सुधरे नहीं पीपीपी मोड अस्पताल के हालात
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बुधवार को पीपीपी मोड संचालित अस्पताल में प्रसव के दौरान शिशु की मौत के बाद भी अस्पताल में व्यवस्था कतई नहीं सुधरी है। अस्पताल में प्रसव कक्ष में आवश्यक संसाधनों और उपकरणों की कोई व्यवस्था नहीं है। महिलाओं को किसी प्रकार की दवाएं अथवा भोजन की भी सुविधा नहीं मिल रही है, जबकि जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकार की ओर से दवाएं, भोजन और सभी प्रकार की जांचें महिलाओं को निशुल्क दी जाती हैं, लेकिन यहां महिलाओं को इन सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। हंगामा होने अथवा बड़े अफसरों के आने पर ही मरीजों को कुछ सुविधाएं मिल पाती है। इस संबंध में पूछे जाने पर अस्पताल प्रशासन व्यवस्था सुधारने की बात कहकर पल्लू झाड़ लेता है।
नगर पंचायत अध्यक्ष लता वर्मा का कहना है कि अस्पताल में प्रसूता महिलाओं को बेवजह बाजार से दवाएं मंगाई जाती है। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले महिलाओं से सुविधा शुल्क भी वसूला जाता है। तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त रीता गहतोड़ी का कहना है कि कई बार उनके हस्तक्षेप के बाद रोगियों को स्वास्थ्य सेवाएं दी गई। उनका कहना है कि कड़ाके की ठंड में अस्पताल के हीटर रोगियों और प्रसव कक्ष में नजर ही नहीं आते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद वर्मा का कहना है कि सीएमओ के निर्देशों के बावजूद रोगी बाहर से दवा लाने को मजबूर हैं।
हड़ताल को हुए आठ दिन, सुलह की कोई राह नहीं
पीपीपी मोड संचालित अस्पताल के डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की हड़ताल आठवें दिन भी जारी रही। इस वजह से रोगियों को खासी दिक्कत हो रही है। अलबत्ता स्वास्थ्य विभाग ने अलग से व्यवस्था कर रोगियों के इलाज का दावा किया है। उधर, हड़ताली डॉक्टरों का कहना है कि अब तक शील प्रबंधन की ओर से दो माह के वेतन को देने की कोई पहल नहीं किए जाने से हड़ताल करने को मजबूर हैं।
अस्पताल के यूनिट हेड डा.रवि सिन्हा का कहना है कि हड़ताली डॉक्टरों और कर्मचारियों को काम पर वापस आने के लिए राजी कराने की पहल की गई, मगर वेतन के बगैर वे काम पर लौटने को तैयार नहीं है। शील प्रबंधन की मनमानी को लेकर अब लोगों का गुस्सा भी परवान चढ़ने लगा है। नगर पंचायत अध्यक्ष लता वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद वर्मा, जिला पंचायत के पूर्व सदस्य सचिन जोशी आदि का कहना है कि वेतन का लेनदेन सीधे शील प्रबंधन से है, लेकिन उसका दंश आम लोग भुगत रहे हैं। उन्होंने अस्पताल में पीपीपी मोड की व्यवस्था समाप्त कर इसे पूर्व स्थिति में लाने की मांग की।