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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Maternal mortality declined by 22 percent in 13 years

13 साल में कम हुई 22 प्रतिशत मातृ मृत्यु दर

Sat, 07 May 2016 10:37 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत Updated Sat, 07 May 2016 10:37 PM IST
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 मां बनना हर विवाहिता की ख्वाइश होती है, लेकिन इस डगर में चुनौतियां भी कम नहीं। खासकर प्रसव के दौरान महिलाओं की बड़ी संख्या में मौत होना, लेकिन खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवाओं वाले चंपावत जिले ने गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर पर अब काफी हद तक काबू कर लिया है। 13 वर्षों में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) मेें 21.88 प्रतिशत कमी आई है। पिछले चार वर्षों में मात्र 9 गर्भवतियों की मौत हुई है। कई कारणों के साथ ही संस्थागत प्रसव की दर में इजाफा इसकी वजह है।
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2.65 लाख की आबादी वाले जिले में 1.27 लाख महिलाएं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खानपान में लापरवाही के चलते कुपोषण और खून की कमी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। इन प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद गर्भवतियों की मृत्यु दर काबू में है। स्वास्थ्य महकमे के आंकड़े बताते हैं कि यहां प्रति एक लाख गर्भवतियों में 181 की मौत हो रही है। ये दर प्रांतीय दर (एक लाख गर्भवतियों में 188 की मौत) से कम है, जबकि जिले में वर्ष 2003 में ये आंकड़ा 233 का था।
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एनआरएचएम कार्यक्रम के जिला समन्वयक गौरव पांडेय का कहना है कि जिले में पिछले चार वर्षों में मात्र 9 गर्भवती महिलाओं की मौत हुई है। विभाग ने घरों के बजाय स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के लिए महिलाओं को प्रेरित किया। एएनएम से लेकर आशा कार्यकत्रियों तक को कार्यक्रम से जोड़ा गया। स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव की सुविधा होने से महिलाओं की जिंदगी को बचाना मुमकिन हुआ है। स्टाफ की कमी के बावजूद संस्थागत प्रसव दर में इजाफा हुआ है। पिछले वर्ष 2966 प्रसवों में से घरेलू प्रसव मात्र 816 थे।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाए गए कदमों से काफी सुधार हुआ है। संस्थागत प्रसवों के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित करने के अलावा रक्त अल्पता और दूसरे कई कदम उठाए गए हैं। इस कारण मातृ मृत्यु दर में निरंतर गिरावट आ रही है। -डा.विनोद टोलिया, सीएमओ, चंपावत।


एनीमिया पर खास जोर
महिलाओं के गर्भवती होने से 42 दिनों तक होने वाली मौत मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) के दायरे में आती है। बशर्ते मौत की वजह कोई हादसा न हो, प्रसव संबंधी कारण हो। जिले की सभी 71 एएनएम को हीमोग्लोबिन किट दी गई है, जिससे गर्भवतियों के रक्त अल्पता की स्थिति का फौरन पता लग जाता है। इसी तरह महिलाओं को आयरन के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाता है। साथ ही आशा कार्यकत्रियों द्वारा जागरूकता का स्तर भी बढ़ा है।
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