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डेढ़ दशक में महज दो सौ मीटर ही बन पाई सड़क
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
Updated Mon, 09 Oct 2017 10:45 PM IST
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जिले के लोहाघाट विकासखंड के सीमांत गुड़मांगल को आजादी के सात दशक बाद भी सड़क सुविधा का इंतजार है। डेढ़ दशक पहले सड़क निर्माण के लिए शासन की ओर से स्वीकृति तो मिल गई, लेकिन लोक निर्माण विभाग की ओर से टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं होने के कारण सड़क का निर्माण अधर में लटका हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर वन अथवा भूमि संबंधी कोई भी आपत्ति नहीं होने के बावजूद सड़क का निर्माण नहीं किया जा रहा।
बताया कि विभाग की ओर से सड़क निर्माण के शुरूआत में दो सौ मीटर सड़क का कटान अवश्य किया गया है, लेकिन 15 साल बीत गए सड़क निर्माण का काम इससे आगे नहीं बढ़ सका और यहीं पर पूर्ण विराम लग गया। ग्रामीणों ने शीघ्र सड़क का निर्माण शुरू नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। गुड़मांगल के सामाजिक कार्यकर्ता दीपक पांडेय, सुरेश चंद्र, हरीश चंद्र आदि ने मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा है।
इसमें कहा है कि सीमांत क्षेत्र के लिए सड़क का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव से सड़क तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को पांच से सात किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। क्षेत्र में फलों का व्यापक उत्पादन होने के बावजूद सड़क सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को फलों का मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा गांव तक खाद्यान्न और भवन निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को अतिरिक्त धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। उन्होंने जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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बताया कि विभाग की ओर से सड़क निर्माण के शुरूआत में दो सौ मीटर सड़क का कटान अवश्य किया गया है, लेकिन 15 साल बीत गए सड़क निर्माण का काम इससे आगे नहीं बढ़ सका और यहीं पर पूर्ण विराम लग गया। ग्रामीणों ने शीघ्र सड़क का निर्माण शुरू नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। गुड़मांगल के सामाजिक कार्यकर्ता दीपक पांडेय, सुरेश चंद्र, हरीश चंद्र आदि ने मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा है।
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इसमें कहा है कि सीमांत क्षेत्र के लिए सड़क का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव से सड़क तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को पांच से सात किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। क्षेत्र में फलों का व्यापक उत्पादन होने के बावजूद सड़क सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को फलों का मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा गांव तक खाद्यान्न और भवन निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को अतिरिक्त धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। उन्होंने जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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