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आधुनिक तकनीक से कटिंग में भी महफूज नहीं पहाड़
अमर उजाला ब्यूूूूराे टनकपुर (चंपावत)।
Updated Thu, 04 Jan 2018 10:56 PM IST
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बुधवार को हुई दुर्घटना स्थल पर पहाड़ी काटकर बनाई जा रही सड़क।
- फोटो : अमर उजाला
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आधुनिक तकनीक के प्रयोग से कटिंग करने में भी पहाड़ महफूज नहीं हैं। टनकपुर-जौलजीबी सड़क निर्माण के लिए आधुनिक तकनीक से ड्रिल कर पहाड़ी काटी जा रही है बावजूद इसके वह दरक गई और हादसा हो गया। पहाड़ी दरकने से बुधवार को हुए हादसे की जांच में भी इस बात की पुष्टि हुई कि पहाड़ी को काटने के लिए विस्फोट नहीं किया गया था।
बुधवार को निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग के दूसरे चरण के निर्माण कार्य के अंतर्गत मां पूर्णागिरि धाम के चरण मंदिर के पास काटी जा रही अंग्रेज चट्टान अचानक दरक गई। इसके मलबे की चपेट आकर ठेकेदार कंपनी के सुपरवाइजर समेत दो लोगों की मौत हो गई और तीन श्रमिक घायल हो गए। हादसे के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी घटना स्थल पर श्रमिकों के चेहरों पर भय साफ नजर आया। कार्यदायी विभाग पीआईयू के अधिशासी अभियंता बीसी पंत के नेतृत्व में जेई बीएस पोखरिया एवं अन्य अभियंताओं की टीम सुबह से ही घटनास्थल पर मौजूद रही। उन्होंने सावधानी से निर्माण कार्य आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। अभियंताओं ने कहा कि पहाड़ी काटने को विस्फोटक काप्रयोग करने की बात गलत है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार ड्रिल मशीन से छेद बनाकर उसमें केमिकल डालकर पहाड़ियों को चटका कर तोड़ा जा रहा है। कार्यदायी विभाग पीआईयू (परियोजना क्रियान्वयन इकाई) के अधिकारियों, ठेकेदार कंपनी के मौके पर काम कर रहे मजदूरों ने भी पहाड़ी काटने के लिए विस्फोट के प्रयोग से इनकार किया है। घटना स्थल पर अधिशासी अभियंता पंत ने बताया कि चट्टान में ड्रिल करने पर मलबा तो आया, लेकिन अंदर से उसका धीरे-धीरे खिसकना जारी रहा। हादसे के समय घटना स्थल पर काम नहीं किया जा रहा था। अचानक दरकी पहाड़ी के मलबे की चपेट में आए श्रमिक इस खतरे को नहीं भांप पाए, जबकि इससे पूर्व भी मार्ग के दायरे में आई सख्त चट्टानों को इसी तरह काटा गया, लेकिन कभी ऐसा हादसा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि ठेकेदार कंपनी को श्रमिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इधर कोतवाल अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि मामले की जांच में विस्फोट किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। मौके से बरामद किया गया पाउडर क्रैकामाइट था, जिसे चट्टान में भरकर पहाड़ी को चटकाया जाता है। जांच के बाद ठेकेदार कंपनी को पाउडर लौटा दिया गया है। कोतवाल ने बताया कि फिलहाल हादसे को लेकर किसी ने रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। यदि कोई तहरीर देगा को मुकदमा करने कार्रवाई की जाएगी।
मृतक श्रमिक के परिजन पहुंचे, शव सौंपा
टनकपुर। दरकी पहाड़ी के मलबे की चपेट में आकर जान गंवा चुके हिमाचल निवासी श्रमिक राजेश के पिता तिलकराज व उसका भाई बृहस्पतिवार को यहां पहुंचे। उन्होंने घटना के बारे में जानकारी लेने के बाद किसी तरह की कार्रवाई न करने की बात कही। राजेश के पिता का कहना था कि उनका बेटा हादसे का शिकार हुआ है, जो किसी के भी साथ हो सकता था। ऐसे में किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
श्रमिकों ने कहा, नहीं किया गया था विस्फोट
टनकपुर। रॉक ब्रेकर मशीन के चालक बागेश्वर निवासी लोकमान सिंह उर्फ ललित ने बताया कि हादसे के वक्त घटना स्थल पर काम नहीं हो रहा था और न ही विस्फोट किया गया। उसने बताया कि लंच का समय होने पर श्रमिक भोजन के लिए अपने ठिकानों पर जा रहे थे। मलबे की चपेट में आए श्रमिक काटी गई पहाड़ी के बीच होकर गुजर रहे थे कि चट्टान दरक कर उनके ऊपर गिर गई। यदि वे चट्टान के बीच से होकर नहीं बल्कि दाहिने तरफ के रास्ते से जाते तो दरकी पहाड़ी की चपेट में नहीं आते। श्रमिक बिहार निवासी नरेश पासवान ने बताया कि घटना के समय वह मृतक राजेश के साथ ही था और मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बचा। उसने बताया कि वह नजदीक से जाने के चक्कर में काटी गई पहाड़ी के बीच से अपने ठिकाने पर जा रहे थे और हादसा हो गया। उसने पहाड़ी काटने को विस्फोट किए जाने से इंकार किया।
