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Champawat News: हे भगवान.. इस जमाने में भी उजाले के लिए लैंप का सहारा
Mon, 25 Sep 2023 11:05 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 25 Sep 2023 11:05 PM IST
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चंपावत जिले के सीमांत मटकांडा गांव को आज भी है बिजली सुविधा की दरकार। संवाद
चंपावत। यह सुनने और पढ़ने में जरूर ताज्जुब होगा कि इस जमाने में भी गांवों में बिजली नहीं है और लैंप व लालटेन ही ग्रामीणों का सहारा है। ऐसा चंपावत जिले के नेपाल सीमा से लगे मटकांडा और ग्वानी गांव का हाल है। यहां ग्रामीणों को आज भी बिजली के उजाले का इंतजार है। आजादी के 76 साल बीतने के बाद भी ग्रामीणों को लालटेन युग का जीवन बिताना पड़ रहा है।
दोनों गांव के 40 से अधिक परिवारों में कुछ घरों में रात में उजाले के लिए सौर उर्जा के उपकरण लगे है लेकिन ज्यादातर घरों में ग्रामीणों को लैंप, लालटेन का सहारा लेना पड़ रहा है। मटकांडा और ग्वानी गांव को बिजली सुविधा से जोड़ने के लिए वर्ष 2006 में बिजली के खंभे तो गाढ़े गए, लेकिन उन खभों में तार नहीं बिछाए गए। अब पहले लगाए गए खंभे भी जंक लगने से खराब हो गए हैं।
परेशानी
1. ग्रामीणों का कहना है कि उजाले की व्यवस्था नहीं होने से जंगली जानवरों के भय से ग्रामीण शाम ढलते ही घरों में कैद होने हो जाते हैं। सबसे अधिक दिक्कतें स्कूली छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही हैं।
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2.लैंप जलाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से मिलने वाले मिट्टी तेल (केरोसिन) की आपूर्ति बंद होने से डीजल से ढिबरी (लैंप) जलानी पड़ती है
मोबाइल चार्ज के लिए लगानी होती है दूसरे गांव की दौड़
चंपावत। मटकांडा और ग्वानी गांव में बिजली की सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को मोबाइल चार्ज करने के लिए दूसरे गांव की दौड़ लगानी पड़ती है। ग्रामीण प्रकाश सिंह, बचन सिंह केशव सिंह, कृष्ण सिंह, गंगा सिंह, दीवान राम, रमेश राम, उदय सिंह, मोहन सिंह, शेर सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि इंटरनेट, मोबाइल के जमाने में बिना बिजली के कई कार्य तो प्रभावित हो ही रहे हैं, स्कूली बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। संवाद
कोट
सीमांत क्षेत्र के बिजली सुविधा से विहीन गांवों में जल्द ही विद्युतीकरण किया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से कार्ययोजना तैयार की जा रही है। - उमाकांत चतुर्वेदी, ईई, पावर कारपोरेशन, चंपावत।
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दोनों गांव के 40 से अधिक परिवारों में कुछ घरों में रात में उजाले के लिए सौर उर्जा के उपकरण लगे है लेकिन ज्यादातर घरों में ग्रामीणों को लैंप, लालटेन का सहारा लेना पड़ रहा है। मटकांडा और ग्वानी गांव को बिजली सुविधा से जोड़ने के लिए वर्ष 2006 में बिजली के खंभे तो गाढ़े गए, लेकिन उन खभों में तार नहीं बिछाए गए। अब पहले लगाए गए खंभे भी जंक लगने से खराब हो गए हैं।
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परेशानी
1. ग्रामीणों का कहना है कि उजाले की व्यवस्था नहीं होने से जंगली जानवरों के भय से ग्रामीण शाम ढलते ही घरों में कैद होने हो जाते हैं। सबसे अधिक दिक्कतें स्कूली छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही हैं।
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2.लैंप जलाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से मिलने वाले मिट्टी तेल (केरोसिन) की आपूर्ति बंद होने से डीजल से ढिबरी (लैंप) जलानी पड़ती है
मोबाइल चार्ज के लिए लगानी होती है दूसरे गांव की दौड़
चंपावत। मटकांडा और ग्वानी गांव में बिजली की सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को मोबाइल चार्ज करने के लिए दूसरे गांव की दौड़ लगानी पड़ती है। ग्रामीण प्रकाश सिंह, बचन सिंह केशव सिंह, कृष्ण सिंह, गंगा सिंह, दीवान राम, रमेश राम, उदय सिंह, मोहन सिंह, शेर सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि इंटरनेट, मोबाइल के जमाने में बिना बिजली के कई कार्य तो प्रभावित हो ही रहे हैं, स्कूली बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। संवाद
कोट
सीमांत क्षेत्र के बिजली सुविधा से विहीन गांवों में जल्द ही विद्युतीकरण किया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से कार्ययोजना तैयार की जा रही है। - उमाकांत चतुर्वेदी, ईई, पावर कारपोरेशन, चंपावत।
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