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डॉक्टरों के लिए घर नहीं, बनाने के लिए रुपये नहीं

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2020 11:16 PM IST
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No home for doctors, no money to build
आठ साल से लटके चंपावत जिला अस्पताल के आवासीय भवन। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। अच्छे इलाज के लिए प्रयासरत जिला अस्पताल के डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ के लिए न्यूनतम सुविधाएं भी जरूरी हैं। लेकिन यहां तो स्वास्थ्य कर्मी रहने के लिए सरकारी आवास को भी तरस गए हैं। अधूरे बने भवनों को पूरा करने के लिए सरकार के पास बजट नहीं है। इसके चलते आठ साल से इन आवासीय भवनों का काम भी अधर में लटका है। नतीजा यह हो रहा है कि काम में देरी तो हो ही रही है, इन्हें बनाने की लागत भी 3.53 करोड़ रुपये बढ़ गई है।
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जिला अस्पताल में इस वक्त 27 डॉक्टरों सहित 100 से अधिक कर्मी हैं। लेकिन इनमें से चार को छोड़ किसी के पास भी सरकारी आवास का इंतजाम नहीं है। 2009 से शुरू निर्माण कार्य 2012 से बंद है। कलोनी का निर्माण अधूरा रहने से आवासीय व्यवस्था अस्पताल परिसर में नहीं हो पा रही है। कार्यदाई संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम का कहना है कि 4.01 करोड़ से बनने वाली आवासीय कलोनी की लागत बढ़कर 7.54 करोड़ हो चुकी है। लेकिन अब तक जिला और राज्य योजना से कुल 2.30 करोड़ ही मिल सके हैं। काम शुरू कराने के लिए बकाया रकम की मांग की गई है। लंबे समय से काम बंद होने से पुराना निर्माण भी जीर्णशीर्ण हो रहा है।
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आपात सेवाओं पर भी पड़ता है असर
आवास की व्यवस्था न होने से डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को एक से चार किमी दूर तक किराये के मकान में रहना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि इस वजह से असुविधा तो हो ही रही है, साथ ही आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।
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कोट
अधूरे पड़े आवास के लिए 3.25 करोड़ रुपये के बजट की मांग की गई है। इसे लेकर स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजा गया है। काम में देरी की वजह से असुविधा होने के साथ लागत भी बढ़ रही है।
डॉ. आरपी खंडूरी,
सीएमओ, चंपावत। (13 सीपीटी 03पी)
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