बुधवार को निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग के दूसरे चरण के निर्माण कार्य के अंतर्गत मां पूर्णागिरि धाम के चरण मंदिर के पास काटी जा रही अंग्रेज चट्टान अचानक दरक गई। इसके मलबे की चपेट आकर ठेकेदार कंपनी के सुपरवाइजर समेत दो लोगों की मौत हो गई और तीन श्रमिक घायल हो गए। हादसे के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी घटना स्थल पर श्रमिकों के चेहरों पर भय साफ नजर आया। कार्यदायी विभाग पीआईयू के अधिशासी अभियंता बीसी पंत के नेतृत्व में जेई बीएस पोखरिया एवं अन्य अभियंताओं की टीम सुबह से ही घटनास्थल पर मौजूद रही। उन्होंने सावधानी से निर्माण कार्य आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। अभियंताओं ने कहा कि पहाड़ी काटने को विस्फोटक काप्रयोग करने की बात गलत है।
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जांच रिपोर्ट के अनुसार ड्रिल मशीन से छेद बनाकर उसमें केमिकल डालकर पहाड़ियों को चटका कर तोड़ा जा रहा है। कार्यदायी विभाग पीआईयू (परियोजना क्रियान्वयन इकाई) के अधिकारियों, ठेकेदार कंपनी के मौके पर काम कर रहे मजदूरों ने भी पहाड़ी काटने के लिए विस्फोट के प्रयोग से इनकार किया है। घटना स्थल पर अधिशासी अभियंता पंत ने बताया कि चट्टान में ड्रिल करने पर मलबा तो आया, लेकिन अंदर से उसका धीरे-धीरे खिसकना जारी रहा। हादसे के समय घटना स्थल पर काम नहीं किया जा रहा था। अचानक दरकी पहाड़ी के मलबे की चपेट में आए श्रमिक इस खतरे को नहीं भांप पाए, जबकि इससे पूर्व भी मार्ग के दायरे में आई सख्त चट्टानों को इसी तरह काटा गया, लेकिन कभी ऐसा हादसा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि ठेकेदार कंपनी को श्रमिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इधर कोतवाल अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि मामले की जांच में विस्फोट किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। मौके से बरामद किया गया पाउडर क्रैकामाइट था, जिसे चट्टान में भरकर पहाड़ी को चटकाया जाता है। जांच के बाद ठेकेदार कंपनी को पाउडर लौटा दिया गया है। कोतवाल ने बताया कि फिलहाल हादसे को लेकर किसी ने रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। यदि कोई तहरीर देगा को मुकदमा करने कार्रवाई की जाएगी।
मृतक श्रमिक के परिजन पहुंचे, शव सौंपा
टनकपुर। दरकी पहाड़ी के मलबे की चपेट में आकर जान गंवा चुके हिमाचल निवासी श्रमिक राजेश के पिता तिलकराज व उसका भाई बृहस्पतिवार को यहां पहुंचे। उन्होंने घटना के बारे में जानकारी लेने के बाद किसी तरह की कार्रवाई न करने की बात कही। राजेश के पिता का कहना था कि उनका बेटा हादसे का शिकार हुआ है, जो किसी के भी साथ हो सकता था। ऐसे में किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
श्रमिकों ने कहा, नहीं किया गया था विस्फोट
टनकपुर। रॉक ब्रेकर मशीन के चालक बागेश्वर निवासी लोकमान सिंह उर्फ ललित ने बताया कि हादसे के वक्त घटना स्थल पर काम नहीं हो रहा था और न ही विस्फोट किया गया। उसने बताया कि लंच का समय होने पर श्रमिक भोजन के लिए अपने ठिकानों पर जा रहे थे। मलबे की चपेट में आए श्रमिक काटी गई पहाड़ी के बीच होकर गुजर रहे थे कि चट्टान दरक कर उनके ऊपर गिर गई। यदि वे चट्टान के बीच से होकर नहीं बल्कि दाहिने तरफ के रास्ते से जाते तो दरकी पहाड़ी की चपेट में नहीं आते। श्रमिक बिहार निवासी नरेश पासवान ने बताया कि घटना के समय वह मृतक राजेश के साथ ही था और मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बचा। उसने बताया कि वह नजदीक से जाने के चक्कर में काटी गई पहाड़ी के बीच से अपने ठिकाने पर जा रहे थे और हादसा हो गया। उसने पहाड़ी काटने को विस्फोट किए जाने से इंकार किया।