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Champawat News: बनबसा रेलवे बाजार के व्यापारियों की बढ़ रही घबराहट
Mon, 16 Jun 2025 11:17 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 16 Jun 2025 11:17 PM IST
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बनबसा (चंपावत)। बनबसा के रेलवे बाजार के कारोबारी चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं। उन्हें अपने बेरोजगार होने का खतरा सता रहा है। करीब पांच छह दशकों से रेलवे भूमि पर किराए पर दुकान चलाने वाले व्यवसायी रेलवे की नई नीति से परेशान हैं। रेलवे ने अब अपनी भूमि नीलामी के जरिए दुकानदारों को रोजगार के लिए देना तय किया है, इसका यहां के दुकानदार विरोध कर रहे हैं।
रेलवे ने बनबसा की पांच दुकानों की नीलामी 10 जून को पीलीभीत में करनी थी। विरोध और बाजार बंद के बाद रेलवे ने दो सप्ताह के लिए नीलामी स्थगित कर दी। एक सप्ताह का समय निकल चुका है। जैसे-जैसे समय निकलता जा रहा है, रेलवे बाजार के व्यापारियों की घबराहट बढ़ती चली जा रही है। व्यापार मंडल अध्यक्ष भरत भंडारी ने बताया कि पीड़ित व्यापारियों को भविष्य का खतरा सता रहा है। उनका मन कारोबार में नहीं लग रहा है। चार पांच दशकों से रेलवे भूमि पर कारोबार करने वाले व्यापारियों ने बताया कि उनके हित में कोई फैसला नहीं होने पर उन्हें परिवार के साथ आत्मदाह करने को विवश होना पड़ेगा। सांसद प्रतिनिधि संजय जोशी ने बताया कि अब बनबसा रेलवे भूमि पर व्यवसाय करने वाले कारोबारियों के बारे कोई भी निर्णय पूरी तौर पर रेलमंत्री और रेलवे बोर्ड पर है। उन्हें विश्वास है कि रेलवे व्यापारियों के हित में ही रेलवे कोई सकारात्मक निर्णय लेगी।
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रेलवे ने बनबसा की पांच दुकानों की नीलामी 10 जून को पीलीभीत में करनी थी। विरोध और बाजार बंद के बाद रेलवे ने दो सप्ताह के लिए नीलामी स्थगित कर दी। एक सप्ताह का समय निकल चुका है। जैसे-जैसे समय निकलता जा रहा है, रेलवे बाजार के व्यापारियों की घबराहट बढ़ती चली जा रही है। व्यापार मंडल अध्यक्ष भरत भंडारी ने बताया कि पीड़ित व्यापारियों को भविष्य का खतरा सता रहा है। उनका मन कारोबार में नहीं लग रहा है। चार पांच दशकों से रेलवे भूमि पर कारोबार करने वाले व्यापारियों ने बताया कि उनके हित में कोई फैसला नहीं होने पर उन्हें परिवार के साथ आत्मदाह करने को विवश होना पड़ेगा। सांसद प्रतिनिधि संजय जोशी ने बताया कि अब बनबसा रेलवे भूमि पर व्यवसाय करने वाले कारोबारियों के बारे कोई भी निर्णय पूरी तौर पर रेलमंत्री और रेलवे बोर्ड पर है। उन्हें विश्वास है कि रेलवे व्यापारियों के हित में ही रेलवे कोई सकारात्मक निर्णय लेगी।
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