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लाभार्थी एक भी नहीं, बना डाली नहर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 06 Nov 2016 09:55 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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लघु सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। विभाग ने बिना लाभार्थियों के ही सिंचाई के नाम पर बंजर भूमि पर दो नहरें बना डालीं। आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में इसका खुलासा हुआ।
लोहाघाट ब्लॉक के सीमांत डुंगरालेटी ग्राम पंचायत में धर्मेंद्र राम पुत्र पुष्कर राम ने विभिन्न बिंदुओं पर लघु सिंचाई विभाग से सूचनाएं मांगी थीं। विभाग की ओर से ग्राम पंचायत के धर्माघाट और हेडलेख में सिंचाई योजनाएं निर्माणाधीन होने की जानकारी दी गईं।
इनमें धर्माघाट योजना में 18 लाभार्थी दिखाने के साथ ही 5.32 हेक्टेयर भूमि और हेडलेख योजना में 17 लाभार्थी और 5.50 हेक्टेयर भूमि सिंचित किया जाना प्रस्तावित बताया गया है। विभाग की ओर से दोनों योजनाओं का निर्माण कार्य ठेकेदारों के माध्यम से किया जा रहा है। धर्मेंद्र राम ने बताया कि धर्माघाट में एक भी लाभार्थी नहीं रहता है। यहां 5.32 हेक्टेयर भूमि सिंचित दिखाई गई है, जबकि योजना का निर्माण बंजर जमीन पर किया गया है। उसने इस संबंध में उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भेजकर जांच की मांग उठाई है। दूसरी ओर लघु सिंचाई विभाग के लोक सूचना अधिकारी ईई केएस कन्याल का कहना है कि लघु सिंचाई विभाग की ओर से जो भी योजनाएं बनाई जाती हैं वे ग्राम पंचायत के प्रस्ताव और भूमि और जल की उपलब्धता के आधार पर ही बनाई जाती हैं।
लोहाघाट ब्लॉक के सीमांत डुंगरालेटी ग्राम पंचायत में धर्मेंद्र राम पुत्र पुष्कर राम ने विभिन्न बिंदुओं पर लघु सिंचाई विभाग से सूचनाएं मांगी थीं। विभाग की ओर से ग्राम पंचायत के धर्माघाट और हेडलेख में सिंचाई योजनाएं निर्माणाधीन होने की जानकारी दी गईं।
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इनमें धर्माघाट योजना में 18 लाभार्थी दिखाने के साथ ही 5.32 हेक्टेयर भूमि और हेडलेख योजना में 17 लाभार्थी और 5.50 हेक्टेयर भूमि सिंचित किया जाना प्रस्तावित बताया गया है। विभाग की ओर से दोनों योजनाओं का निर्माण कार्य ठेकेदारों के माध्यम से किया जा रहा है। धर्मेंद्र राम ने बताया कि धर्माघाट में एक भी लाभार्थी नहीं रहता है। यहां 5.32 हेक्टेयर भूमि सिंचित दिखाई गई है, जबकि योजना का निर्माण बंजर जमीन पर किया गया है। उसने इस संबंध में उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भेजकर जांच की मांग उठाई है। दूसरी ओर लघु सिंचाई विभाग के लोक सूचना अधिकारी ईई केएस कन्याल का कहना है कि लघु सिंचाई विभाग की ओर से जो भी योजनाएं बनाई जाती हैं वे ग्राम पंचायत के प्रस्ताव और भूमि और जल की उपलब्धता के आधार पर ही बनाई जाती हैं।
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