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गुम हो गई गुमदेश उप तहसील, कर्मियों की कमी पड़ रही भारी
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नेपाल सीमा की मंच उप तहसील में चार साल से लटका ताला।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे गुमदेश उप तहसील 67 महीने बाद भी अस्तित्व में नहीं आ सकी है। उप तहसील संचालित न होने का कारण कोई तकनीकी न होकर कर्मियों की कमी है। इस वजह से गुमदेश के लोगों को तहसील संबंधी काम के लिए लोहाघाट जाना पड़ रहा है।
नेपाल सीमा से लगे गुमदेश क्षेत्र की 41 ग्राम पंचायतों की करीब 35 हजार की आबादी के लिए जून 2015 में पृथक उप तहसील की राजाज्ञा जारी हुई थी। किमतोली के राजस्व गांव गुरेली (खालगढ़) को इस उप तहसील के मुख्यालय के रूप में मंजूरी मिली, लेकिन उप तहसील का संचालन शुरू नहीं हो सका। ऐसे में नेपाल के सीमावर्ती लोगों को खतौनी की नकल, आधार कार्ड, स्थायी निवास, जाति, आय प्रमाणपत्र के साथ जरूरी दस्तावेज बनाने के 39 किमी दूर लोहाघाट जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। गुमदेश विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष माधो सिंह अधिकारी के नेतृत्व में क्षेत्र के कई लोग उप तहसील संचालन के लिए कई बार आवाज उठा चुके हैं, लेकिन तहसील शुरू नहीं हो सकी। कलक्ट्रेट के प्रभारी अधिकारी अनिल सिंह गर्ब्याल की ओर से 22 जनवरी को राजस्व परिषद को भेजे पत्र में उप तहसील का संचालन न होने की वजह राजस्व अधिकारियों और कर्मियों की कमी होना बताया गया है।
जनवरी 2017 से बंद है मंच उप तहसील
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए दिसंबर 2016 में खोली गई मंच उप तहसील का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। उप तहसील में न नायब तहसीलदार है और न ही कोई अन्य कर्मी। जनवरी 2017 से इसमें ताला लटका पड़ा है। उप तहसील खुलने से एक भी प्रमाणपत्र नहीं बन सका है। अगर इस उप तहसील का संचालन होता तो 14 ग्राम पंचायतों के आठ हजार से अधिक लोगों को राजस्व से संबंधित कार्यों के लिए 35 किमी दूर चंपावत नहीं जाना पड़ता। एडीएम टीएस मर्तोलिया का कहना है कि क्षेत्र में इंटरनेट नेटवर्क की दिक्कत होने के साथ ही स्टाफ की कमी के चलते उप तहसील का संचालन नहीं हो पा रहा है। (ब्यूरो)
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एक तहसीलदार के जिम्मे हैं चार तहसीलें
चंपावत। पांच तहसील वाले चंपावत जिले के पहाड़ी क्षेत्र में पांच तहसीलें हैं, लेकिन पहाड़ की तीन (लोहाघाट, पाटी और बाराकोट) तहसीलों में एक भी तहसीलदार नहीं है। इन तीनों तहसील की अतिरिक्त जिम्मेदारी चंपावत के तहसीलदार प्रियंका रानी के पास है। अधिकारियों की कमी से लोगों को जरूरी काम के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। (ब्यूरो)
कोट...
गुमदेश उप तहसील को जल्द से जल्द से संचालित कराने के लिए जरूरी स्टाफ की तैनाती का प्रयास किया जाएगा। अन्य तहसीलों के रिक्त पदों को भरने के लिए आवाज उठाई जाएगी। - पूरन सिंह फर्त्याल, विधायक, लोहाघाट।
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कांग्रेस के शासन में लोगों की सुविधा के लिए कई छोटी प्रशासनिक इकाइयां खोली गईं, लेकिन भाजपा सरकार ने उन्हें संचालित करने के बजाय बंद कर दिया। स्टाफ की कमी और अन्य दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाए।- हेमेश खर्कवाल, प्रदेश महामंत्री, कांग्रेस।
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नेपाल सीमा से लगे गुमदेश क्षेत्र की 41 ग्राम पंचायतों की करीब 35 हजार की आबादी के लिए जून 2015 में पृथक उप तहसील की राजाज्ञा जारी हुई थी। किमतोली के राजस्व गांव गुरेली (खालगढ़) को इस उप तहसील के मुख्यालय के रूप में मंजूरी मिली, लेकिन उप तहसील का संचालन शुरू नहीं हो सका। ऐसे में नेपाल के सीमावर्ती लोगों को खतौनी की नकल, आधार कार्ड, स्थायी निवास, जाति, आय प्रमाणपत्र के साथ जरूरी दस्तावेज बनाने के 39 किमी दूर लोहाघाट जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। गुमदेश विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष माधो सिंह अधिकारी के नेतृत्व में क्षेत्र के कई लोग उप तहसील संचालन के लिए कई बार आवाज उठा चुके हैं, लेकिन तहसील शुरू नहीं हो सकी। कलक्ट्रेट के प्रभारी अधिकारी अनिल सिंह गर्ब्याल की ओर से 22 जनवरी को राजस्व परिषद को भेजे पत्र में उप तहसील का संचालन न होने की वजह राजस्व अधिकारियों और कर्मियों की कमी होना बताया गया है।
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जनवरी 2017 से बंद है मंच उप तहसील
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए दिसंबर 2016 में खोली गई मंच उप तहसील का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। उप तहसील में न नायब तहसीलदार है और न ही कोई अन्य कर्मी। जनवरी 2017 से इसमें ताला लटका पड़ा है। उप तहसील खुलने से एक भी प्रमाणपत्र नहीं बन सका है। अगर इस उप तहसील का संचालन होता तो 14 ग्राम पंचायतों के आठ हजार से अधिक लोगों को राजस्व से संबंधित कार्यों के लिए 35 किमी दूर चंपावत नहीं जाना पड़ता। एडीएम टीएस मर्तोलिया का कहना है कि क्षेत्र में इंटरनेट नेटवर्क की दिक्कत होने के साथ ही स्टाफ की कमी के चलते उप तहसील का संचालन नहीं हो पा रहा है। (ब्यूरो)
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एक तहसीलदार के जिम्मे हैं चार तहसीलें
चंपावत। पांच तहसील वाले चंपावत जिले के पहाड़ी क्षेत्र में पांच तहसीलें हैं, लेकिन पहाड़ की तीन (लोहाघाट, पाटी और बाराकोट) तहसीलों में एक भी तहसीलदार नहीं है। इन तीनों तहसील की अतिरिक्त जिम्मेदारी चंपावत के तहसीलदार प्रियंका रानी के पास है। अधिकारियों की कमी से लोगों को जरूरी काम के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। (ब्यूरो)
कोट...
गुमदेश उप तहसील को जल्द से जल्द से संचालित कराने के लिए जरूरी स्टाफ की तैनाती का प्रयास किया जाएगा। अन्य तहसीलों के रिक्त पदों को भरने के लिए आवाज उठाई जाएगी। - पूरन सिंह फर्त्याल, विधायक, लोहाघाट।
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कांग्रेस के शासन में लोगों की सुविधा के लिए कई छोटी प्रशासनिक इकाइयां खोली गईं, लेकिन भाजपा सरकार ने उन्हें संचालित करने के बजाय बंद कर दिया। स्टाफ की कमी और अन्य दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाए।- हेमेश खर्कवाल, प्रदेश महामंत्री, कांग्रेस।