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मंच अस्पताल में मरीजों को नहीं मिल रहा उपचार
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Sat, 29 Jul 2017 10:41 PM IST
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चंपावत जिले के मंच में सूना पड़ा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले के सीमांत मंच तामली क्षेत्र की दस हजार से अधिक की आबादी में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मंच स्वयं के इलाज के लिए तरस रहा है। विभागीय अभिलेखों में अस्पताल में चिकित्सक सहित आठ कर्मचारियों की तैनाती दर्शायी गई है। लेकिन ऐसा कभी भी नहीं हुआ कि पूरा का पूरा स्टाफ एक साथ अस्पताल में मौजूद मिला हो।
ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल से मरीजों को किसी प्रकार का उपचार नहीं मिल पा रहा है। पूरे महीने में केवल एक दो दिन खानापूरी के लिए अस्पताल को खोला जाता है। उसी दौरान सभी अभिलेखों को खानापूरी कर भर लिया जाता है। शेष अन्य दिन केवल एक कर्मचारी अस्पताल का दरवाजा खोलने का काम करता है। जिस कारण अस्पताल की ओपीडी नाममात्र की होती है।
ग्राम प्रधान दान सिंह, दीवान सिंह, राहुल सिंह, शेर सिंह आदि का कहना है कि क्षेत्र में लाखों रुपये की लागत से अस्पताल भवन और आवासीय भवनों का निर्माण किया गया है। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों को अस्पताल का कोई भी लाभ नहीं मिल रहा है। छोटी छोटी मौसमी बीमारियों के लिए भी ग्रामीणों को जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी होती है। अस्पताल पहुंचने वाले रोगियों को लाल पीली दवाओं के लिए भी तरसना होता है। सीमांत क्षेत्र के दुर्दशा को लेकर ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन भेजा है। जिसमें अस्पताल में स्वीकृत सभी पदों में कर्मचारियों की तैनाती करने और अस्पताल को नियमित खोले जाने की मांग उठाई है।
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रखे रखे एक्सपायर हो जाती हैं जरूरी दवाएं
चंपावत। सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में सरकार की ओर से जारी दवा का स्टाक ज्यों का त्यों रखा जाता है। जिस कारण जरूरी दवाएं रखे रखे एक्सपायर हो जाती हैं। जिन्हें बाद में नष्ट कर दिया जाता है। यदि समय रहते दवाओं का मरीजों को वितरण होता को कुछ लाभ होता।
कोट
सीमांत क्षेत्र में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मंच में जरूरत के हिसाब से चिकित्सा कर्मचारी तैनात किए गए हैं। अस्पताल स्टाफ के मौजूद न रहने की शिकायत की जांच कराई जाएगी।
डॉ.एमएस बोहरा, सीएमओ, चंपावत।
ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल से मरीजों को किसी प्रकार का उपचार नहीं मिल पा रहा है। पूरे महीने में केवल एक दो दिन खानापूरी के लिए अस्पताल को खोला जाता है। उसी दौरान सभी अभिलेखों को खानापूरी कर भर लिया जाता है। शेष अन्य दिन केवल एक कर्मचारी अस्पताल का दरवाजा खोलने का काम करता है। जिस कारण अस्पताल की ओपीडी नाममात्र की होती है।
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ग्राम प्रधान दान सिंह, दीवान सिंह, राहुल सिंह, शेर सिंह आदि का कहना है कि क्षेत्र में लाखों रुपये की लागत से अस्पताल भवन और आवासीय भवनों का निर्माण किया गया है। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों को अस्पताल का कोई भी लाभ नहीं मिल रहा है। छोटी छोटी मौसमी बीमारियों के लिए भी ग्रामीणों को जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी होती है। अस्पताल पहुंचने वाले रोगियों को लाल पीली दवाओं के लिए भी तरसना होता है। सीमांत क्षेत्र के दुर्दशा को लेकर ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन भेजा है। जिसमें अस्पताल में स्वीकृत सभी पदों में कर्मचारियों की तैनाती करने और अस्पताल को नियमित खोले जाने की मांग उठाई है।
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रखे रखे एक्सपायर हो जाती हैं जरूरी दवाएं
चंपावत। सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में सरकार की ओर से जारी दवा का स्टाक ज्यों का त्यों रखा जाता है। जिस कारण जरूरी दवाएं रखे रखे एक्सपायर हो जाती हैं। जिन्हें बाद में नष्ट कर दिया जाता है। यदि समय रहते दवाओं का मरीजों को वितरण होता को कुछ लाभ होता।
कोट
सीमांत क्षेत्र में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मंच में जरूरत के हिसाब से चिकित्सा कर्मचारी तैनात किए गए हैं। अस्पताल स्टाफ के मौजूद न रहने की शिकायत की जांच कराई जाएगी।
डॉ.एमएस बोहरा, सीएमओ, चंपावत।