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किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी
अमर उजाला ब्यूूूूराे लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Wed, 03 Jan 2018 10:51 PM IST
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लंबे समय से वर्षा न होने के बाद लोहाघाट क्षेत्र में सूखे पड़े खेत।
- फोटो : अमर उजाला
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लंबे समय से बारिश नहीं होने से किसानों के खेत बंजर पड़ने की स्थिति में आ गए हैं। सूखे से गेहूं की फसल पर बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई जगहों जगहों में खेतों में गेहूं की फसल उग ही नहीं पाई है। कुछ जगहों में नमी के चलते हैं, तो अब बारिश न होने से बर्बाद होने की कगार पर हैं। किसान बारिश की आस में आसमान की ओर टकटकी निगाह लगाए हुए हैं।
चंपावत जिले मेें करीब 8300 हेक्टेयर में रबी की फसल की बुआई की गई है। किसानों ने मेहनत कर फसल लगाई है। सितंबर माह से बारिश न होने के कारण सूखा पड़ने से किसान परेशान हैं। जानवरों के लिए हरे चारे का संकट पैदा हो गया है। किसानों का कहना है कि पिछले साल भी वर्षा न होने से गेहूं फसल काफी प्रभावित हुई थी। उन्होंने प्रशासन से किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।
बरसात बाद नहीं टपकी एक बूंद
चंपावत जिले में बरसात के बाद बारिश की एक बूंद नहीं टपकी है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय ने बताया कि अक्तूबर 2017 से अब तक चंपावत में बारिश नहीं हुई है। जबकि पिछले साल इस समय तक 1.20 मिलीमीटर बारिश हो गई थी।
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कोट
पर्वतीय क्षेत्रों में 85 प्रतिशत से ज्यादा खेती बारिश पर ही निर्भर है। अगर एक पखवाड़े के भीतर बारिश न हुई, तो बोई गई गेहूं की फसल में जमाव कम होगा, जहां जमाव हुआ है, वह फसल की बढ़त नहीं होने से उपज प्रभावित होगी।
ईश्वरी राम आर्या,
कृषि रक्षा अधिकारी,
चंपावत।
कहीं मेहनत पर पानी न फिर जाय
काश्तकार महेश चंद्र राय का कहना है कि बारिश न होने से उनकी गेहूं की फसल चौपट होने की कगार में पहुंच गई है। काफी मेहनत कर खेतों में गेहूं की बुआई की थी। वर्षा न होने के कारण हब मेहनत पर पानी फिरता जा रहा है।
परिवार के भरण पोषण पर लटकी तलवार
दिनेश चंद्र बगौली का कहना है कि वर्षा होने की उम्मीद में उन्होंने गेहूं व जानवरों के चारे की बुआई की थी। लेकिन लंबे समय से बारिश होने से खेत बंजर पड़े हुए हैं। ऐसे में परिवार का भरण पोषण कैसे होगा यह बड़ी चिंता बनी हुई है।
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चंपावत जिले मेें करीब 8300 हेक्टेयर में रबी की फसल की बुआई की गई है। किसानों ने मेहनत कर फसल लगाई है। सितंबर माह से बारिश न होने के कारण सूखा पड़ने से किसान परेशान हैं। जानवरों के लिए हरे चारे का संकट पैदा हो गया है। किसानों का कहना है कि पिछले साल भी वर्षा न होने से गेहूं फसल काफी प्रभावित हुई थी। उन्होंने प्रशासन से किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।
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बरसात बाद नहीं टपकी एक बूंद
चंपावत जिले में बरसात के बाद बारिश की एक बूंद नहीं टपकी है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय ने बताया कि अक्तूबर 2017 से अब तक चंपावत में बारिश नहीं हुई है। जबकि पिछले साल इस समय तक 1.20 मिलीमीटर बारिश हो गई थी।
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पर्वतीय क्षेत्रों में 85 प्रतिशत से ज्यादा खेती बारिश पर ही निर्भर है। अगर एक पखवाड़े के भीतर बारिश न हुई, तो बोई गई गेहूं की फसल में जमाव कम होगा, जहां जमाव हुआ है, वह फसल की बढ़त नहीं होने से उपज प्रभावित होगी।
ईश्वरी राम आर्या,
कृषि रक्षा अधिकारी,
चंपावत।
कहीं मेहनत पर पानी न फिर जाय
काश्तकार महेश चंद्र राय का कहना है कि बारिश न होने से उनकी गेहूं की फसल चौपट होने की कगार में पहुंच गई है। काफी मेहनत कर खेतों में गेहूं की बुआई की थी। वर्षा न होने के कारण हब मेहनत पर पानी फिरता जा रहा है।
परिवार के भरण पोषण पर लटकी तलवार
दिनेश चंद्र बगौली का कहना है कि वर्षा होने की उम्मीद में उन्होंने गेहूं व जानवरों के चारे की बुआई की थी। लेकिन लंबे समय से बारिश होने से खेत बंजर पड़े हुए हैं। ऐसे में परिवार का भरण पोषण कैसे होगा यह बड़ी चिंता बनी हुई है।