{"_id":"6133bd638ebc3ec36e6e1b23","slug":"new-meeting-hall-in-champawat-champawat-news-hld436844648","type":"story","status":"publish","title_hn":"2008 में मंजूर, 2011 में काम शुरू और 2021 में पूरा हुआ प्रेक्षागृह भवन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
2008 में मंजूर, 2011 में काम शुरू और 2021 में पूरा हुआ प्रेक्षागृह भवन
विज्ञापन
चंपावत का ऑडोटोरियम।
- फोटो : CHAMPAWAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत। इस साल नवरात्र में चंपावत जिले को नई सौगात मिलेगी। जिले का पहला प्रेक्षागृह (ऑडिटोरियम) गोरलचौड़ मैदान के पास बनकर तैयार हो गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा यह भवन कई अन्य जरूरतों को पूरा करेगा। 233.50 लाख रुपये से बना यह भवन सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा कई अन्य जरूरतों को पूरा करेगा। बजट मिलने में देरी से इस भवन के पूरा होने में आठ साल अधिक लगे।
चंपावत जिले के नागरिक बीते डेढ़ दशक से प्रेक्षागृह की मांग करते रहे थे। संस्कृति विभाग ने 2008 में प्रेक्षागृह को मंजूरी दी, लेकिन काम तीन साल बाद 2011 से शुरू हुआ। संस्कृति निदेशालय से मिले 1.89 करोड़ रुपये खत्म होने के बाद 2015 से काम बंद हो गया। पूरे पांच साल बाद काम बंद होने के बाद पिछले साल धन अवमुक्त होने से आगे का काम शुरू हो सका है।
कार्यदायी संस्था सीएनडीएस के एएई कन्हैया कुमार का कहना है कि चहारदीवारी, फर्श, प्लास्टर, रंगाई-पुताई आदि का बकाया काम जिला योजना से मिले 74.50 लाख रुपये से पूरा करा लिया गया है। कुमार का कहना है कि प्रेक्षागृह के निर्माण कार्य को पूरा करने के साथ ही 200 सीटें लगा ली गई है। अब सिर्फ अग्निसुरक्षा के उपकरण लगाना बाकी है।
विज्ञापन
सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बहुउपयोगी होगा प्रेक्षागृह
चंपावत। चंपावत जिले का यह खूबसूरत भवन सिर्फ सांस्कृतिक कार्यों के लिए उपयोग में नहीं आएगा, बल्कि इसका कई और उपयोग होंगे। गोरलचौड़ मैदान के पास स्थिति प्रेक्षागृह बहुउद्देश्यीय रूप में होगा इसमें बैठक, सेमिनार, चुनाव संबंधी प्रशिक्षण सहित कई कार्यक्रम भी होंगे।
विज्ञापन
चंपावत जिले के नागरिक बीते डेढ़ दशक से प्रेक्षागृह की मांग करते रहे थे। संस्कृति विभाग ने 2008 में प्रेक्षागृह को मंजूरी दी, लेकिन काम तीन साल बाद 2011 से शुरू हुआ। संस्कृति निदेशालय से मिले 1.89 करोड़ रुपये खत्म होने के बाद 2015 से काम बंद हो गया। पूरे पांच साल बाद काम बंद होने के बाद पिछले साल धन अवमुक्त होने से आगे का काम शुरू हो सका है।
विज्ञापन
कार्यदायी संस्था सीएनडीएस के एएई कन्हैया कुमार का कहना है कि चहारदीवारी, फर्श, प्लास्टर, रंगाई-पुताई आदि का बकाया काम जिला योजना से मिले 74.50 लाख रुपये से पूरा करा लिया गया है। कुमार का कहना है कि प्रेक्षागृह के निर्माण कार्य को पूरा करने के साथ ही 200 सीटें लगा ली गई है। अब सिर्फ अग्निसुरक्षा के उपकरण लगाना बाकी है।
विज्ञापन
सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बहुउपयोगी होगा प्रेक्षागृह
चंपावत। चंपावत जिले का यह खूबसूरत भवन सिर्फ सांस्कृतिक कार्यों के लिए उपयोग में नहीं आएगा, बल्कि इसका कई और उपयोग होंगे। गोरलचौड़ मैदान के पास स्थिति प्रेक्षागृह बहुउद्देश्यीय रूप में होगा इसमें बैठक, सेमिनार, चुनाव संबंधी प्रशिक्षण सहित कई कार्यक्रम भी होंगे।