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टनकपुर में कई यात्री फंसे
अमर उजाला ब्यूूूूराे टनकपुर (चंपावत)।
Updated Mon, 22 Jan 2018 11:08 PM IST
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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में सिन्याड़ी में फंसी सड़क काटने वाली मशीन।
- फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ी दरकने से सिन्याड़ी के पास बंद हुआ टनकपुर-चंपावत एनएच रात में खुलने के बाद सोमवार दोपहर फिर दरकी पहाड़ी के मलबे से पटकर बंद हो गया है। रुक-रुक पहाड़ी के दरकने से हालात संवेदनशील बने हैं।
प्रशासन ने चंपावत-टनकपुर के बीच ट्रैफिक रोक दिया है। सोमवार दोपहर बाद से कई यात्री जहां के तहां फंसे हैं। जिला प्रशासन ने यात्रियों के ठहरने, जलपान, भोजन, पेयजल की व्यवस्था के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन टनकपुर में यात्रियों की किसी ने भी सुध नहीं ली। कोई यात्री रोडवेज बस स्टेशन के विश्रामालय की बेंच पर बैठ कर रात बिताने को मजबूर है तो कुछ होटलों में शरण लेकर जेब ढीली करने को मजबूर हैं। टनकपुर के ककरालीगेट बैरियर से आगे वाहनों को न जाने देने से संवेदनशील स्थान से पहले सूखीढांग क्षेत्र में रहने वाले कई लोग भी टनकपुर में ही शरण लेने को मजबूर हैं।
-जाना था सिन्याड़ी से पहले सूखीढांग, जाने नहीं दिया
सूूखीढांग निवासी नवीन चंद्र चौड़ाकोटी ने बताया कि सोमवार सुबह मार्ग खुलने पर वह अपने 11 वर्षीय बुआ के बेटे सौरभ जोशी, भाई विपिन चौड़ाकोटी के साथ खरीदारी करने टनकपुर आया था, लेकिन दोपहर में मार्ग बंद हो जाने से उन्हें भी ककरालीगेट से आगे नहीं जाने दिया गया। मजबूरीवश उन्हें यहां होटल में ठहरकर जेब ढीली करनी पड़ रही है।
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-बस स्टेशन की बेंच में बैठकर काटनी पड़ी रात
बरेली से अपनी मां के साथ लौट रहे चंपावत निवासी ईश्वरी दत्त भी टनकपुर में फंसे हैं। बस स्टेशन के विश्रामशेड में बैठे मिले ईश्वरी दत्त ने बताया कि वह दोपहर करीब एक बजे टनकपुर पहुंच गए थे। चंपावत जाने के लिए टैक्सी में बैठकर निकले तो पुलिस ने उनके वाहन को ककरालीगेट बैरियर से वापस लौटा दिया। अब मजबूरीवश उन्हें टनकपुर में रात बितानी पड़ रही है। प्रशासन की ओर से खानपान, ठहरने की कोई व्यवस्था की जानकारी उन्हें नहीं है।
बरेली के इलेक्ट्रिशियन को बस स्टेशन में काटनी पड़ी रात
बरेली से लोहाघाट जा रहे इलेक्ट्रिशियन जुनैद खान ने बताया कि वह काम के लिए अपने एक अन्य साथी के साथ लोहाघाट जा रहा था, लेकिन मार्ग बंद होने से दोपहर एक बजे से टनकपुर में फंसा है। वे घर से इतने रुपये भी नहीं लाए कि ऐसी स्थिति में किसी होटल में ठहरकर खानपान कर सके। अब उन्हें रोडवेज बस स्टेशन के यात्री विश्रामालय की बेंच पर ही बैठकर रात काटनी पड़ेगी।
मध्य प्रदेश से आए जेसीबी ऑपरेशन ने झेली परेशानी
