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सूखीढांग जीआईसी का मध्यान्ह भोजन विवाद सुलझा
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सूखीढांग जीआईसी में विवाद को सुलझाने के लिए छात्रों और अभिभावकों की बैठक लेतें डीएम नरेंद्र सिं?
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत/टनकपुर। सूखीढांग जीआईसी का मिड डे मील (एमडीएम) विवाद सुलझा लिया गया है। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी और सीईओ जितेंद्र सक्सेना ने शुक्रवार को सूखीढांग जीआईसी पहुंच छात्रों और अभिभावकों से वार्ता कर छात्रों को मध्याह्न भोजन करने के लिए राजी किया। भोजन न करने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों ने कहा कि चावल से दिक्कत होने के कारण उन्होंने खाना खाने से इनकार किया था।
डीएम ने कहा कि चावल नहीं खाने वाले छात्र-छात्राएं एमडीएम में बनने वाली दाल, सब्जी या अन्य सामग्री खा लें। सीईओ का कहना था कि स्वास्थ्य कारणों से चावल न खाने वाले विद्यार्थियों के लिए भविष्य में रोटी देने के विकल्प पर भी विचार किया जाएगा। बाद में खुद डीएम, सीईओ और अन्य अधिकारियों ने भी भोजन किया। 57 में से उपस्थित रहे सभी 37 छात्र-छात्राओं ने खाना खाया। प्रधानाचार्य प्रेम सिंह ने एक दिन पूर्व इस संबंध में अभिभावकों से मंत्रणा की थी लेकिन तब मामला नहीं सुलझ सका था। शुक्रवार को को मिड डे मील विवाद सुलझा लिया गया।
यह था मामला
सूखीढांग के जीआईसी में छठी से आठवीं कक्षा के सात से दस बच्चे अनुसूचित जाति की भोजनमाता के हाथों बनाया खाना नहीं खा रहे थे। आरोप था कि सवर्ण जाति के ये बच्चे जातिगत कारणों से भोजन का बहिष्कार कर रहे थे। मामले में चेतावनी देते हुए स्कूल प्रशासन ने कुछ बच्चों की टीसी भी काट दी थी।
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नकली टीसी काटी गई थी, असली नहीं : सीईओ
चंपावत/टनकपुर। जीआईसी के सात छात्र-छात्राओं की टीसी (स्थानांतरण प्रमाणपत्र) काटने से स्कूल अब मुकर रहा है। सीईओ जितेंद्र सक्सेना का कहना है कि कॉलेज प्रशासन ने छात्रों और उनके अभिभावकों को समझाने के लिहाज से नकली टीसी काटी थी। हालांकि, उन्होंने माना कि इस तरह की टीसी काटना सही नहीं था। सीईओ ने कहा कि विभाग ऐसे कृत्य को सही नहीं मानता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बेवजह किसी भी छात्र-छात्रा का नाम नहीं काटा जाएगा। स्कूल पढ़ाई के लिए है न कि छात्रों के नाम काटने के लिए।
शिक्षक पर लगा दो छात्राओं की पिटाई का आरोप
चंपावत/टनकपुर। मिड डे मील विवाद के बीच कुछ अभिभावकों ने एक शिक्षक पर दो छात्राओं से अभद्रता और उनकी पिटाई करने का आरोप लगाया। इन अभिभावकों ने डीएम और सीईओ से कहा कि उनके बच्चों को स्कूल में बिना किसी कारण पीटा गया। कई अभिभावकों से सही व्यवहार न करने का आरोप भी शिक्षक पर लगा। डीएम ने तीन दिन के भीतर मामले की जांच करने के आदेश सीईओ को दिए हैं। सीईओ ने कहा कि आरोपित शिक्षक कमल राजन से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच में सभी पक्षों को सुना जाएगा। जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मुझ पर आरोप झूठे
मुझ पर लगाए गए आरोप झूठे हैं। अनुसूचित जाति की एक बालिका को सीट पर नहीं बैठने देने पर छात्राओं को समझाया गया था। नहीं मानने पर दो छात्राओं को डांटा गया। -कमल राजन, शिक्षक, सूखीढांग
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डीएम ने कहा कि चावल नहीं खाने वाले छात्र-छात्राएं एमडीएम में बनने वाली दाल, सब्जी या अन्य सामग्री खा लें। सीईओ का कहना था कि स्वास्थ्य कारणों से चावल न खाने वाले विद्यार्थियों के लिए भविष्य में रोटी देने के विकल्प पर भी विचार किया जाएगा। बाद में खुद डीएम, सीईओ और अन्य अधिकारियों ने भी भोजन किया। 57 में से उपस्थित रहे सभी 37 छात्र-छात्राओं ने खाना खाया। प्रधानाचार्य प्रेम सिंह ने एक दिन पूर्व इस संबंध में अभिभावकों से मंत्रणा की थी लेकिन तब मामला नहीं सुलझ सका था। शुक्रवार को को मिड डे मील विवाद सुलझा लिया गया।
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यह था मामला
सूखीढांग के जीआईसी में छठी से आठवीं कक्षा के सात से दस बच्चे अनुसूचित जाति की भोजनमाता के हाथों बनाया खाना नहीं खा रहे थे। आरोप था कि सवर्ण जाति के ये बच्चे जातिगत कारणों से भोजन का बहिष्कार कर रहे थे। मामले में चेतावनी देते हुए स्कूल प्रशासन ने कुछ बच्चों की टीसी भी काट दी थी।
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नकली टीसी काटी गई थी, असली नहीं : सीईओ
चंपावत/टनकपुर। जीआईसी के सात छात्र-छात्राओं की टीसी (स्थानांतरण प्रमाणपत्र) काटने से स्कूल अब मुकर रहा है। सीईओ जितेंद्र सक्सेना का कहना है कि कॉलेज प्रशासन ने छात्रों और उनके अभिभावकों को समझाने के लिहाज से नकली टीसी काटी थी। हालांकि, उन्होंने माना कि इस तरह की टीसी काटना सही नहीं था। सीईओ ने कहा कि विभाग ऐसे कृत्य को सही नहीं मानता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बेवजह किसी भी छात्र-छात्रा का नाम नहीं काटा जाएगा। स्कूल पढ़ाई के लिए है न कि छात्रों के नाम काटने के लिए।
शिक्षक पर लगा दो छात्राओं की पिटाई का आरोप
चंपावत/टनकपुर। मिड डे मील विवाद के बीच कुछ अभिभावकों ने एक शिक्षक पर दो छात्राओं से अभद्रता और उनकी पिटाई करने का आरोप लगाया। इन अभिभावकों ने डीएम और सीईओ से कहा कि उनके बच्चों को स्कूल में बिना किसी कारण पीटा गया। कई अभिभावकों से सही व्यवहार न करने का आरोप भी शिक्षक पर लगा। डीएम ने तीन दिन के भीतर मामले की जांच करने के आदेश सीईओ को दिए हैं। सीईओ ने कहा कि आरोपित शिक्षक कमल राजन से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच में सभी पक्षों को सुना जाएगा। जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मुझ पर आरोप झूठे
मुझ पर लगाए गए आरोप झूठे हैं। अनुसूचित जाति की एक बालिका को सीट पर नहीं बैठने देने पर छात्राओं को समझाया गया था। नहीं मानने पर दो छात्राओं को डांटा गया। -कमल राजन, शिक्षक, सूखीढांग

सूखीढांग जीआईसी में छात्र-छात्राओं के साथ भोजन करते डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी और सीईओ जितेंद्र स?- फोटो : CHAMPAWAT