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डामर के इंतजार में थक गईं 30 हजार आंखें
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डामरीकरण के इंतजार में सूखीढांग-डांडा-मीडार सड़क। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। सूखीढांग-डांडा-मीडार (एसडीएम) सड़क पर डामरीकरण का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। सड़क की कटिंग पूरी होने के साढ़े पांच साल बाद ये तस्वीर है। इस वजह से सड़क से लगे 21 गांवों के पंद्रह हजार से अधिक ग्रामीणों के अलावा रीठा साहिब गुरुद्वारा आवाजाही करने वाले सिख श्रद्धालुओं को झटकों के बीच यहां से गुजरना पड़ता है।
56 किमी लंबी एसडीएम सड़क की कटिंग दिसंबर 2016 में पंद्रह करोड़ रुपये से पूरी हुई थी। सड़क बनने से टनकपुर से प्रसिद्ध सिख तीर्थस्थल रीठा साहिब की दूरी चंपावत होकर 150 किमी से 70 किमी कम होकर मात्र 80 किमी रह गई। साथ ही इससे 21 गांवों के पंद्रह हजार से अधिक लोगों को लाभ मिला। इन गांवों में सूखीढांग, गेरलेख, चौड़ाकोट, धूरा, पातल, मथियाबांज, तलियाबांज, बकोरिया, बुड़म, कल्लाड़, डांडा, कठौती, ककनई की धार, मल्ली टांण, तल्ली टांण, साल, मछियाड़, तलाड़ी, कुल्यालगांव, चौड़ामेहता, रीठा साहिब शामिल हैं।
आवाजाही पैदल मार्ग से तो जरूर बेहतर हुई लेकिन 30 किमी सड़क पर डामर न होने से परेशानी अब भी बनी है। सड़क के महत्व को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 28 फरवरी 2020 में चंपावत दौरे पर डामरीकरण करने का एलान किया था लेकिन दो साल और चार माह से अधिक समय होने के बावजूद डामर का काम शुरू नहीं हो सका है। इससे सड़क का पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। आवाजाही भी सुगम और सुरक्षित नहीं है।
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शासन में लटका है डामरीकरण का प्रस्ताव
चंपावत। एसडीएम सड़क पर डामरीकरण का मामला लंबे समय तक लोनिवि और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के बीच उलझा रहा। अब लोनिवि को सड़क की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लोनिवि के ईई विभोर गुप्ता ने बताया कि 30 किमी सड़क का दो पैकेज में डामर किया जाना प्रस्तावित है। पांच किमी के पहले पहला प्रस्ताव के लिए तीन करोड़ रुपये मांगे गए हैं जबकि 25 किमी के दूसरे प्रस्ताव के लिए पंद्रह करोड़ रुपये की जरूरत होगी। फिलहाल ये दोनों ही प्रस्ताव शासन में लटके हैं।
इस साल 14 लोगों की जान ले चुकी है यह सड़क
चंपावत। एसडीएम सड़क की बदहाली असुविधाजनक ही नहीं जानलेवा भी हो रही है। इस सड़क पर इस साल 21 फरवरी को ककनई के पास ढेकाढुंगा में जीप के खाई में गिरने से 14 लोगों की मौत हो गई थी।
डामर न होने से ये हो रहा नुकसान
ढाई घंटे के बजाय एसडीएम सड़क पर सफर में चार घंटे लगते हैं।
कच्ची सड़क होने से दो सौ के बजाय किराया तीन सौ पचास रुपये है।
आवाजाही असुविधाजनक और असुरक्षित है।
आपात चिकित्सा सेवा 108 का संचालन नहीं हो पा रहा।
जीप-टैक्सियों के रखरखाव से लेकर ईंधन पर खर्च अधिक।
कृषि उत्पादों के भाड़े में कम नहीं हो रहा खर्च।
डामर न होने से एसडीएम सड़क का लाभ अधूरा है। कृषि उपज को मंडी तक पहुंचाना कठिन भी हो रहा और अधिक खर्चीला भी। -शेखर पंत, कठौती।
पांच साल से अधिक समय से लटके डामर का क्षेत्र के उपजाऊ ग्रामीण इलाकों के विकास, सेहत, कारोबार और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है। -शंकर जोशी, सूखीढांग।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की आपत्ति के बाद लोनिवि को इस सड़क के डामरीकरण का जिम्मा सौंपा गया है। डामरीकरण के लिए दो प्रस्ताव भेजे गए हैं। अभी इन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली है। स्वीकृति के बाद डामरीकरण की कार्रवाई की जाएगी। -विभोर गुप्ता, ईई, लोनिवि, चंपावत खंड।