मध्य प्रदेश से चंपावत जा रहा जेसीबी ऑपरेटर भी टनकपुर में फंसा है। उसने बताया कि वह भी दोपहर एक बजे टनकपुर पहुंचा तो पता चला कि आगे का रास्ता बंद है। फिर वह टैक्सी में बैठकर चंपावत के लिए रवाना हुआ ककरालीगेट बैरियर पर उन्हें आगे जाने से रोक दिया। उसके पास बाया हल्द्वानी देवीधुरा होते हुए चंपावत को रुपये तो हैं, लेकिन वाहन न मिलने से उसे मजबूरीवश यहां रुकना पड़ा है। अब तो रास्ता खुलने पर ही वह चंपावत को रवाना होगा।
प्रशासन ने चंपावत-टनकपुर के बीच ट्रैफिक रोक दिया है। सोमवार दोपहर बाद से कई यात्री जहां के तहां फंसे हैं। जिला प्रशासन ने यात्रियों के ठहरने, जलपान, भोजन, पेयजल की व्यवस्था के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन टनकपुर में यात्रियों की किसी ने भी सुध नहीं ली। कोई यात्री रोडवेज बस स्टेशन के विश्रामालय की बेंच पर बैठ कर रात बिताने को मजबूर है तो कुछ होटलों में शरण लेकर जेब ढीली करने को मजबूर हैं। टनकपुर के ककरालीगेट बैरियर से आगे वाहनों को न जाने देने से संवेदनशील स्थान से पहले सूखीढांग क्षेत्र में रहने वाले कई लोग भी टनकपुर में ही शरण लेने को मजबूर हैं।
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-जाना था सिन्याड़ी से पहले सूखीढांग, जाने नहीं दिया
सूूखीढांग निवासी नवीन चंद्र चौड़ाकोटी ने बताया कि सोमवार सुबह मार्ग खुलने पर वह अपने 11 वर्षीय बुआ के बेटे सौरभ जोशी, भाई विपिन चौड़ाकोटी के साथ खरीदारी करने टनकपुर आया था, लेकिन दोपहर में मार्ग बंद हो जाने से उन्हें भी ककरालीगेट से आगे नहीं जाने दिया गया। मजबूरीवश उन्हें यहां होटल में ठहरकर जेब ढीली करनी पड़ रही है।
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-बस स्टेशन की बेंच में बैठकर काटनी पड़ी रात
बरेली से अपनी मां के साथ लौट रहे चंपावत निवासी ईश्वरी दत्त भी टनकपुर में फंसे हैं। बस स्टेशन के विश्रामशेड में बैठे मिले ईश्वरी दत्त ने बताया कि वह दोपहर करीब एक बजे टनकपुर पहुंच गए थे। चंपावत जाने के लिए टैक्सी में बैठकर निकले तो पुलिस ने उनके वाहन को ककरालीगेट बैरियर से वापस लौटा दिया। अब मजबूरीवश उन्हें टनकपुर में रात बितानी पड़ रही है। प्रशासन की ओर से खानपान, ठहरने की कोई व्यवस्था की जानकारी उन्हें नहीं है।
बरेली के इलेक्ट्रिशियन को बस स्टेशन में काटनी पड़ी रात
बरेली से लोहाघाट जा रहे इलेक्ट्रिशियन जुनैद खान ने बताया कि वह काम के लिए अपने एक अन्य साथी के साथ लोहाघाट जा रहा था, लेकिन मार्ग बंद होने से दोपहर एक बजे से टनकपुर में फंसा है। वे घर से इतने रुपये भी नहीं लाए कि ऐसी स्थिति में किसी होटल में ठहरकर खानपान कर सके। अब उन्हें रोडवेज बस स्टेशन के यात्री विश्रामालय की बेंच पर ही बैठकर रात काटनी पड़ेगी।
मध्य प्रदेश से आए जेसीबी ऑपरेशन ने झेली परेशानी
मध्य प्रदेश से चंपावत जा रहा जेसीबी ऑपरेटर भी टनकपुर में फंसा है। उसने बताया कि वह भी दोपहर एक बजे टनकपुर पहुंचा तो पता चला कि आगे का रास्ता बंद है। फिर वह टैक्सी में बैठकर चंपावत के लिए रवाना हुआ ककरालीगेट बैरियर पर उन्हें आगे जाने से रोक दिया। उसके पास बाया हल्द्वानी देवीधुरा होते हुए चंपावत को रुपये तो हैं, लेकिन वाहन न मिलने से उसे मजबूरीवश यहां रुकना पड़ा है। अब तो रास्ता खुलने पर ही वह चंपावत को रवाना होगा।