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अब 2012 व 2013 की नियुक्तियों की संदिग्ध पत्रावलियां भी तलब
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
Updated Sun, 04 Mar 2018 10:09 PM IST
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चंपावत शिक्षा कार्यालय में जांच के लिए तैयार कर रखी गई शिक्षकों की पत्रावलियां।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रारंभिक शिक्षा विभाग की नियुक्तियों का जांच दायरा बढ़ा दिया गया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) संदिग्ध प्रमाणपत्रों के जरिए नियुक्ति पाने वालों की पिछले साल अगस्त से जांच कर रहा है। अब इस जांच में 2012 और 2014 के बीच हुई नियुक्तियों को शामिल कर दिया गया है। शिक्षा विभाग इन पत्रावलियों को तैयार कर रहा है। जल्द ही ये पत्रावली एसआईटी को भेज दी जाएगी।
शिक्षा विभाग ने अगस्त में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को 2014 व 2016 में तैनात शिक्षकों के संदिग्ध शैक्षिक प्रमाण पत्रों का ब्यौरा और अन्य अभिलेखों की जांच शुरू की थी। जिले में इन दो वर्षों में 140 संदिग्ध मामले थे। जिन्हें जांच दल को उपलब्ध करा दिया गया है।
अलबत्ता जनवरी में जांच के दायरे को बढ़ाते हुए 2012 व 2013 में हुई संदिग्ध नियुक्तियों की पत्रावली भी तलब की गई है। मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित ने बताया कि 2012 में 101 व 2013 में 98 संदिग्ध नियुक्तियों की पत्रावली एसआईटी को भेजी जा रही है। वहीं 2015 में 174 शिक्षा मित्रों की नियुक्ति हुई थी। एसआईटी इन प्रमाणपत्रों का अपने स्तर से सत्यापन कराएगा। प्रमाण पत्रों की जांच में मुख्य रूप से कतिपय बाहरी शिक्षण संस्थानों से हासिल डिप्लोमा, डिग्री या अन्य शैक्षिक योग्यता से संबंधित प्रमाण पत्रों का परीक्षण किया जाएगा।
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पत्रावली की जांच को विश्वविद्यालय मांग रहे हैं धन
बाहरी शिक्षण संस्थानों के प्रमाण पत्रों की जांच में नया पेंच फंसने का खतरा बढ़ गया है। शिक्षा विभाग ने 2014 व 2016 की करीब 100 पत्रावलियों को जांच के लिए मेरठ और पंजाब विश्वविद्यालय को भेजा था। लेकिन उनकी ओर से पत्रावली की जांच के लिए धन की मांग की गई है। बताया गया कि इन विश्वविद्यालयों ने प्रति पत्रावली 600 रुपये शुल्क की मांग की है। मगर अब इस राशि को लेकर उलझाव बढ़ गया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि उनके पास इस तरह के धन को देने का प्रावधान नहीं है। इससे संबंधित दिशा-निर्देश मांगे जा रहे हैं।
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शिक्षा विभाग ने अगस्त में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को 2014 व 2016 में तैनात शिक्षकों के संदिग्ध शैक्षिक प्रमाण पत्रों का ब्यौरा और अन्य अभिलेखों की जांच शुरू की थी। जिले में इन दो वर्षों में 140 संदिग्ध मामले थे। जिन्हें जांच दल को उपलब्ध करा दिया गया है।
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अलबत्ता जनवरी में जांच के दायरे को बढ़ाते हुए 2012 व 2013 में हुई संदिग्ध नियुक्तियों की पत्रावली भी तलब की गई है। मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित ने बताया कि 2012 में 101 व 2013 में 98 संदिग्ध नियुक्तियों की पत्रावली एसआईटी को भेजी जा रही है। वहीं 2015 में 174 शिक्षा मित्रों की नियुक्ति हुई थी। एसआईटी इन प्रमाणपत्रों का अपने स्तर से सत्यापन कराएगा। प्रमाण पत्रों की जांच में मुख्य रूप से कतिपय बाहरी शिक्षण संस्थानों से हासिल डिप्लोमा, डिग्री या अन्य शैक्षिक योग्यता से संबंधित प्रमाण पत्रों का परीक्षण किया जाएगा।
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पत्रावली की जांच को विश्वविद्यालय मांग रहे हैं धन
बाहरी शिक्षण संस्थानों के प्रमाण पत्रों की जांच में नया पेंच फंसने का खतरा बढ़ गया है। शिक्षा विभाग ने 2014 व 2016 की करीब 100 पत्रावलियों को जांच के लिए मेरठ और पंजाब विश्वविद्यालय को भेजा था। लेकिन उनकी ओर से पत्रावली की जांच के लिए धन की मांग की गई है। बताया गया कि इन विश्वविद्यालयों ने प्रति पत्रावली 600 रुपये शुल्क की मांग की है। मगर अब इस राशि को लेकर उलझाव बढ़ गया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि उनके पास इस तरह के धन को देने का प्रावधान नहीं है। इससे संबंधित दिशा-निर्देश मांगे जा रहे हैं।