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56 किमी लंबी एसडीएम सड़क की कटिंग दिसंबर 2016 में पंद्रह करोड़ रुपये से पूरी हुई थी। सड़क बनने से टनकपुर से प्रसिद्ध सिख तीर्थस्थल रीठा साहिब की दूरी चंपावत होकर 150 किमी से 70 किमी कम होकर मात्र 80 किमी रह गई। साथ ही इससे 21 गांवों के पंद्रह हजार से अधिक लोगों को लाभ मिला। इन गांवों में सूखीढांग, गेरलेख, चौड़ाकोट, धूरा, पातल, मथियाबांज, तलियाबांज, बकोरिया, बुड़म, कल्लाड़, डांडा, कठौती, ककनई की धार, मल्ली टांण, तल्ली टांण, साल, मछियाड़, तलाड़ी, कुल्यालगांव, चौड़ामेहता, रीठा साहिब शामिल हैं।
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आवाजाही पैदल मार्ग से तो जरूर बेहतर हुई लेकिन 30 किमी सड़क पर डामर न होने से परेशानी अब भी बनी है। सड़क के महत्व को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 28 फरवरी 2020 में चंपावत दौरे पर डामरीकरण करने का एलान किया था लेकिन दो साल और चार माह से अधिक समय होने के बावजूद डामर का काम शुरू नहीं हो सका है। इससे सड़क का पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। आवाजाही भी सुगम और सुरक्षित नहीं है।
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शासन में लटका है डामरीकरण का प्रस्ताव
चंपावत। एसडीएम सड़क पर डामरीकरण का मामला लंबे समय तक लोनिवि और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के बीच उलझा रहा। अब लोनिवि को सड़क की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लोनिवि के ईई विभोर गुप्ता ने बताया कि 30 किमी सड़क का दो पैकेज में डामर किया जाना प्रस्तावित है। पांच किमी के पहले पहला प्रस्ताव के लिए तीन करोड़ रुपये मांगे गए हैं जबकि 25 किमी के दूसरे प्रस्ताव के लिए पंद्रह करोड़ रुपये की जरूरत होगी। फिलहाल ये दोनों ही प्रस्ताव शासन में लटके हैं।
इस साल 14 लोगों की जान ले चुकी है यह सड़क
चंपावत। एसडीएम सड़क की बदहाली असुविधाजनक ही नहीं जानलेवा भी हो रही है। इस सड़क पर इस साल 21 फरवरी को ककनई के पास ढेकाढुंगा में जीप के खाई में गिरने से 14 लोगों की मौत हो गई थी।
डामर न होने से ये हो रहा नुकसान
ढाई घंटे के बजाय एसडीएम सड़क पर सफर में चार घंटे लगते हैं।
कच्ची सड़क होने से दो सौ के बजाय किराया तीन सौ पचास रुपये है।
आवाजाही असुविधाजनक और असुरक्षित है।
आपात चिकित्सा सेवा 108 का संचालन नहीं हो पा रहा।
जीप-टैक्सियों के रखरखाव से लेकर ईंधन पर खर्च अधिक।
कृषि उत्पादों के भाड़े में कम नहीं हो रहा खर्च।
डामर न होने से एसडीएम सड़क का लाभ अधूरा है। कृषि उपज को मंडी तक पहुंचाना कठिन भी हो रहा और अधिक खर्चीला भी। -शेखर पंत, कठौती।
पांच साल से अधिक समय से लटके डामर का क्षेत्र के उपजाऊ ग्रामीण इलाकों के विकास, सेहत, कारोबार और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है। -शंकर जोशी, सूखीढांग।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की आपत्ति के बाद लोनिवि को इस सड़क के डामरीकरण का जिम्मा सौंपा गया है। डामरीकरण के लिए दो प्रस्ताव भेजे गए हैं। अभी इन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली है। स्वीकृति के बाद डामरीकरण की कार्रवाई की जाएगी। -विभोर गुप्ता, ईई, लोनिवि, चंपावत खंड।