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उपकरणों के बिना रोग का मर्ज खोजते ग्रामीण अस्पताल
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पाटी के अस्पताल में धूल फांकती एक्सरे मशीन। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। पाटी तहसील के दूरदराज के अस्पतालों के हाल कितने बदतर है, इसका नजारा सोमवार को दिखा। शरीर में लगी गोली का पता लगाने के लिए ओखलकांडा ब्लॉक के सुनकोट गांव से आए विजय लमगड़िया को पाटी अस्पताल लाया गया, लेकिन मशीन होने के बावजूद तकनीशियन न होने के कारण उनका एक्सरे नहीं हो सका। पाटी तहसील के देवीधुरा, टांण, भिंगराड़ा, डांडा स्वास्थ्य केंद्र सहित आसपास के अस्पतालों की बदहाली की ये बानगी भर है। इन अस्पतालों में न उपकरण हैं और न ही इलाज। इन अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की बदौलत ही प्राथमिक स्तर का उपचार हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के चार अस्पतालों में किसी भी जगह रोग की पहचान करने के लिए परीक्षण की मामूली सुविधा तक नहीं है।
इन चारों अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीन या ईसीजी जांच करने वाली मशीन भी नहीं है। उपकरण के नाम पर बस बुखार नापने के लिए थर्मामीटर, ब्लडप्रेशर मापने की मशीन (स्फाइगनोमैनो मीटर) हैं। सिर्फ देवीधुरा में दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, तीन ऑक्सीजन सिलिंडर हैं लेकिन इनके संचालन के लिए भी तकनीशियन नहीं हैं। देवीधुरा के डॉ. सक्षम दिगारी ही इमरजेंसी में इसका उपयोग कर मरीजों को राहत पहुंचाते हैं। ग्रामीण अस्पतालों में सिर्फ देवीधुरा में ही दवाओं की उपलब्धता रहती है। फार्मासिस्ट नवीन गोस्वामी, एएनएम पुष्पा सिंह बताती हैं कि यहां दवाओं की उपलब्धता तो पर्याप्त है, लेकिन परीक्षण की सुविधा न होने से इलाज में जरूर मुश्किल आती है। वहीं भिंगराड़ा, टांण पीएचसी, डांडा के एएनएम केंद्र की तस्वीर तो और भी बेहाल है। यहां इलाज से लेकर परीक्षण और दवा तक की हमेशा कमी रहती है।
न उपकरण, न तकनीशियनों की तैनाती
चंपावत। पाटी तहसील की 23 हजार से अधिक आबादी की स्वास्थ्य सेवा संभालने वाले इन चार अस्पतालों में उपकरणों की कमी से लेकर तकनीशियनों तक की कमी है। पाटी तहसील मुख्यालय में एक्सरे मशीन है, लेकिन तकनीशियन का पद ही सृजित न होने के कारण वर्ष 2015 से लगी यह एक्सरे मशीन धूल फांक रही है।
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टांण और डांडा में दवाओं का अभाव
चंपावत। अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता पर जोर देने के बावजूद अगर दवा न मिल पाए, तो जिले के तीन शहरी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र हैं, लेकिन दूरदराज के इन स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की कमी भी इलाज के आड़े आ रही है। गांवों में जन औषधि केंद्र नहीं है। टांण, डांडा में अक्सर दवाओं की कमी रहती है। ऐसे में इन ग्रामीणों को न केवल दवा देर में मिलती है, बल्कि बाजार से महंगी ब्रांडेड दवा खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
देवीधुरा के अस्पताल में तीन ऑक्सीजन सिलिंडर और दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर होने के बावजूद जरूरत पड़ने पर इसके संचालन के लिए तकनीशियन उपलब्ध नहीं है। इससे परेशानी होती है। - ईश्वर सिंह बिष्ट, ग्राम प्रधान, देवीधुरा।
पाटी तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में दवाओं की अक्सर कमी बनी रहती है। इससे मुश्किल आती रहती है। लोग पाटी या दूसरी जगह से दवा मंगाने के लिए मजबूर होते हैं। - प्रकाश महरा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, देवीधुरा।
