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मानेश्वर शक्तिपीठ: जहां पांडवों ने स्थापित किया था शिवलिंग

Mon, 12 Feb 2018 11:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।  
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।   Updated Mon, 12 Feb 2018 11:18 PM IST
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pandavas layed the foundation of shivling in maneshwar shaktipith
चंपावत का मानेश्वर महादेव मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
चंपावत के मानेश्वर शक्तिपीठ का एतिहासिक महत्व है। महाशिवरात्रि को लेकर यहां विशेष तैयारियां की जाती हैं। मान्यता है कि मानेश्वर महादेव शक्तिपीठ में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित किया था। स्कंध पुराण के मानस खंड में मानेश्वर शक्तिपीठ का उल्लेख किया गया है। कहा जाता है कि यहां से पवित्र कैलाश मानसरोवर की सीमा शुरू होती है। मंदिर के अंदर मौजूद गुप्त नौले के जल से स्नान करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। बताया जाता है कि जब पांडव पुत्र माता कुंती के साथ अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र में आए तो आमलकी एकादशी पर राजा पांडु की श्राद्ध तिथि थी। माता कुंती का प्रण था कि वह श्राद्ध कैलाश मानसरोवर के ही जल से करेगी। कुंती ने यह बात युधिष्ठिर को बताई तो उन्होंने अर्जुन से माता का प्रण पूरा करने को कहा। अर्जुन ने अपने गांडीव धनुष से बाण मार कर यहां जल धारा पैदा की।
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इस जल से पांडु का श्राद्ध करने के बाद उन्होंने भगवान शिव का आभार प्रकट करने के लिए इस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की थी। जिस स्थान पर बाण मारा उसे वर्तमान में गुप्त नौली के नाम से जाना जाता है। इसका जल यहां निर्मित एक बावड़ी में एकत्र होता है। इस जल से स्नान करने पर पुण्य लाभ के साथ ही कई रोग व विकार दूर होने की बात कही जाती है।
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कभी कैलास मानसरोवर यात्री करते थे रात्रि विश्राम
मानेश्वर धाम कैलास मानसरोवर यात्रा का भी मुख्य पड़ाव रहा है। 1962 से पूर्व जब यह यात्रा पैदल होती थी, तो टनकपुर में शारदा नदी में स्नान के बाद यात्रियों का पहला पड़ाव चंपावत ही हुआ करता था। इतिहासकार देवेंद्र ओली बताते हैं कि यहां स्थापित बालेश्वर शिव धाम में पूजा के बाद मानसरोवर यात्री मानेश्वर धाम पहुंचते थे, जहां पूजा अर्चना के बाद रात्रि विश्राम करते थे।


आमलिका एकादशी से शुरू होता है खड़ी होली गायन
आमलिका एकादशी मानेश्वर शक्तिपीठ की वर्षगांठ के रूप में मनाई जाती है। चंपावत-लोहाघाट के मध्य स्थापित इस धाम में खड़ी होली गायन का भी विशेष महत्व है। आमलिका एकादशी को लोग यहां वेदांती और भक्तिमय होलियों का गायन करते हैं। इस मौके पर यहां मेले का भी आयोजन होता है। आमलिका एकादशी के बाद ही क्षेत्र में खड़ी होली का गायन शुरू होता है।
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