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अड़चन खत्म: ढाई साल बाद शुरू होगा स्टेडियम का लटका काम
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ढाई साल से लटका लोहाघाट का निर्माणाधीन स्टेडियम।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। खेल मंत्री अरविंद पांडेय चंपावत जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं, फिर भी यह जिला राज्य बनने के बाद पहले स्टेडियम के लिए तरस रहा है। हाल इस कदर खराब रहे कि लोहाघाट छमनियांचौड़ के निर्माणाधीन स्टेडियम का पूरा होना तो दूर, अगस्त 2018 से काम ही बंद रहा। कमतर गुणवत्ता और बजट मिलने में देरी से ये नौबत आई। अलबत्ता अब अच्छी खबर है। प्रदेश शासन ने स्टेडियम के रुके काम को फिर से शुरू करने के लिए 434.14 लाख रुपये अवमुक्त कर दिए हैं। इस तरह 1092.68 लाख के सापेक्ष स्टेडियम के लिए अब तक 859.14 लाख रुपये मिल चुके हैं।
उत्तराखंड बनने के बाद जिले के पहले स्टेडियम का सपना छह साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। इस वजह से खेल प्रतिभाओं को निखारने में भी अड़चन आ रही है। सुंई ग्राम पंचायत के लोगों ने स्टेडियम के लिए छह हेक्टेयर भूमि दान कर स्टेडियम के लिए जमीन तैयार की। ढाई साल पहले तक 425 लाख रुपये से अब तक सुरक्षा दीवार, रनिंग ट्रैक, टेरिस कटिंग, मैदान समतलीकरण, ड्रेनेज निर्माण, ब्रिक वर्क आदि का काम ही पूरा हो सका। वहीं बारिश और घटिया गुणवत्ता से निर्मित सुरक्षा दीवार दो साल पहले टूट गई। जांच और बजट नहीं मिलने से अगस्त 2018 से काम बंद था।
अलबत्ता अब शासन ने स्टेडियम के लिए धन जारी कर दिया है। जिला क्रीड़ाधिकारी आरएस धामी ने बताया कि प्रदेश शासन ने 434.14 लाख रुपये अवमुक्त कर दिए हैं। डीएसओ को कहना है कि ये रकम कार्यदाई संस्था उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को स्थानांतरित की जा रही है।
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घटिया गुणवत्ता की जांच में हुई थी पुष्टि
चंपावत। लोहाघाट के निर्माणाधीन स्टेडियम की गुणवत्ता में खामी की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी। 50 लाख रुपये से बनी सुरक्षा दीवार 2019 में बरसात में ध्वस्त गई थी। तीन सदस्यीय जांच टीम ने भी गुणवत्ता में कई कमियां पाई थी, और अब शासन द्वारा बजट दिए जाने के साथ ही उप्र निर्माण निगम को सुरक्षा दीवार में सुधार सहित तमाम कमियों को ठीक करने के आदेश भी दिए गए हैं।
स्टेडियम के लिए निम्र चरणों में मिली राशि
30 मार्च 2015 200 लाख रुपये
16 अगस्त 2016 50 लाख रुपये
1 अगस्त 2017 175 लाख रुपये
मार्च 2021 434.14 लाख रुपये
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उत्तराखंड बनने के बाद जिले के पहले स्टेडियम का सपना छह साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। इस वजह से खेल प्रतिभाओं को निखारने में भी अड़चन आ रही है। सुंई ग्राम पंचायत के लोगों ने स्टेडियम के लिए छह हेक्टेयर भूमि दान कर स्टेडियम के लिए जमीन तैयार की। ढाई साल पहले तक 425 लाख रुपये से अब तक सुरक्षा दीवार, रनिंग ट्रैक, टेरिस कटिंग, मैदान समतलीकरण, ड्रेनेज निर्माण, ब्रिक वर्क आदि का काम ही पूरा हो सका। वहीं बारिश और घटिया गुणवत्ता से निर्मित सुरक्षा दीवार दो साल पहले टूट गई। जांच और बजट नहीं मिलने से अगस्त 2018 से काम बंद था।
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अलबत्ता अब शासन ने स्टेडियम के लिए धन जारी कर दिया है। जिला क्रीड़ाधिकारी आरएस धामी ने बताया कि प्रदेश शासन ने 434.14 लाख रुपये अवमुक्त कर दिए हैं। डीएसओ को कहना है कि ये रकम कार्यदाई संस्था उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को स्थानांतरित की जा रही है।
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घटिया गुणवत्ता की जांच में हुई थी पुष्टि
चंपावत। लोहाघाट के निर्माणाधीन स्टेडियम की गुणवत्ता में खामी की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी। 50 लाख रुपये से बनी सुरक्षा दीवार 2019 में बरसात में ध्वस्त गई थी। तीन सदस्यीय जांच टीम ने भी गुणवत्ता में कई कमियां पाई थी, और अब शासन द्वारा बजट दिए जाने के साथ ही उप्र निर्माण निगम को सुरक्षा दीवार में सुधार सहित तमाम कमियों को ठीक करने के आदेश भी दिए गए हैं।
स्टेडियम के लिए निम्र चरणों में मिली राशि
30 मार्च 2015 200 लाख रुपये
16 अगस्त 2016 50 लाख रुपये
1 अगस्त 2017 175 लाख रुपये
मार्च 2021 434.14 लाख रुपये