पाटी अस्पताल में एक्सरे तकनीशियन के लिए आउटसोर्स से प्रयास किया जा रहा है। दवाओं की कमी के लिए संबंधित अस्पताल को ब्लॉक या जिले के स्टोर से दवा खुद लेनी होती है। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
पाटी क्षेत्र के अस्पतालों के सुधार के प्रस्ताव को विधानसभा सत्र में लाया गया था। इसके बावजूद समस्या न सुलझने पर अब मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के सम्मुख मामला रखा जाएगा। - खुशाल सिंह अधिकारी, विधायक, लोहाघाट।
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इन चारों अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीन या ईसीजी जांच करने वाली मशीन भी नहीं है। उपकरण के नाम पर बस बुखार नापने के लिए थर्मामीटर, ब्लडप्रेशर मापने की मशीन (स्फाइगनोमैनो मीटर) हैं। सिर्फ देवीधुरा में दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, तीन ऑक्सीजन सिलिंडर हैं लेकिन इनके संचालन के लिए भी तकनीशियन नहीं हैं। देवीधुरा के डॉ. सक्षम दिगारी ही इमरजेंसी में इसका उपयोग कर मरीजों को राहत पहुंचाते हैं। ग्रामीण अस्पतालों में सिर्फ देवीधुरा में ही दवाओं की उपलब्धता रहती है। फार्मासिस्ट नवीन गोस्वामी, एएनएम पुष्पा सिंह बताती हैं कि यहां दवाओं की उपलब्धता तो पर्याप्त है, लेकिन परीक्षण की सुविधा न होने से इलाज में जरूर मुश्किल आती है। वहीं भिंगराड़ा, टांण पीएचसी, डांडा के एएनएम केंद्र की तस्वीर तो और भी बेहाल है। यहां इलाज से लेकर परीक्षण और दवा तक की हमेशा कमी रहती है।
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न उपकरण, न तकनीशियनों की तैनाती
चंपावत। पाटी तहसील की 23 हजार से अधिक आबादी की स्वास्थ्य सेवा संभालने वाले इन चार अस्पतालों में उपकरणों की कमी से लेकर तकनीशियनों तक की कमी है। पाटी तहसील मुख्यालय में एक्सरे मशीन है, लेकिन तकनीशियन का पद ही सृजित न होने के कारण वर्ष 2015 से लगी यह एक्सरे मशीन धूल फांक रही है।
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टांण और डांडा में दवाओं का अभाव
चंपावत। अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता पर जोर देने के बावजूद अगर दवा न मिल पाए, तो जिले के तीन शहरी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र हैं, लेकिन दूरदराज के इन स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की कमी भी इलाज के आड़े आ रही है। गांवों में जन औषधि केंद्र नहीं है। टांण, डांडा में अक्सर दवाओं की कमी रहती है। ऐसे में इन ग्रामीणों को न केवल दवा देर में मिलती है, बल्कि बाजार से महंगी ब्रांडेड दवा खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
देवीधुरा के अस्पताल में तीन ऑक्सीजन सिलिंडर और दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर होने के बावजूद जरूरत पड़ने पर इसके संचालन के लिए तकनीशियन उपलब्ध नहीं है। इससे परेशानी होती है। - ईश्वर सिंह बिष्ट, ग्राम प्रधान, देवीधुरा।
पाटी तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में दवाओं की अक्सर कमी बनी रहती है। इससे मुश्किल आती रहती है। लोग पाटी या दूसरी जगह से दवा मंगाने के लिए मजबूर होते हैं। - प्रकाश महरा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, देवीधुरा।
पाटी अस्पताल में एक्सरे तकनीशियन के लिए आउटसोर्स से प्रयास किया जा रहा है। दवाओं की कमी के लिए संबंधित अस्पताल को ब्लॉक या जिले के स्टोर से दवा खुद लेनी होती है। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
पाटी क्षेत्र के अस्पतालों के सुधार के प्रस्ताव को विधानसभा सत्र में लाया गया था। इसके बावजूद समस्या न सुलझने पर अब मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के सम्मुख मामला रखा जाएगा। - खुशाल सिंह अधिकारी, विधायक, लोहाघाट।