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आरोपित शिक्षक की ओर से आज मिलेगा जवाब
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MDM Case of Gic Sukhidhang
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चंपावत। सूखीढांग जीआईसी का मिड डे मील विवाद तो सुलझ गया लेकिन एक शिक्षक पर दो छात्राओं से अभद्रता और पिटाई करने के आरोप के मामले की जांच का निष्कर्ष नहीं निकल सका है। आरोपित शिक्षक को सोमवार तक सीईओ को स्पष्टीकरण देना है।
दरअसल 14 मई को हाईस्कूल की छात्राओं की पिटाई के आरोप को दो दिन पहले शुक्रवार को जिलाधिकारी और सीईओ की मौजूदगी में खुद शिक्षक ने स्वीकार किया था। साथ ही ज्यादातर अभिभावक भी शिक्षक पर अभिभावकों से दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा रहे हैं। इसके चलते शिक्षक पर कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी का कहना है कि सूखीढांग मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
चंपावत जिले में एससी श्रेणी की 53 भोजनमाताएं
चंपावत। सूखीढांग जीआईसी में पिछले दिनों हुए मिड डे मील (एमडीएम) विवाद जातीय कारणों के बजाय अन्य वजह से ज्यादा नजर आता है। बहरहाल बाद में प्रशासन ने तत्काल प्रभावी कदम उठा इस विवाद को सुलझा दिया। सबसे खास बात यह है कि चंपावत जिले में सभी जातियों की भोजनमाताएं सेवाएं दे रही हैं। सूखीढांग को छोड़ किसी अन्य स्कूल में इस तरह का विवाद नहीं हुआ।
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पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं के लिए सरकारी स्कूलों में एमडीएम की व्यवस्था है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चंपावत जिले में 957 भोजनमाताओं में से 53 भोजनमाताएं अनुसूचित जाति की हैं। उन स्कूलों में किसी सवर्ण छात्र-छात्रा के भोजन नहीं करने का मामला सामने नहीं आया। इसके अलावा छह भोजनमाताएं एसटी और 49 ओबीसी वर्ग की हैं। सवर्ण जाति की 849 भोजनमाताएं हैं। जिले में 681 स्कूलों में कुल 21731 छात्र-छात्राएं इस योजना का लाभ ले रहे हैं।
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दरअसल 14 मई को हाईस्कूल की छात्राओं की पिटाई के आरोप को दो दिन पहले शुक्रवार को जिलाधिकारी और सीईओ की मौजूदगी में खुद शिक्षक ने स्वीकार किया था। साथ ही ज्यादातर अभिभावक भी शिक्षक पर अभिभावकों से दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा रहे हैं। इसके चलते शिक्षक पर कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी का कहना है कि सूखीढांग मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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चंपावत जिले में एससी श्रेणी की 53 भोजनमाताएं
चंपावत। सूखीढांग जीआईसी में पिछले दिनों हुए मिड डे मील (एमडीएम) विवाद जातीय कारणों के बजाय अन्य वजह से ज्यादा नजर आता है। बहरहाल बाद में प्रशासन ने तत्काल प्रभावी कदम उठा इस विवाद को सुलझा दिया। सबसे खास बात यह है कि चंपावत जिले में सभी जातियों की भोजनमाताएं सेवाएं दे रही हैं। सूखीढांग को छोड़ किसी अन्य स्कूल में इस तरह का विवाद नहीं हुआ।
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पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं के लिए सरकारी स्कूलों में एमडीएम की व्यवस्था है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चंपावत जिले में 957 भोजनमाताओं में से 53 भोजनमाताएं अनुसूचित जाति की हैं। उन स्कूलों में किसी सवर्ण छात्र-छात्रा के भोजन नहीं करने का मामला सामने नहीं आया। इसके अलावा छह भोजनमाताएं एसटी और 49 ओबीसी वर्ग की हैं। सवर्ण जाति की 849 भोजनमाताएं हैं। जिले में 681 स्कूलों में कुल 21731 छात्र-छात्राएं इस योजना का लाभ ले रहे हैं।