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खेल नहीं, खिलवाड़: न खेलने वाले, न सीखने वाले फिर भी बना डाला टेनिस कोर्ट

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 19 Nov 2020 10:54 PM IST
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Neither coach nor player, how clumsy to build tennis courts
नबसा जीजीआईसी में 12 लाख रुपये से बना लॉन टेनिस कोटऱ। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत/बनबसा। बनबसा जीजीआईसी में 12 लाख की लागत से बने लॉन टेनिस कोर्ट को देखकर शिक्षा विभाग को शाबासी दें कि अपना माथा पीटे ये समझ में नहीं आ रहा है। दरअसल इस खेल का न यहां कोच है और न ही इसे खेलने वाले खिलाड़ी ऐसे में लाखों रुपये की लागत से कोर्ट तैयार करना समझ से परे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि लॉन टेनिस का कोर्ट खेल विभाग के पास भी नहीं है। लोगों का कहना है कि शिक्षा विभाग का प्रयास अच्छा तब कहा जाता अगर इसके कोच और इसे खेलने वाले खिलाड़ी होते पर ऐसा है नहीं। और तो और यहां पढ़ाई के लिए पर्याप्त कमरे तक नहीं हैं।
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90 छात्राओं वाले बनबसा जीजीआईसी में महज चार कमरे हैं। इनमें दो कमरे कार्यालय और दो कमरों में कक्षाएं चलती हैं, लेकिन इसी परिसर में 12 लाख रुपये से एक ऐसा कोर्ट बना दिया गया, जिसका कभी उपयोग ही नहीं हुआ। बीएडीपी से 2017-18 में 78 फीट लंबा और 27 फीट चौड़ा लॉन टेनिस कोर्ट बना दिया गया। कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता केके जोशी का कहना है कि 2019 के शुरू में कोर्ट का निर्माण कर स्कूल को हस्तांतरित कर दिया गया, लेकिन इस कोर्ट में कभी टेनिस नहीं खेला गया। इसमें न तो नेट है और न स्टैंड। छात्राओं का कहना है कि खेलना तो दूर, लॉन टेनिस की बुनियादी जानकारी तक उन्हें नहीं है।
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प्रधानाचार्या गीता चंद का कहना है कि इस कोर्ट के लिए कॉलेज की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं गया था और न ही इस खेल को सिखाने वाला कोई है। अभिभावक संघ के पूर्व अध्यक्ष गोपाल राम का कहना है कि टेनिस कोर्ट की अभिभावकों या प्रबंधन समिति ने कभी मांग नहीं की। ऐसे में इसका निर्माण फिजूलखर्ची है।
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70 प्रतिशत स्कूलों में पीटीआई भी नहीं
चंपावत। जिले के 104 राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में से 60 प्रतिशत स्कूलों में खेल मैदान नहीं है। 70 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में खेलों प्रशिक्षण के लिए पीटीआई भी नहीं है। सीईओ आरसी पुरोहित का कहना है कि प्रशिक्षक, रैकेट और बॉल न होने से टेनिस कोर्ट का उपयोग मुमकिन नहीं है। इस बात का पता लगा जाएगा कि बीएडीपी के जरिये टेनिस कोर्ट किसके प्रस्ताव पर बनाया गया। ब्यूरो
न तो कॉलेज की ओर से और न क्षेत्र के लोगों ने कभी भी टेनिस कोर्ट की मांग की। कॉलेज की जरूरत अतिरिक्त कमरों की थी ताकि छात्राओं की पढ़ाई के लिए पर्याप्त जगह हो सकी है। - पुष्कर दत्त कापड़ी, सदस्य, जिला पंचायत, बनबसा।

शिक्षा विभाग के पास लॉन टेनिस सीखाने के लिए प्रशिक्षक नहीं है और न ही उनकी ओर से कभी खेल विभाग से प्रशिक्षक देने के लिए आग्रह भी नहीं किया गया। ऐसे में बनबसा जीजीआईसी में बना टेनिस कोर्ट किसी उपयोग में नहीं आ रहा है। टेनिस का रैकेट और बॉल भी महंगी है।
- आरएस धामी, जिला क्रीड़ाधिकारी।
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