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एनीमिया की समस्या से जूझ रही हैं अधिकांश छात्राएं

Thu, 25 May 2017 10:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत Updated Thu, 25 May 2017 10:44 PM IST
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 जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (पूर्व में चिरायु) संचालित होने के बावजूद अधिकांश स्कूलों की छात्राएं एनीमिया (रक्त अल्पता) की समस्या से जूझ रही हैं। बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत हर साल स्कूलों में दो बार छात्र-छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। बीते दिनों जिला प्रशासन के निर्देश पर विभिन्न स्कूलों में अध्ययनरत छात्राओं के हीमोग्लोबिन का परीक्षण कराया गया तो अधिकांश छात्राएं रक्त अल्पता यानि एनीमिया का शिकार पाई गई। इनके हीमोग्लोबिन का स्तर आठ और इससे भी कम पाया गया।

उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.रश्मि पंत का कहना है कि एनीमिया आयरन और फोलिक एसिड की कमी से होता है। इसलिए बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्कूलों में प्राथमिक उपचार आयरन और फोलिक एसिड की औषधि से किया जाता है। उनका कहना है कि छात्र-छात्राओं में कुछ प्रकार के रोग बेहद आम हैं। जिनमें दांत, कान, आंख, हृदय संबंधी और स्वांस संबंधी रोग शामिल हैं। यदि इन रोगों की शुरूआत में ही पहचान कर ली जाए तो उसका उपचार संभव है। इन परेशानियों की शुरूआती जांच और उपचार से रोग को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। जिससे अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत नहीं आती और बच्चों के स्कूल जाने की गति में सुधार होता है।
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डीएम डॉ.अहमद इकबाल के अनुसार बाल मृत्यु दर में कमी लाने के लिए बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों की जांच एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके दायरे में अब जन्म से लेकर 18 वर्ष की आयु तक के बच्चों को शामिल किया गया है। सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा एक से 12वीं तक में पढ़ने वाले 18 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी झुग्गी बस्तियों में रहने बच्चों को इसमें शामिल किया गया है।
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पोषण संबंधी कमियों से होते हैं विकार
चंपावत। उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.रश्मि पंत के अनुसार पोषण संबंधी विभिन्न कमियों की वजह से स्कूल जाने से पूर्व अवस्था के चार से 70 प्रतिशत बच्चे विभिन्न प्रकार के विकारों से ग्रस्त होते हैं। यदि इन पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो यह स्थायी विकलांगता का रूप धारण कर सकते हैं।


चार वर्षों में एनीमिया पीड़ित बच्चों की संख्या
वर्ष       स्कूलों में परीक्षण    आंगनबाड़ी केंद्र में परीक्षण   एनीमिया पीड़ित
2014       41201             6017                     119    
2015       35301             13452                    551
2016       31927             14171                    804

2017       35503             15367                    464
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