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Champawat News: बुनियाद में कमी से घटी डिप्टेश्वर झील की लागत
Mon, 17 Jul 2023 01:09 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 17 Jul 2023 01:09 AM IST
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कोलीढेक झील में नौकायन का लुत्फ उठाते सैलानी। संवाद
चंपावत। डिप्टेश्वर झील की बुनियाद को 40 प्रतिशत कम किया जाएगा। बुनियाद की ऊंचाई पर आईआईटी रुड़की की आपत्ति के बाद सिंचाई विभाग ने ये कदम उठाया है। ऊंचाई में कमी करने से लागत में भी 30 प्रतिशत की कमी आएगी। संशोधित प्रस्ताव और आगणन को सिंचाई विभाग के खंड कार्यालय से मुख्यालय भेज दिया गया है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वर्ष 2017 में डिप्टेश्वर झील बनाने की घोषणा की थी। आईआईटी रुड़की ने इस साल की शुरुआत में झील की 19 मीटर गहरी बुनियाद में 40 प्रतिशत कम करने की अनुशंसा की थी। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तावित झील की डिजाइन का फिर से परीक्षण करा झील की बुनियादी में कमी की।
इससे डेढ़ किमी लंबी, 30 मीटर चौड़ी और 15 मीटर गहरी झील के निर्माण की लागत में भी 30 प्रतिशत की कमी आएगी। झील का निर्माण मुख्य रूप से गंडकी नदी के आसपास होगा। निर्माण और जमीन के मुआवजे के लिए तिरपन करोड़ सड़सठ लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार कर सिंचाई विभाग मुख्यालय भेजा गया है। पहले ये राशि उनहत्तर करोड़ रुपये थी। संवाद
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डिप्टेश्वर झील से ये होंगे लाभ
रोजगार, स्वरोजगार के मौके बढ़ेंगे।
पर्यटन, सिंचाई, जल संरक्षण में मदद।
भविष्य में पेयजल आपूर्ति का विकल्प भी रहेगा।
जिले में है एक झील
चंपावत। चंपावत जिले में अभी एक झील है। तीस करोड़ छिहत्तर लाख रुपये से बनी डेढ़ किमी लंबी लोहाघाट की कोलीढेक झील पर्यटन प्रोत्साहन के साथ ही नौकायन के जरिये रोजगार भी दे रही है। इससे लोहाघाट के लिए पेयजल योजना भी प्रस्तावित की गई है।
आईआईटी की अनुशंसा के आधार पर डिप्टेश्वर झील की बुनियाद को कम किया गया। इसके बाद झील का प्रस्ताव और आगणन संशोधित कर सिंचाई विभाग मुख्यालय भेजा गया है। झील के निर्माण और मुआवजे के लिए तिरपन करोड़ सड़सठ लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। - बीबी पांडेय, प्रभारी ईई, सिंचाई विभाग, लोहाघाट।
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तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वर्ष 2017 में डिप्टेश्वर झील बनाने की घोषणा की थी। आईआईटी रुड़की ने इस साल की शुरुआत में झील की 19 मीटर गहरी बुनियाद में 40 प्रतिशत कम करने की अनुशंसा की थी। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तावित झील की डिजाइन का फिर से परीक्षण करा झील की बुनियादी में कमी की।
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इससे डेढ़ किमी लंबी, 30 मीटर चौड़ी और 15 मीटर गहरी झील के निर्माण की लागत में भी 30 प्रतिशत की कमी आएगी। झील का निर्माण मुख्य रूप से गंडकी नदी के आसपास होगा। निर्माण और जमीन के मुआवजे के लिए तिरपन करोड़ सड़सठ लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार कर सिंचाई विभाग मुख्यालय भेजा गया है। पहले ये राशि उनहत्तर करोड़ रुपये थी। संवाद
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डिप्टेश्वर झील से ये होंगे लाभ
रोजगार, स्वरोजगार के मौके बढ़ेंगे।
पर्यटन, सिंचाई, जल संरक्षण में मदद।
भविष्य में पेयजल आपूर्ति का विकल्प भी रहेगा।
जिले में है एक झील
चंपावत। चंपावत जिले में अभी एक झील है। तीस करोड़ छिहत्तर लाख रुपये से बनी डेढ़ किमी लंबी लोहाघाट की कोलीढेक झील पर्यटन प्रोत्साहन के साथ ही नौकायन के जरिये रोजगार भी दे रही है। इससे लोहाघाट के लिए पेयजल योजना भी प्रस्तावित की गई है।
आईआईटी की अनुशंसा के आधार पर डिप्टेश्वर झील की बुनियाद को कम किया गया। इसके बाद झील का प्रस्ताव और आगणन संशोधित कर सिंचाई विभाग मुख्यालय भेजा गया है। झील के निर्माण और मुआवजे के लिए तिरपन करोड़ सड़सठ लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। - बीबी पांडेय, प्रभारी ईई, सिंचाई विभाग, लोहाघाट।