का आरोप है कि ऑपरेशन में लापरवाही से संध्या के शरीर में संक्रमण फैला और उसकी मौत हुई। डॉ. ऐरी ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की जांच कराकर इसमें दोषी पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बाद में प्रदर्शनकारियों ने कलक्ट्रेट पहुंच डीएम के जरिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। संवाद
विज्ञापन
विरोध प्रदर्शन में बाजरीकोट के गांव से दिव्यांग अनिल कुमार के अलावा छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष गोविंद प्रसाद, फूलवती देवी, नरेश कुमार, बबीता देवी, नरेश कुमार, सरोज कुंवर, सूरज कुमार, सुमित कुमार, अमित कुमार, अनिल कुमार, हरीश कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।
ये है मामला:
चंपावत। 19 जुलाई को ऑपरेशन से जिला अस्पताल में शिशु को जन्म देने वाली संध्या की 11 दिन बाद 29 जुलाई को बरेली के भोजीपुरा के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई थी। जिला अस्पताल से 28 जुलाई को रेफर किए जाने के बाद परिजन प्रसूता को चंपावत के निजी अस्पताल के बाद हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी और एक निजी अस्पताल के बाद बरेली के भोजीपुरा के निजी अस्पताल ले गए। फिर भी प्रसूता को बचाया नहीं जा सका।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी चार दिन में देगी रिपोर्ट
चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसूता की मौत पर शोक जताते हुए इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि प्रसूता की मौत के मामले में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। ये कमेटी इलाज में चूक या लापरवाही की जांच करेगी। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही गई है। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि एसीएमओ डॉ. श्वेता खर्कवाल, टनकपुर की सर्जन डॉ. प्रभा जोशी और जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी जांच कमेटी के सदस्य बनाए गए हैं। जांच चार दिन में पूरी करनी होगी।
ऑपरेशन के लिए पहले निजी अस्पताल गए थे परिजन
चंपावत। संध्या का ऑपरेशन चंपावत के एक निजी अस्पताल में होना था लेकिन बाद में ऑपरेशन जिला अस्पताल में हुआ। संध्या के परिजनों का कहना है कि वे 19 जुलाई को संध्या को लेकर एक निजी अस्पताल के बाहर पहुंचे ही थे तभी अस्पताल के पास कुछ लोगों ने पूछताछ कर इलाज के लिए जिला अस्पताल जाने को कहा। परिजनों के मुताबिक निजी अस्पताल में ऑपरेशन में 35 हजार रुपये का खर्च आ रहा था जबकि सरकारी अस्पताल में 15 हजार रुपये में ऑपरेशन होने की बात कही गई। प्रसूता संध्या के चाचा हरीश कुमार का कहना है कि इसके बाद संध्या को निजी अस्पताल के बजाय सरकारी अस्पताल ले गए।